नहीं थम रहा पंचायत द्वारा श्रमिकों की फर्जी हाजिरी डालने का सिलसिला

मनरेगा ऐप पर मनमाने तरीके से दर्ज करा रहे मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति 

केसली जनपद की ग्राम पंचायत तुलसीपार एवं ग्राम पंचायत नारायणपुर के सरपंच, रोजगार सचिव द्वारा मनरेगा ऐप पोर्टल पर ग्राम के कुछ खासम खास रहने वाले लोगों के नाम पर चढ़ाये जा रहे हैं मनरेगा पोर्टल पेरिफेरल स्टोन बण्ड निर्माण कार्य खेल मैदान परिसर में बसा तुलसीपार। 
 

देवरी कला / केसली । सागर जिले की केसली जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत तुलसीपार में सरपंच एवं रोजगार सचिव गोपाल गौड़ ,और नारायणपुर ग्राम पंचायत के सरपंच एवं रोजगार सचिव प्रीतम गौड़ द्वारा शासन की महत्वकांछी योजना मनरेगा को नियम विरुद्ध फर्जी दस्तावेज  अपलोड कर मजदूरों की हाजिरी लगाई जा रही है। जिसमें लगातार मनरेगा ऐप पर रोजाना दर्जनों मजदूरों की उपिस्थति दर्ज कराई गई। जबकि मौके पर एक भी मजदूर मजदूरी करते दिखाई नही दिया। ऐप पर तुलसीपार रोजगार सचिव गोपाल गौड़ द्वारा अपलोड की गई जानकारी में पेरिफेरल स्टोन बण्ड निर्माण कार्य खेल मैदान परिसर में बसा तुलसीपार स्थान दर्शाया गया, जब धरातल पर जाकर देखा तो वहाँ पर तो निर्माण कार्य कई महीनों पहले हो चुका था। इसी प्रकार ग्राम पंचायत नारायणपुर में बोल्डर चेक डैम निर्माण कर ईदुलपुर में भी फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही थी जब वहां पर जाकर देखा तो धरातल पर कोई भी मजदूर उपस्थित नहीं पाया गया और जब जानकारी वहां पर ली तो कुछ ग्रामीणों ने निर्माण कार्य के बारे में बताया कि यह तो करीब कई महीनो पहले गर्मियों में हो चुका है। 

जब इस संबंध में तुलसीपार रोजगार सचिव गोपाल गौड़ से बात की तो बताया कि  खेल मैदान निर्माण का अर्थ बहुत पहले हो चुका है लेकिन डिमांड थी इसलिए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है ।
इसी प्रकार ग्राम पंचायत नारायणपुर रोजगार सचिव प्रीतम गौड़ से बात की तो उन्होंने उचित जवाब न देकर फोन काट दिया। 

 मतलब यह साफ है कि सारे मजदूर फर्जी तरीके से कागजों और फर्जी मस्टररोल जारी कर कार्य करते है। जमीन पर न मजदूरों का काम दिखता है न ही मजदूर। 


 सरपंच एवं रोजगार सचिव की मिलीभगत से कार्य पूरा होने के बाद मजदूरों के नाम की मनरेगा ऐप पर फर्जी हाजिरी लगाकर भुगतान करा लेते है
आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि ग्राम पंचायत तुलसीपार सरपंच रोजगार सचिव गोपाल गौड़, एवं नारायणपुर सरपंच एवं रोजगार सचिव प्रीतम गौड़ द्वारा शासन की राशि और पंचायत को दीमक की तरह खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं । और एक तरफ  मनरेगा योजना अंतर्गत पात्र व्यक्तियों के लिए लाभ न मिलने की वजह से अपना क्षेत्र छोड़कर अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए किसी अन्य क्षेत्रों में या प्रदेशों में पलायन के लिए चले जाते हैं ।और मनरेगा पोर्टल पर सक्षम व्यक्ति अपनी फर्जी हाजरी डलवा कर कुछ कमीशन के चक्कर में सरपंच रोजगार सचिव की मिलीभगत से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। और मनरेगा योजना की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अधिकारियों के संज्ञान में होते हुए भी नहीं हो रही भ्रष्ट पंचायत कर्मियों पर कोई भी कार्रवाई ।