धर्म से बड़ी निकली 30 वर्षो की दोस्ती
मुस्लिम दोस्त ने निभाया अंतिम फर्ज, हिंदू मित्र को हिंदू रीति-रिवाज से दी विदाई,
मुस्तकीम मुगल
आलीराजपुर। ऐसे समय में जब समाज को अक्सर धर्म और जाति के चश्मे से देखने की कोशिश की जाती है, आलीराजपुर से इंसानियत, भाईचारे और सच्ची दोस्ती की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने मानवता को धर्म से ऊपर साबित कर दिया। यहां एक मुस्लिम युवक ने अपने हिंदू मित्र की मृत्यु के बाद उसका हिंदू रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार कर दोस्ती का ऐसा फर्ज निभाया, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है।
जानकारी के अनुसार नर्मदा पाइपलाइन परियोजना में कार्यरत मेघा कंपनी के ड्राइवर एवं राजस्थान के अजमेर निवासी अशोक सिंह सोलंकी देर रात्रि मालवई गांव में शिव मंदिर के समीप सड़क हादसे का शिकार हो गए। अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल अशोक सिंह को जिला अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
दुर्भाग्यवश अशोक सिंह के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था और उनके अंतिम संस्कार के लिए कोईटी नजदीकी परिजन भी मौजूद नहीं था।नाहि उनका कोई पता था,ऐसे कठिन समय में उनके लगभग 30 वर्षों पुराने मित्र और साथी ड्राइवर सुल्तान गनी, जिनके साथ वे रहते थे, आगे आए और दोस्ती का फर्ज निभाने का संकल्प लिया।
मित्र की मौत से आहत सुल्तान गनी ने समाजसेवी दीपक दीक्षित और पत्रकार राकेश चौहान से संपर्क किया। दोनों ने बिना किसी भेदभाव के मानवता का परिचय देते हुए सहयोग का हाथ बढ़ाया और अंतिम संस्कार की संपूर्ण प्रक्रिया को सम्मानपूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद पंचेश्वर मुक्ति धाम में अशोक सिंह सोलंकी का हिंदू धर्म की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सुल्तान गनी, दीपक दीक्षित, राकेश चौहान, मेघा कंपनी के कर्मचारी तथा साथी ड्राइवर उपस्थित रहे।
श्मशान घाट पर मौजूद लोगों की आंखें उस समय नम हो गईं जब एक मुस्लिम मित्र अपने हिंदू दोस्त को अंतिम विदाई देने के लिए हर जिम्मेदारी निभाता नजर आया। यह दृश्य केवल एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि इंसानियत, भाईचारे और सच्ची दोस्ती का जीवंत उदाहरण था। सुल्तान गनी ने कहा कि मेरे मित्र की अस्थीयो को पुष्कर मे हिन्दु धर्म के रिती रिवाज से कार्यकम कराऊँगा,,
आलीराजपुर की यह घटना समाज को एक बड़ा संदेश देती है कि धर्म, जाति और मजहब से ऊपर इंसानियत होती है। जब अपने साथ नहीं होते, तब सच्चे दोस्त और संवेदनशील लोग ही सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। सुल्तान गनी ने दोस्ती का धर्म निभाया, जबकि दीपक दीक्षित और राकेश चौहान ने मानवता का फर्ज अदा करते हुए एक दिवंगत व्यक्ति को सम्मानजनक अंतिम विदाई दिलाई। यह घटना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इंसानियत और सामाजिक सौहार्द की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

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