धान कटाई के बाद खेत में बची पराली (फाइल फोटो) फोटो साभार Wikimedia Commons / Neil Palmer (CIAT), CC BY-SA 2.0

धान कटाई का सीजन शुरू होते ही पराली जलाने के मामलों में मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे आ गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के CREAMS सैटेलाइट बुलेटिन के मुताबिक 15 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक 7 राज्यों में 287 जगह खेतों में आग पकड़ी गई, इनमें 118 घटनाएं मध्य प्रदेश की हैं।

पंजाब 88 घटनाओं के साथ दूसरे और उत्तर प्रदेश 65 के साथ तीसरे नंबर पर है। सिर्फ 6 अक्टूबर को देश में दर्ज 33 घटनाओं में से 24 मध्य प्रदेश की थीं।

पराली जलाने पर क्या सजा है और किसान कौन सी मशीन व तकनीक अपनाकर इससे बच सकते हैं, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल 1. किस राज्य में पराली जलाने की कितनी घटनाएं हुईं?

जवाब- IARI का CREAMS हर साल 15 सितंबर से सैटेलाइट के जरिए धान के खेतों में लगी आग गिनता है। 6 अक्टूबर 2026 के बुलेटिन में मध्य प्रदेश 118, पंजाब 88, उत्तर प्रदेश 65, राजस्थान 10 और हरियाणा 4 घटनाओं पर रहा। दिल्ली और उत्तराखंड में 1-1 घटना दर्ज हुई।

ग्राफिक से समझिए…

15 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक राज्यवार पराली जलाने की घटनाएं
15 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक राज्यवार पराली जलाने की घटनाएं

सवाल 2. क्या केंद्र सरकार ने भी MP के आंकड़ों पर चिंता जताई है?

जवाब- हां। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 13 अक्टूबर 2026 को राज्यों के साथ बैठक की। कृषि मंत्रालय के मुताबिक 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच MP में घटनाएं पिछले साल के 55 से बढ़कर 277 हो गईं, यानी 452% बढ़ोतरी। केंद्र ने प्रभावित जिलों और गांवों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा।

पिछले सीजन यानी 2025 में देश में 33,028 घटनाएं दर्ज हुई थीं, इनमें 17,067 यानी आधे से ज्यादा मध्य प्रदेश की थीं।

सवाल 3. पराली जलाए बिना गेहूं की बोवनी कैसे करें?

जवाब- कृषि मंत्रालय की फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना में ऐसी मशीनें शामिल हैं, जो पराली को खेत में ही निपटा देती हैं। इसे इन-सीटू प्रबंधन कहते हैं। आसान भाषा में समझिए…

खेत में ही पराली निपटाने वाली मशीनें

  • सुपर SMS, कंबाइन हार्वेस्टर के पीछे लगता है और कटाई के साथ पराली के टुकड़े कर खेत में फैला देता है।
  • हैप्पी सीडर, खड़ी पराली के बीच ही गेहूं बो देता है। पराली ऊपर ढकी रहकर नमी बचाती है।
  • सुपर सीडर, पराली को मिट्टी में मिलाकर उसी समय बोवनी भी कर देता है।
  • मल्चर और चॉपर, पराली को बारीक काटकर खेत में बिछा देते हैं।
  • जीरो टिल ड्रिल, बिना जुताई सीधे बोवनी करती है, जिससे डीजल और समय बचता है।

सवाल 4. क्या पराली बेचकर कमाई भी हो सकती है?

जवाब- हां। पराली को खेत से उठाकर उद्योग तक पहुंचाना एक्स-सीटू प्रबंधन कहलाता है। इसके 3 बड़े रास्ते हैं…

  • बेलर और रेक, रेक पराली को कतार में इकट्ठा करता है और बेलर उसकी गांठें बनाता है। ये गांठें पैलेट, बिजली और CBG प्लांट खरीदते हैं।
  • बिजलीघरों में पैलेट, ऊर्जा मंत्रालय के SAMARTH मिशन में कोयले वाले थर्मल प्लांट को 5% बायोमास पैलेट मिलाकर जलाना जरूरी है। इससे किसान को पराली बेचकर अतिरिक्त आय मिलती है।
  • बायोगैस यानी CBG, पेट्रोलियम मंत्रालय की SATAT योजना में कृषि अवशेष से कंप्रेस्ड बायोगैस बनती है, जो वाहन ईंधन है।

