आलोट। प्राकृतिक एवं जैविक खेती की कार्यप्रणाली को करीब से समझने और कृषि में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को जानने के उद्देश्य से शासकीय महाविद्यालय आलोट के विद्यार्थियों ने 9 अक्टूबर को राड़ीवाला माताजी गौशाला, खेड़ी खमरिया का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों को जैविक खेती के लाभ, वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के तरीकों की जानकारी दी गई।

भ्रमण के दौरान गौशाला के समरथ बामनिया ने छात्र-छात्राओं को जैविक खेती के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद बनाने की प्रक्रिया, उसके उपयोग तथा कृषि में इससे होने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी।

विद्यार्थियों ने जैविक खेती की विभिन्न पद्धतियों को समझा और जाना कि प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग कर कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ खेती की व्यावहारिक जानकारी देना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।

इस अवसर पर महाविद्यालय के डॉ. संतोष कुमार सूर्यवंशी, डॉ. दीक्षा शर्मा, डॉ. रितु नागर एवं प्रोफेसर संदीप सांखला उपस्थित रहे। भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी रहा।