मध्यप्रदेश के सागर जिले के केसली स्थित पावन स्थल शांति धाम में सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी कार्यक्रम में प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु संत श्री असंग देव जी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके पाथेय वचन सुनने के लिए केसली सहित आसपास के जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु और हिंदू समाज के प्रबुद्ध जन एकत्रित हुए।
संत असंग देव जी का प्रेरणादायक उद्बोधन धर्म और राष्ट्रीयता पर केंद्रित उद्बोधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए संत असंग देव जी ने समाज में एकता, समरसता और नैतिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "धर्म केवल उपासना पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है।"
सामाजिक एकता: संत जी ने जाति-पाति के भेदों को भुलाकर हिंदू समाज को संगठित रहने का आह्वान किया। संस्कार और युवा पीढ़ी: युवाओं को पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के बजाय अपनी गौरवशाली भारतीय संस्कृति और मर्यादाओं को अपनाने की प्रेरणा दी गई। व्यसन मुक्ति: महाराज श्री ने समाज को नशा मुक्त बनाने और सात्विक जीवन शैली अपनाने पर विशेष जोर दिया। भक्तिमय माहौल और व्यवस्थाएं कार्यक्रम के दौरान शांति धाम परिसर पूरी तरह भक्तिमय और उत्साह से सराबोर नजर आया। सकल हिंदू समाज के कार्यकर्ताओं द्वारा कार्यक्रम की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सुरक्षा और अनुशासन हजारों की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल मुस्तैद रहा। वहीं, सकल हिंदू समाज के स्वयंसेवकों ने अनुशासित तरीके से बैठक और पेयजल की व्यवस्था संभाली, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
"जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र शक्तिशाली बनता है। शांति धाम की यह पावन धरा आज एकता के इस संकल्प की साक्षी बनी है।" — आयोजन समिति, सकल हिंदू समाज
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