*देश में जहां होता है रावण दहन, वहीं टीकमगढ़ में मारवाड़ी परिवार करता है रावण की पूजा, अनोखी परंपरा बनी चर्चा का विषय*
*टीकमगढ़।(रिपोर्ट जमील खान)देशभर में जहां दशहरे के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण के पुतले का दहन किया जाता है, वहीं टीकमगढ़ में एक मारवाड़ी परिवार ऐसा भी है जो दशहरे पर रावण की विधि-विधान से पूजा करता है। परिवार में वर्षों से चली आ रही यह अनोखी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार शहर में रहने वाले मारवाड़ी परिवार में हर साल दशहरे के दिन शाम सात बजे रावण की पूजा-अर्चना की जाती है। परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर रावण की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पूजा करते हैं और क्षेत्र में सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना करते हैं।
परिवार के सदस्य दीपक अग्रवाल ने बताया कि उनके परिवार में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। हर साल बड़े ही धूमधाम से रावण की पूजा की जाती है। उनका मानना है कि रावण केवल बुराई का प्रतीक ही नहीं था, बल्कि वह अत्यंत विद्वान, ज्ञानी और शिवभक्त भी था। इसी मान्यता के चलते उनका परिवार बुराई के अंत के साथ-साथ ज्ञान और विद्वता के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा करता है।
दशहरे पर एक ओर जहां पूरा शहर रावण दहन देखने में व्यस्त रहता है, वहीं इस परिवार की यह अनोखी परंपरा लोगों के बीच आकर्षण और चर्चा का विषय बनी हुई है।
Continue With Google