आगम चक्रवर्ती आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ससंघ का भव्य पिच्छी परिवर्तन, कलश वितरण एवं रथोत्सव 15 नवंबर को
धार्मिक महोत्सव को लेकर जैन समाज में उत्साह, तैयारियां प्रारंभ
सांगली। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)।
दक्षिण भारत के जैन समाज के लिए हर्ष, उल्लास और आध्यात्मिक पुण्य का अनुपम अवसर आने जा रहा है। आगम चक्रवर्ती परम पूज्य 108 आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के ससंघ पावन सान्निध्य में भव्य पिच्छी परिवर्तन, कलश वितरण एवं रथोत्सव का आयोजन 15 नवंबर 2026 को किया जाएगा।
इस पावन आयोजन को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह का वातावरण है। धार्मिक परंपराओं, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक आस्था से ओतप्रोत इस महोत्सव में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।
कार्यक्रम के अंतर्गत 15 नवंबर 2026, रविवार को दोपहर 12 बजे मुख्य मंडप में भव्य पिच्छी परिवर्तन, कलश वितरण एवं रथोत्सव का आयोजन होगा।
जैन मुनि परंपरा में पिच्छी केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि अहिंसा, जीवदया, संयम और करुणा का पवित्र प्रतीक मानी जाती है। पिच्छी परिवर्तन का यह मांगलिक अवसर साधु जीवन की त्यागमय परंपरा, संयम साधना और आत्मकल्याण की भावना को स्मरण कराने वाला है। वहीं रथोत्सव के माध्यम से जिनेंद्र भगवान की भक्ति एवं धर्मप्रभावना का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा।
यह भव्य आयोजन दक्षिण भारत जैन समाज, शेड हॉल, दिगंबर जैन बोर्डिंग, सांगली तथा श्री 1008 भगवान आदिनाथ दिगंबर जैन जिन मंदिर से संबंधित है।
आयोजन समिति द्वारा समस्त जैन समाज एवं धर्मप्रेमी बंधुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पावन धार्मिक महोत्सव में सहभागी बनें तथा गुरु सान्निध्य एवं धर्मलाभ प्राप्त करें।
धर्म की प्रभावना बढ़े, अहिंसा और संयम का संदेश जन-जन तक पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में धर्म और संस्कारों का मंगल प्रकाश फैले, इसी भावना के साथ समाज इस पावन आयोजन की प्रतीक्षा कर रहा है।
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