मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बालाघाट जिले के ग्राम पीपरझिरी में कृषि विभाग के तत्वावधान में एक विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती के फायदों तथा फसलों में आने वाले कीटों की रोकथाम के जैविक और पर्यावरण-अनुकूल उपायों से अवगत कराना था। इस कार्यशाला में क्षेत्र के बड़ी संख्या में प्रगतिशील, उत्साही और जागरूक किसानों ने हिस्सा लिया।

धान की सीधी बुवाई (DSR) और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान बालाघाट जिले के उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय तथा सहायक संचालक कृषि श्री राजेश कुमार खोबरागड़े ने किसानों को संबोधित करते हुए खेती की नई और आधुनिक पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अधिकारियों ने किसानों को धान की सीधी बुवाई यानी 'डीएसआर' (Direct Seeded Rice - DSR) पद्धति के बारे में बहुत ही बारीकी से समझाया।

उन्होंने किसानों को बताया कि किस प्रकार डीएसआर पद्धति को अपनाने से पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी की भारी बचत होती है, जो जल संरक्षण की दृष्टि से बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, इस तकनीक से मजदूरी और रोपाई की लागत में भी significant कमी आती है, जिससे किसानों का शुद्ध मुनाफा बढ़ जाता है। कार्यशाला में 'प्राकृतिक खेती' और 'खेत बचाओ कार्यक्रम' के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने समझाया कि कैसे रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है, और प्राकृतिक खेती अपनाकर इसे कैसे पुनर्जीवित किया जा सकता है।

नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और जैविक कीट नियंत्रण के गुर सीखे किसानों ने

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में किसानों को फसलों में लगने वाले हानिकारक कीटों और बीमारियों की रोकथाम के लिए पारंपरिक, प्राकृतिक एवं घरेलू उपाय अपनाने की विशेष सलाह दी गई। अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के तहत 'नीमास्त्र' और 'ब्रह्मास्त्र' जैसे जैविक घोलों के निर्माण की विधि और उनके चमत्कारी लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

किसानों को बताया गया कि इन जैविक अस्त्रों के प्रयोग से पर्यावरण या मिट्टी को बिना किसी नुकसान पहुँचाए फसलों की सुरक्षा की जा सकती है। इसके उपयोग से न केवल रासायनिक कीटनाशकों पर किसानों की आर्थिक निर्भरता कम होगी, बल्कि उत्पादन लागत में भी भारी कटौती होगी। साथ ही, जैविक रूप से उगाई गई फसल की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण बाजार में उसका उचित और लाभकारी मूल्य भी प्राप्त होगा।

कृषि विभाग की कल्याणकारी योजनाओं और 'खेत बचाओ' अभियान की जानकारी

इस अवसर पर किसानों को 'खेत बचाओ कार्यक्रम' के मूल उद्देश्यों और उसके दीर्घकालिक फायदों से भी अवगत कराया गया। कृषि अधिकारियों ने मध्य प्रदेश शासन द्वारा कृषि एवं किसानों के उत्थान के लिए संचालित की जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित सभी किसानों से अपील की कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और शासन द्वारा दी जाने वाली सहायता का सदुपयोग करें।

अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय यदि किसान आधुनिक, वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपने दैनिक खेती के तौर-तरीकों में शामिल करें, तो खेती को एक बेहद लाभकारी और टिकाऊ व्यावसायिक गतिविधि बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में किसानों द्वारा कृषि से जुड़ी विभिन्न शंकाओं और समस्याओं को रखा गया, जिनका कृषि विशेषज्ञों द्वारा संतोषजनक समाधान किया गया।

image source: https://balaghat.mpinfo.org