नीचे ग्राफिक में देखिए…

पराली जलाने के बजाय अपनाए जा सकने वाले 7 तरीके
पराली जलाने के बजाय अपनाए जा सकने वाले 7 तरीके
बैतूल के घोड़ाडोंगरी में कृषि विभाग ने सुपर सीडर से बिना नरवाई जलाए चने की बोवनी कराई थी (नवंबर 2024)
बैतूल के घोड़ाडोंगरी में कृषि विभाग ने सुपर सीडर से बिना नरवाई जलाए चने की बोवनी कराई थी (नवंबर 2024) फोटो साभार Jansampark MP

सवाल 5. पूसा डीकंपोजर क्या है?

जवाब- यह IARI नई दिल्ली का बनाया सस्ता जैविक घोल है। इसे पराली पर छिड़कने से पराली खेत में ही सड़कर खाद बन जाती है। इसका नारा है, जलाना नहीं, गलाना है।

सवाल 6. मशीन खरीदने पर कितनी सब्सिडी मिलती है?

जवाब- CRM योजना में किसान को मशीन की कीमत पर 50% मदद मिलती है। FPO, सहकारी समिति, स्व सहायता समूह और पंचायत को कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) खोलने पर 80% मदद मिलती है। मध्य प्रदेश को इस योजना में ₹59 करोड़ मिल चुके हैं।

मध्य प्रदेश के किसान कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के पोर्टल dbt.mpdage.org पर पंजीयन कर नरवाई प्रबंधन यंत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं। छोटे किसान CHC से किराये पर मशीन ले सकते हैं।

मशीनों पर अनुदान और पराली जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति की दरें
मशीनों पर अनुदान और पराली जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति की दरें

सवाल 7. पराली जलाने पर क्या सजा है?

जवाब- केंद्र ने 6 नवंबर 2024 को नियम बदलकर पर्यावरण क्षतिपूर्ति दोगुनी की। 2 एकड़ से कम जमीन पर ₹5,000, 2 से 5 एकड़ पर ₹10,000 और 5 एकड़ से ज्यादा पर ₹30,000 प्रति घटना देना होगा। ये दरें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और NCR वाले राजस्थान व उत्तर प्रदेश में CAQM लागू करता है।

मध्य प्रदेश सरकार ने 1 मई 2025 से नियम बनाया है कि नरवाई जलाने वाले किसान को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की ₹6,000 सालाना राशि नहीं मिलेगी और उसकी उपज MSP पर नहीं खरीदी जाएगी। जिलों में कलेक्टर भी नरवाई जलाने पर प्रतिबंध के आदेश जारी करते हैं।

कुल मिलाकर, पराली अब बोझ नहीं, कमाई का जरिया बन सकती है। सब्सिडी वाली मशीनें, पूसा डीकंपोजर और पैलेट बाजार जैसे विकल्प मौजूद हैं, जबकि जलाने पर योजनाओं का लाभ और MSP पर बिक्री दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।

ग्राफिक- StateNews

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में पराली जलाने में कौन सा राज्य सबसे आगे है?

IARI CREAMS बुलेटिन के मुताबिक 15 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक 118 घटनाओं के साथ मध्य प्रदेश पहले नंबर पर है।

पराली प्रबंधन मशीन पर कितनी सब्सिडी मिलती है?

CRM योजना में किसान को 50% और CHC खोलने वाले FPO, समिति या पंचायत को 80% मदद मिलती है।

MP में नरवाई जलाने पर क्या नुकसान है?

1 मई 2025 से नरवाई जलाने वाले किसान को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का लाभ नहीं मिलता और उसकी फसल MSP पर नहीं खरीदी जाती।

पूसा डीकंपोजर क्या करता है?

IARI का यह जैविक घोल छिड़कने पर पराली को खेत में ही सड़ाकर खाद बना देता है।

स्रोत IARI CREAMS पोर्टल, PIB, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय SAMARTH मिशन, आकाशवाणी समाचार