भोपाल के रवीन्द्र भवन में 12 जनवरी 2026 को हुए मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फोटो साभार जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश में स्टार्टअप शुरू करने वालों के लिए सरकारी मदद का दायरा अब पहले से बड़ा है. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग की स्टार्टअप नीति 2025 में चुने गए स्टार्टअप को 30 लाख रुपए तक का सीड फंड और नए उद्यमियों को एक साल तक हर महीने 10 हजार रुपए देने का प्रावधान है.
यह नीति फरवरी 2025 में आई और 2022 की स्टार्टअप नीति की जगह ले चुकी है. नीति दस्तावेज के मुताबिक प्रदेश में 5000 से ज्यादा स्टार्टअप हैं, जिनमें 47 प्रतिशत की कमान महिलाओं के हाथ में है. लक्ष्य DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 10,000 तक पहुंचाना है.
जनसंपर्क विभाग के अनुसार 12 जनवरी 2026 को भोपाल में हुए स्टार्टअप समिट में मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप को 10.22 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन और ऋण राशि सिंगल क्लिक से जारी की थी.
कौन ले सकता है फायदा
नीति के हिसाब से स्टार्टअप वही माना जाएगा जिसे केंद्र सरकार के DPIIT (Startup India) से मान्यता मिली हो और जो मध्यप्रदेश में पंजीकृत हो. SC, ST, महिला, दिव्यांग या ट्रांसजेंडर वर्ग के स्टार्टअप को ज्यादा सहायता तभी मिलेगी जब प्रमोटर की हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत हो.
नीति अधिसूचना की तारीख से 5 साल लागू रहेगी. इससे पहले बने स्टार्टअप भी निवेश सहायता, पेटेंट, इवेंट, ऑनलाइन विज्ञापन, सीड फंड और स्टेट इनोवेशन चैलेंज जैसे फायदे ले सकते हैं.
सीड फंड 30 लाख, हर महीने 10 हजार
चुने गए स्टार्टअप को अधिकतम 30 लाख रुपए का अनुदान सरकार से सूचीबद्ध इन्क्यूबेटर के जरिए मिलेगा. यह पैसा कर्मचारियों, कच्चे माल, प्रोडक्ट टेस्टिंग, मार्केट रिसर्च और बाजार में उतरने पर खर्च होगा. जमीन, भवन या निर्माण पर इसका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा. किस्तें इन्क्यूबेटर की प्रगति रिपोर्ट के बाद जारी होंगी.
एंटरप्रेन्योर इन रेजिडेंस (EIR) सहायता के तहत पात्र स्टार्टअप को 10,000 रुपए महीना, अधिकतम 12 महीने तक मिलेंगे. यह मदद DPIIT मान्यता की तारीख से 2 साल के भीतर लेनी होगी. नीति के अनुसार इसका मकसद छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को उद्यमिता को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित करना है.
निवेश, लोन और ब्याज पर कितनी मदद
किसी बैंक, वित्तीय संस्था या SEBI और RBI से मान्य फंड से निवेश या लोन मिलने पर सरकार उस रकम पर अलग से सहायता देगी. लोन की अदायगी अवधि कम से कम 1 साल होनी चाहिए. किसी अनुदान पर यह मदद नहीं मिलेगी.
| सहायता | सामान्य स्टार्टअप | SC, ST, महिला, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर |
|---|---|---|
| सहायता की दर | 15% | 18% |
| एक बार में अधिकतम | 15 लाख रुपए | 18 लाख रुपए |
| कितनी बार | 4 बार | 4 बार |
| कुल सीमा | 60 लाख रुपए | 72 लाख रुपए |
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में स्टार्टअप को बैंक से बिना गारंटी लोन मिलेगा, जो केंद्र की क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स से कवर होगा. गारंटी फीस 5 साल तक लौटाई जाएगी और लोन पर 5 प्रतिशत सालाना ब्याज अनुदान भी 5 साल तक मिलेगा.
