सलमान शेख/पेटलावद 
मानसून सीजन लगभग समाप्ति की ओर है, लेकिन इस बार वर्षा की कमी का असर पेटलावद क्षेत्र के तालाबों में साफ दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों हुई वर्षा से कुछ तालाबों में जलस्तर जरूर बढ़ा है, लेकिन क्षेत्र के कई तालाब अभी भी पर्याप्त पानी के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में आने वाले रबी सीजन में फसलों की सिंचाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है। वहीं गर्मी के दिनों में पालतू पशुओं के साथ-साथ जंगली जानवरों और अन्य पशु-पक्षियों के लिए भी जल उपलब्धता चुनौती बन सकती है।
वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो पेटलावद में 1 जून 2026 से अब तक करीब 21 इंच वर्षा दर्ज हुई है। जबकि पिछले वर्ष आज तक 33 इंच से अधिक वर्षा हो चुकी थी। वहीं पिछले 10 वर्षों की औसत वर्षा 1040.18 मिमी यानी करीब 41 इंच रही है। इस वर्ष अब तक औसत वर्षा के आंकड़े से करीब 20 इंच कम वर्षा हुई है। इसका सीधा असर क्षेत्र के जलस्रोतों और तालाबों में दिखाई दे रहा है।

85 तालाब जल संसाधन विभाग के अधीन:
गौरतलब है कि जल संसाधन उपसंभाग विभाग पेटलावद के अधीन कुल 85 तालाब हैं। इनमें 64 तालाब पेटलावद ब्लॉक में हैं, वहीं 21 तालाब थांदला ब्लॉक में आते हैं। अमूमन मानसून सीजन में अच्छी वर्षा होने पर ये तालाब भर जाते हैं और इनका पानी रबी सीजन में किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन बनता है। लेकिन इस वर्ष कम वर्षा के चलते कई तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं हो सका है। वर्तमान स्थिति में कुछ तालाबों में पर्याप्त पानी है, लेकिन कई जलाशयों में जलभराव काफी कम है। इसका असर आने वाले समय में रबी फसलों की सिंचाई पर पड़ सकता है। खासकर कम भराव वाले तालाबों पर निर्भर किसानों को फसल के दौरान पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रमुख पम्पावती और चोर बोराली में भी कम भराव:
जल संसाधन विभाग के अनुसार क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में शामिल तालाबों में इस बार जलभराव की स्थिति पिछले वर्षों की तरह नहीं है। ग्राम बनी का पम्पावती तालाब 51 प्रतिशत और अनंतखेड़ी का चोर बोराली तालाब 47 प्रतिशत भरा है। चोर बोराली तालाब से पेटलावद की नलजल योजना भी संचालित होती है। ऐसे में इस तालाब का जलस्तर नगर की पेयजल व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हालांकि कुछ तालाबों में स्थिति बेहतर है। मोरझिरी, तम्बोलिया, रूपाखेड़ा, बेड़दा और डाबड़ी तालाब 100 प्रतिशत भरे हुए हैं। वहीं रूपगढ़ 93 प्रतिशत और उन्नई 94 प्रतिशत तक भरा है। लेकिन क्षेत्र के कई अन्य तालाबों में जलभराव काफी कम है।

पशु-पक्षियों और वन्यजीवों के लिए भी पानी जरूरी:
तालाबों में कम पानी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पालतू पशु भी तालाबों और अन्य जलस्रोतों पर निर्भर रहते हैं। वहीं आसपास के जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले जंगली जानवरों के लिए भी प्राकृतिक जलस्रोत महत्वपूर्ण होते हैं। मानसून के बाद तालाबों में पर्याप्त पानी नहीं होने पर गर्मी के दौरान वन्यजीवों और पशु-पक्षियों के सामने भी पानी की समस्या खड़ी हो सकती है।

एसडीओ बोले- उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन जरूरी:
जल संसाधन विभाग उपसंभाग पेटलावद के एसडीओ देवेंद्र डावर ने बताया कि इस वर्ष वर्षा पिछले वर्षों की तुलना में कम रही है, जिसका असर तालाबों के जलभराव पर भी पड़ा है। हालांकि क्षेत्र के कई तालाबों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है और जहां जलभराव अच्छा है, वहां रबी फसलों के लिए किसानों को लाभ मिलेगा। विभाग द्वारा उपलब्ध जल के बेहतर प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए पानी का उपयोग व्यवस्थित रूप से किया जा सके।

विकासखंड के प्रमुख तालाबों की स्थिति:

तालाब| वर्तमान स्थिति
पम्पावती| 51%
चोर बोराली| 47%
माताजी करड़ावद| 34%
बोलासा| 16%
मोरझिरी| 100%
देवली| 29%
रूपगढ़| 93%
बरवेट क्रं.-1| 50%
बरवेट क्रं.-2| 22%
दाड़िया| 59%
तम्बोलिया| 100%
बेकल्दा| 40%
मथुरिया| 49%
उन्नई| 94%
रैला| 56%
बिजोरी| 3%
रूपाखेड़ा| 100%
बेड़दा| 100%
आंबापाड़ा| 69%
जुनाखेड़ा| 27%
डाबड़ी| 100%

कुल मिलाकर इस वर्ष वर्षा की कमी तालाबों में साफ दिखाई दे रही है। कुछ बड़े जलाशयों में पर्याप्त पानी होने से किसानों को राहत है, लेकिन कम जलभराव वाले तालाबों पर निर्भर ग्रामीणों के लिए रबी सीजन में सिंचाई की चुनौती बनी रहेगी। गर्मी बढ़ने के साथ यही तालाब पालतू पशुओं, वन्यजीवों और पक्षियों के लिए भी पानी का महत्वपूर्ण सहारा होंगे।