सरकारी तंत्र पर बाहरी व्यक्ति का कब्जा: देवरी तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

*संवाददाता सतीष सेन*

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देवरीकलां। सरकारी दफ्तरों की गोपनीयता और अनुशासन केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। देवरी तहसील कार्यालय इसका जीता-जागता उदाहरण बन चुका है, जहां एक बाहरी व्यक्ति ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को अपने अधीन कर रखा है।

कौन है यशवंत कोष्टी?

देवरी तहसील कार्यालय में बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति के कार्यरत यशवंत कोष्टी पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीण और किसान सवाल कर रहे हैं कि यह व्यक्ति किसके आदेश पर सरकारी कंप्यूटरों पर बैठकर 'ऑर्डर शीट' लिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ रसूखदार अधिकारियों की शह पर उसे यह "अघोषित अधिकार" मिला हुआ है।

भ्रष्टाचार की 'सिंगल विंडो'

किसानों का आरोप है कि यशवंत कोष्टी ने तहसील कार्यालय में नामांतरण, फौती प्रकरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे कार्यों के लिए अपनी 'रेट लिस्ट' बना रखी है। जो किसान उसकी मांग पूरी करता है, उसका काम तुरंत हो जाता है, जबकि अन्य की फाइलें महीनों तक लंबित रहती हैं।

शासकीय गोपनीयता की अनदेखी

नियमों के बावजूद यशवंत कोष्टी शासकीय फाइलें अपने घर ले जाता है, जहां से वह अपने 'सेटिंग' का खेल खेलता है। यह स्पष्ट रूप से शासकीय गोपनीयता का उल्लंघन है।

मूकदर्शक बना अमला

तहसील कार्यालय में मौजूद आधिकारिक अमला जैसे राकेश रेंकवार (तहसीलदार के रीडर), सतीश प्रजापति (संविदा कर्मचारी), ब्रजलाल गौड़ (शासकीय चपरासी), और राजेश अहिरवार (शासकीय कर्मचारी) इस स्थिति पर मौन हैं। सवाल है कि इनकी मौजूदगी के बावजूद यशवंत कोष्टी को कंप्यूटर पर काम करने की अनुमति किसने दी?

जनता की मांग: जिला कलेक्टर से जाँच

देवरी की जनता और क्षेत्रीय किसानों ने जिला कलेक्टर से इस मामले की आकस्मिक जाँच की मांग की है। तहसील कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर यह स्पष्ट किया जाए कि एक बाहरी व्यक्ति किस अधिकार से सरकारी कुर्सी पर बैठ रहा है।

निष्कर्ष: देवरी तहसील कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी को उजागर करते हुए, स्थानीय जनता ने न्याय की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।