विरासत और शुरुआत: शुद्धता और गुणवत्ता की परंपरा
भारतीय सभ्यता और संस्कृति में 'व्यापार' को केवल धनार्जन का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे समाज को उत्कृष्ट गुणवत्ता और सेवाएं प्रदान करने की एक जिम्मेदारी माना गया है। मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में बसा रतलाम शहर इसी प्राचीन व्यापारिक ईमानदारी का जीता-जागता उदाहरण है।
रतलाम मुख्य रूप से अपनी दो चीजों की शुद्धता के लिए पूरे भारत में जाना जाता है— पहला यहाँ का खरा सोना और दूसरा यहाँ का लाजवाब नमकीन। इस ऐतिहासिक और प्रामाणिक स्वाद की विरासत को आज 'पोरवाल नमकीन' पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहा है। वर्तमान में पोरवाल नमकीन के संचालक विपिन पोरवाल हैं, जो रतलाम के प्रतिष्ठित 'सेव मंडल' के अध्यक्ष मनोहर पोरवाल जी के सुपुत्र हैं।
प्राचीन काल में जिस प्रकार भारत में 'श्रेणी' (व्यापारिक गिल्ड) हुआ करते थे, जो अपने उत्पादों की गुणवत्ता और व्यापारियों के हितों की रक्षा करते थे, उसी प्रकार रतलाम का सेव मंडल यहाँ के स्वाद की साख को बचाए रखने का कार्य करता है। मंडल के अध्यक्ष मनोहर पोरवाल जी के मार्गदर्शन में, उनके पुत्र विपिन पोरवाल जी पर केवल अपने ब्रांड की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण रतलामी नमकीन उद्योग की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने का दायित्व है, जिसका वे भली-भांति निर्वहन कर रहे हैं।
संचालक से बातचीत: नमकीन की खासियत
हाल ही में हमारी 'पोरवाल नमकीन' के संचालक विपिन पोरवाल जी से एक विशेष बातचीत हुई। अत्यंत शालीनता और सहजता के साथ कैमरे के सामने अपने विचार रखते हुए उन्होंने रतलाम की विरासत और अपने नमकीन की खासियत पर विस्तार से प्रकाश डाला।
"रतलाम शहर हमारा नमकीन के लिए और सोने के लिए प्रसिद्ध है। नमकीन इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ की जलवायु और मसालों का मिश्रण इस तरीके से किया जाता है कि हमारा नमकीन इतना शुद्ध है कि कहीं भी, कोई भी, किसी भी उम्र का व्यक्ति इसे खा सकता है।"
उनका यह कथन इस बात को प्रमाणित करता है कि रतलामी नमकीन में केवल मसाले नहीं, बल्कि मालवा की हवा और पानी का वह जादुई असर है जिसे दुनिया में कहीं और कृत्रिम रूप से नहीं बनाया जा सकता। विपिन जी आगे बताते हैं, "हम भारत के हृदय में बैठे हुए हैं और चारों तरफ से जो मसाले आते हैं, चाहे वो हींग ले लीजिए, चाहे आप काली मिर्ची ले लीजिए, इन सबको मिलाकर हम मिश्रण करके एक अच्छा नमकीन बनाते हैं, जो पूरे भारतवर्ष में अपनी प्रसिद्धि लेता है।"
स्टेशन के करीब नई शाखा
यहाँ एक बात विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि रतलाम जंक्शन के आस-पास पहले से ही नमकीन की कई अन्य दुकानें मौजूद रही हैं। परंतु, यात्रियों की सुविधा और समय की पाबंदी को सर्वोपरि रखते हुए, पोरवाल नमकीन ने अपनी यह नई और भव्य शाखा स्टेशन के और भी अधिक करीब स्थापित की है।
रतलाम जंक्शन पर जब लंबी दूरी की ट्रेनें कुछ मिनटों के लिए रुकती हैं, तो यात्री असली रतलामी सेव खोजना चाहते हैं, लेकिन समय की कमी के कारण वे दूर जाने से कतराते हैं। पोरवाल नमकीन की इस नई शाखा ने उस भौगोलिक दूरी को मिटा दिया है। अब कोई भी यात्री ट्रेन छूटने के डर के बिना, स्टेशन के ठीक बाहर से मालवा का सबसे शुद्ध और प्रामाणिक नमकीन प्राप्त कर सकता है।
GI टैग (Geographical Indication)
इसी प्रामाणिकता और विशिष्टता के कारण ही वर्ष 2014 में रतलामी सेव को 'जीआई टैग' प्राप्त हुआ था। विपिन जी इस उपलब्धि को भी रतलाम के नमकीन उद्योग के लिए एक बहुत बड़ी बात मानते हैं, क्योंकि यह टैग इस बात की कानूनी मुहर है कि असली रतलामी सेव केवल रतलाम की भौगोलिक सीमा और यहाँ की पारंपरिक विधि से ही बन सकती है।
सांस्कृतिक और स्थानीय पहचान: 'वोकल फॉर लोकल' का सच्चा प्रतीक
रतलाम में सेव केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, यह यहाँ की संस्कृति और दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है। मालवा के प्रसिद्ध 'पोहे' के साथ सेव का जो संगम है, वह स्थानीय जनजीवन के नाश्ते की अनिवार्य शर्त है। भारत के कोने-कोने से आने वाले मसालों का रतलाम में आकर एक हो जाना, वास्तव में भारत की 'अनेकता में एकता' का ही एक पाक-शास्त्रीय रूप है।
आज के इस दौर में जहाँ बाजार में कई मिलावटी और मशीनी उत्पाद भरे पड़े हैं, वहाँ पोरवाल नमकीन जैसे उद्यम प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के सच्चे ब्रांड एंबेसडर हैं। स्टेशन के बिल्कुल पास स्थित fixed इस नई दुकान से जब कोई मुसाफिर नमकीन का पैकेट खरीदकर अपने शहर ले जाता है, तो वह केवल एक स्नैक नहीं ले जाता, बल्कि वह अपने साथ मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान ले जाता है।
पोरवाल नमकीन की यह विकास यात्रा और सेव मंडल अध्यक्ष मनोहर पोरवाल के सुपुत्र विपिन पोरवाल द्वारा स्टेशन के बिल्कुल करीब अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का यह नया कदम, इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे एक पारंपरिक व्यापार अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी ग्राहकों की आधुनिक जरूरतों को समझ सकता है। पोरवाल नमकीन केवल व्यवसाय का विस्तार नहीं कर रहा है, बल्कि वह भारत की 'स्वदेशी' चेतना और रतलाम की गौरवशाली विरासत की महक को हर गुजरती ट्रेन के साथ देश के कोने-कोने तक पहुँचा रहा है।
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