अशोकनगर नगरपालिका में महाघोटाला: भ्रष्टाचार का अड्डा बनी सरकारी संस्था

अशोकनगर: मध्य प्रदेश के अशोकनगर में नगरपालिका को एक प्राइवेट कंपनी की तरह चलाने का आरोप लगा है। नेता प्रतिपक्ष रीतेश जैन आजाद ने बुधवार को एक प्रेसवार्ता में यह गंभीर आरोप लगाए।

रीतेश आजाद ने खुलासा किया कि अशोकनगर नगरपालिका अध्यक्ष और अपात्र सीएमओ ने मिलकर सरकारी आदेशों को नज़रअंदाज़ करते हुए सिंगल टेंडर पर लाखों-करोड़ों की बंदरबांट कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह संस्था अब भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और वित्तीय अनियमितताओं का केंद्र बन चुकी है।"

सिंगल टेंडर का खेल: विज्ञापन गायब, नोटिस बोर्ड सूना

रीतेश आजाद ने बताया कि नियमों के अनुसार किसी भी टेंडर को वैध बनाने के लिए न्यूनतम तीन निविदाएं आवश्यक होती हैं। साथ ही बड़े टेंडर को एक राष्ट्रीय और दो प्रादेशिक अखबारों में प्रकाशित करना अनिवार्य है। लेकिन यहां टेंडर न तो अखबारों में दिखते हैं, न ही नोटिस बोर्ड पर।

अजीबो-गरीब कारनामा: टेंडर बाद में खुलेगा, काम पहले ही पूरा!

  • केस 1: 5 लाख की पेंटिंग का टेंडर 20 मई को खुलना था, लेकिन 11 मई को विसर्जन कुंड का उद्घाटन होते समय पेंटिंग का काम पहले ही पूरा हो चुका था।
  • केस 2: करीब 10 लाख का स्वच्छ सर्वेक्षण पेंटिंग का टेंडर 25 मई को खुलना था, मगर 15 मई से पहले ही काम पूरा हो गया।
  • केस 3: सुविधा घाट निर्माण के लिए 12.18 लाख का टेंडर 1 जून को खुलना था, लेकिन मई के महीने में ही निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया।
  • केस 4: संजय स्टेडियम में बिना टेंडर के 2 करोड़ के निर्माण कार्य का शुभारंभ 5 जून को किया गया। एमपी टेंडर साइट पर इसका कोई टेंडर जारी नहीं हुआ है।

इस प्रकार की अनियमितताएं न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि नागरिकों के विश्वास को भी चोट पहुंचाती हैं। सरकार को इस मामले की गहन जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।