प्रोटोटाइप, पेटेंट, किराया और प्रचार
| मद | कितनी मदद | शर्त |
|---|---|---|
| प्रोटोटाइप और प्रोडक्ट डेवलपमेंट | 100%, अधिकतम 15 लाख रुपए | सरकारी संस्थान या विश्वविद्यालय से काम |
| भारतीय पेटेंट | 100%, अधिकतम 5 लाख रुपए | पेटेंट स्टार्टअप के नाम हो |
| अंतरराष्ट्रीय पेटेंट | 100%, अधिकतम 20 लाख रुपए | सरकारी फीस और कंसल्टेंसी शामिल |
| किराया | 50%, अधिकतम 10,000 रुपए महीना | 3 साल तक, इन्क्यूबेटर सीट भी शामिल |
| ऑनलाइन विज्ञापन | 100%, एक साल में अधिकतम 3 लाख रुपए | Amazon, Flipkart, Google, Meta पर, 2 साल तक पुराने स्टार्टअप, एक बार |
| देश में इवेंट | 75%, अधिकतम 50,000 रुपए | स्टार्टअप केंद्रित इवेंट |
| विदेश में इवेंट | 75%, अधिकतम 1.5 लाख रुपए | स्टार्टअप केंद्रित इवेंट |
कुछ बनाते हैं तो अलग पैकेज
उद्यम पोर्टल पर मैन्युफैक्चरिंग के लिए पंजीकृत और मध्यप्रदेश में यूनिट लगाने वाले प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप के लिए नीति में अलग फायदे हैं. व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद 25 कर्मचारियों तक हर कर्मचारी पर 5,000 रुपए महीना 3 साल तक मिलेगा.
प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप के लिए
- रोजगार सहायता 5,000 रुपए प्रति कर्मचारी प्रति माह, 25 कर्मचारी तक, 3 साल
- MP के मूल निवासी कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर 13,000 रुपए सालाना प्रति कर्मचारी, 3 साल
- नए बिजली कनेक्शन पर 3 साल तक बिजली शुल्क से छूट
- बिजली बिल पर 2 रुपए प्रति यूनिट की प्रतिपूर्ति, 3 साल
- MSME विकास नीति के फायदे भी, उसकी शर्तों के साथ

100 करोड़ का फंड और मेगा इन्क्यूबेटर
सरकार 100 करोड़ रुपए का स्टार्टअप कैपिटल फंड बनाएगी. इसमें अधिकतम 50 करोड़ रुपए सूचीबद्ध वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) को दिए जाएंगे, जो प्रदेश के DPIIT मान्य स्टार्टअप में निवेश करेंगे. PPP मॉडल पर मेगा इन्क्यूबेशन सेंटर बनेगा और नए इन्क्यूबेटर के लिए 50 लाख रुपए तक की पूंजी सहायता मिलेगी.
राज्य की 4 बड़ी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के हल के लिए स्टेट इनोवेशन चैलेंज होगा, जिसमें चुने गए समाधानों को 1 करोड़ रुपए तक का अनुदान मिलेगा. विभागों के हैकाथॉन में चुने स्टार्टअप को 5 लाख रुपए तक की मदद का प्रावधान है.
आवेदन कैसे करें
आवेदन Startup MP पोर्टल पर ऑनलाइन होगा. मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर जांच के बाद प्रकरण मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक को भेजेगा. इसके बाद प्रमुख सचिव MSME की मंजूरी से रकम DBT के जरिए सीधे खाते में आएगी. पहली मंजूरी के बाद आगे की किस्तें पात्रता के हिसाब से अपने आप जारी होंगी.
ये सेवाएं मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 में शामिल हैं. फैसले से असंतुष्ट होने पर 90 दिन के भीतर प्रशासकीय विभाग में अपील की जा सकती है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
MP स्टार्टअप नीति 2025 में सीड फंड कितना मिलता है?
चुने गए स्टार्टअप को अधिकतम 30 लाख रुपए का अनुदान मिलता है. यह सरकार से सूचीबद्ध इन्क्यूबेटर के जरिए किस्तों में दिया जाता है.
महिला उद्यमियों को क्या अतिरिक्त मदद है?
निवेश या लोन पर 15 की जगह 18 प्रतिशत सहायता मिलती है, एक बार में अधिकतम 18 लाख रुपए. इसके लिए स्टार्टअप में उनकी हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत होनी चाहिए.
क्या स्टार्टअप को बिना गारंटी लोन मिल सकता है?
हां. मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में बैंक से बिना गारंटी लोन और 5 साल तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान का प्रावधान है.
नीति का फायदा लेने के लिए पहली शर्त क्या है?
स्टार्टअप के पास DPIIT (Startup India) की मान्यता होनी चाहिए और वह मध्यप्रदेश में पंजीकृत होना चाहिए.
आवेदन कहां करें?
Startup MP पोर्टल पर ऑनलाइन. मंजूरी के बाद रकम DBT से सीधे खाते में आती है.
स्रोत मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति एवं कार्यान्वयन योजना 2025 (MSME विभाग, मध्यप्रदेश शासन), जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश
Continue With Google