बगाज माता मंदिर में नवरात्रि पर दर्शन करने उमड़ा भक्तों का जनसैलाब
टीकमगढ़ से 18 किमी दूर स्थित है बुंदेलखंड का चमत्कारी सिद्धपीठ, बगाज माता मंदिर में बिना दवा उतर जाता है सांप का जहर मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले का प्रसिद्ध बगाज माता मंदिर बुंदेलखंड ही नहीं पूरे प्रदेश में अपनी चमत्कारी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। जिला मुख्यालय से करीब 15 से 18 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित यह सिद्ध शक्तिपीठ लगभग 400 साल पुराना है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
*तांत्रिक ने की थी स्थापना, जंगल में मिले थे दर्शन*
मंदिर के इतिहास को लेकर कई किंवदंतियां प्रचलित हैं। मान्यता है कि करीब 400 साल पहले भवानी मिश्र नामक तांत्रिक ने तंत्र साधना के जरिए यहां मां बगाज माता की प्राण प्रतिष्ठा की थी। बताया जाता है कि सैकड़ों साल पहले यह पूरा इलाका घना जंगल हुआ करता था। स्थानीय चरवाहों और ग्रामीणों को पहाड़ी पर देवी की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन हुए, जिसके बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई। धीरे-धीरे यह स्थान आस्था के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित हो गया। कई विद्वानों के अनुसार मां बगाज माता को वाग्देवी यानी मां सरस्वती का स्वरूप भी माना जाता है।
*सांप-बिच्छू का जहर उतरने की है अद्भुत मान्यता*
बगाज माता मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता विष निवारण को लेकर है। कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति या पशु को सांप, बिच्छू, कोबरा, ब्लैक मांबा या किसी जहरीले कीड़े व कुत्ते ने काट लिया हो तो पीड़ित यहां आकर माता के प्रांगण में बैठ जाता है। बिना किसी अंग्रेजी या देसी दवा के विष का असर अपने आप खत्म हो जाता है। यही कारण है कि दूर-दूर से लोग यहां जहर उतरवाने आते हैं।
इसके अलावा पशुओं से जुड़ी मन्नतों के लिए भी मंदिर प्रसिद्ध है। यदि किसी किसान की गाय या भैंस दूध देना बंद कर दे तो उसे मंदिर प्रांगण में लाया जाता है। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से पशु पुनः दूध देने लगता है।
*नवरात्रि पर उमड़ता है जनसैलाब*
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। नवमी के दिन लाखों श्रद्धालु जवारे लेकर मंदिर पहुंचते हैं और विसर्जन करते हैं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठता है। भक्तों ने बताया कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन दूर दूर से भक्त जवारे लेकर सुबह से आने लगते हैं मंदिर के पूजारी श्री तिवारी ने बताया कि जिनकी मन्नत पूरी हो जाती है भक्त ढोल नगडि़िया की थाप पर नर्तकी के नाचते गाते जवारे के खप्पर लेकर मां के मंदिर में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर मां को अर्पित करते हैं। नवरात्रि को देखते हुए यहां एक विशाल मेला भी भरता है जहां भक्त मां के दर्शन करने के बाद जमकर घर गृहस्थी का सामना खरीदते हैं । नवरात्रि के दौरान प्रशासन द्वारा पुलिस की चप्पे चप्पे पर भारी पुलिस व्यवस्था रहती है।
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