प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर: बीच सड़क पर पेड़ काटकर गड्ढे में सिर्फ मिट्टी भरी, फिसलन से पलट रहे वाहन, आज रात फिर ट्रक बुरी तरह फंसा

अमलाई / चचाई। शहडोल से अनूपपुर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों मौत का दूसरा नाम बन गया है। विवेक नगर से चचाई के बीच रोजाना हो रहे सड़क हादसों ने सड़क परिवहन विभाग, PWD और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार विवेक नगर के समीप मुख्य सड़क के बीचों-बीच एक विशाल पेड़ खड़ा था। विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर पेड़ तो कटवा दिया, लेकिन उसके बाद जो गड्ढा सड़क के बीच में बन गया, उसको वैधानिक तरीके से भरने की बजाय सिर्फ ऊपर-ऊपर मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी गई।

नतीजा क्या है? जरा सी नमी, बरसात के पानी से वही मिट्टी दलदल और फिसलन का अड्डा बन गई है। वहां से गुजरने वाले दो पहिया वाहन चालक फिसल कर गिर रहे हैं, तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित हो रहे हैं और बड़े वाहन धंस रहे हैं।

आज रात फिर बड़ा हादसा टला: आज रात भी इसी जगह पर एक बड़ा ट्रक उसी दलदली गड्ढे में बुरी तरह से धंस गया और फंस गया। गनीमत रही कि जनहानि नहीं हुई, लेकिन घंटों तक जाम लगा रहा और मार्ग बाधित रहा। आए दिन इसी तरह की घटनाएं यहां आम हो गई हैं।

यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासन की सीधी लापरवाही और भ्रष्टाचार से उपजी मानव निर्मित दुर्घटना है।

बीच सड़क पर पेड़ काटने के बाद गड्ढे को कंक्रीट और डामर से क्यों नहीं भरा गया? मिट्टी भरने की अनुमति किस इंजीनियर ने दी?
जब रोज हादसे हो रहे हैं तो PWD और NHAI के अधिकारी आंखें मूंद कर क्यों बैठे हैं?
अगर इस फिसलन से किसी की जान चली गई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या संबंधित अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होगा?
शहडोल-अनूपपुर जैसा व्यस्ततम मार्ग, जहां से हर दिन हजारों लोग गुजरते हैं, वहां सुरक्षा के नाम पर इतना बड़ा खिलवाड़ क्यों?

स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि तत्काल इस गड्ढे को मानक अनुसार पक्का किया जाए, पूरे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट हो और इस लापरवाही के जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

यह सड़क हादसा नहीं, प्रशासनिक हत्या का प्रयास है। अगर समय रहते शासन नहीं जागा तो जनता सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी।