मॉडल स्कूल के शिक्षक पर छात्रवृत्ति गबन और निजी कोचिंग के आरोप, छात्रों ने DEO से लगाई न्याय की गुहार

छात्रों का दावा—वर्ष 2018 से नहीं मिली छात्रवृत्ति की राशि, कोचिंग के लिए दबाव बनाने और मूल्यांकन में फेल करने की धमकी देने का भी आरोप

रीवा। शासकीय मॉडल स्कूल रीवा में पदस्थ व्याख्याता श्यामाचरण लोधी के खिलाफ विद्यार्थियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। छात्र प्रतिनिधियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर छात्रवृत्ति वितरण में कथित अनियमितता, निजी कोचिंग संचालन और विद्यार्थियों को धमकाने के मामलों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और विभागीय जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिलने का दावा

छात्र प्रतिनिधियों का आरोप है कि संबल योजना के तहत विद्यार्थियों को मिलने वाली लगभग 1500 रुपये की छात्रवृत्ति की राशि वर्ष 2018 से वितरित नहीं की गई। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति की राशि को निजी कोचिंग की फीस में समायोजित करने की बात कही गई। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह विद्यार्थियों के हितों और छात्रवृत्ति वितरण की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। ऐसे में छात्रवृत्ति से संबंधित अभिलेखों, पात्र विद्यार्थियों की सूची और भुगतान की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होगी।

निजी कोचिंग के लिए दबाव बनाने का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने शिक्षक पर निजी कोचिंग में पढ़ने के लिए विद्यार्थियों पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है। छात्र प्रतिनिधियों के मुताबिक, कोचिंग में नहीं पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन में फेल करने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है। इन आरोपों ने शैक्षणिक माहौल और विद्यार्थियों के निष्पक्ष मूल्यांकन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विद्यार्थियों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और विभागीय जांच के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अतिथि शिक्षक नियुक्ति के दस्तावेजों की जांच की मांग

मामले में छात्र प्रतिनिधियों ने शिक्षक की पत्नी की अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्ति में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए उसकी भी जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाना चाहिए, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे जांच के दायरे में रखकर ही देखा जाना चाहिए।

अब जिला शिक्षा अधिकारी की कार्रवाई पर निगाहें

छात्र प्रतिनिधियों ने जिला शिक्षा अधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, छात्रवृत्ति वितरण का हिसाब स्पष्ट करने और आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के लिए क्या कदम उठाता है।

मामला केवल एक शिक्षक पर लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को मिलने वाली सरकारी सहायता, शिक्षा के अधिकार और शासकीय पद पर बैठे कर्मचारियों की जवाबदेही से भी जुड़ा है।