भारत को वर्ष 2025-26 तक पूरी तरह क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को अभूतपूर्व गति देने तथा इस महत्वपूर्ण अभियान में देश के ऊर्जावान युवाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बालाघाट जिले में एक वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलेक्टर के दिशा-निर्देशों एवं जिला स्वास्थ्य समिति (क्षय) बालाघाट के मार्गदर्शन में वारासिवनी के शासकीय शंकरसाव पटेल महाविद्यालय में ‘जोश जगाना है, करके दिखाएंगे’ शीर्षक के अंतर्गत भव्य जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य ऑनलाइन प्रसारण देश की राजधानी नई दिल्ली से किया गया, जिसके माध्यम से देशभर के विभिन्न राज्यों से लगभग 52 हजार युवा डिजिटल रूप से इस मुहिम से जुड़े और टीबी के खात्मे का संकल्प लिया।

ऑनलाइन प्रसारण और युवाओं की व्यापक भागीदारी

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.एस. गेड़ाम के कुशल मार्गदर्शन तथा एनसीसी अधिकारी डॉ. हेमंत कुमार मंडाले एवं रेड रिबन प्रभारी कृष्णा पराते के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था। इस ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यक्रम में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सम्मानित प्रतिनिधि, विभिन्न राज्यों के माननीय विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में युवा छात्र-छात्राएं शामिल हुए। ‘टीबी उन्मूलन के लिए युवा हैं तैयार’ के सशक्त और प्रेरणादायक संदेश के साथ इस महाअभियान का आगाज किया गया। इस दौरान उपस्थित युवाओं को टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में नए नवाचारों, प्रभावी जनजागरूकता अभियानों तथा मजबूत रणनीतियों के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया ताकि जमीनी स्तर पर बीमारी की रोकथाम की जा सके।

टीबी मुक्त भारत ऐप और ‘खुशी’ ई-संगिनी की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान तकनीकी नवाचारों पर विशेष प्रकाश डालते हुए ‘टीबी मुक्त भारत ऐप’ के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उपस्थित विद्यार्थियों और नागरिकों को बताया गया कि इस एप्लीकेशन में टीबी मरीजों की निरंतर देखभाल, स्वास्थ्य निगरानी और सहायता के लिए ‘खुशी’ नामक एक विशेष ई-संगिनी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस डिजिटल माध्यम की खूबी यह है कि यह कुल 12 अलग-अलग भाषाओं में संवाद करने की क्षमता रखती है, जिससे देश के किसी भी कोने का मरीज अपनी भाषा में सहायता प्राप्त कर सकता है और बीमारी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का समाधान पा सकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग वारासिवनी से पधारे पुरुषोत्तम देशमुख, रविन्द्र नागेश्वर, पराग पालेवार तथा एनएसएस एवं एनसीसी की 20 सदस्यीय सक्रिय निक्षय टीम ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना पूरा सहयोग दिया।

सामुदायिक सहभागिता और भारत की वैश्विक प्रगति

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत को पूर्ण रूप से टीबी मुक्त बनाने के लिए केवल सरकारी तंत्र का प्रयास पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। ग्राम पंचायतों से लेकर बड़े महानगरों और शहरों तक जनसहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही टीबी उन्मूलन के निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सकता है।

आंकड़ों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि भारत में टीबी के मामलों में पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी करीब 12 प्रतिशत ही आंकी गई है। इसी प्रकार, उपचार कवरेज के मामले में भारत ने अगस्त माह तक 92 प्रतिशत का बेहतरीन आंकड़ा छुआ है, जबकि वैश्विक स्तर पर उपचार कवरेज लगभग 78 प्रतिशत के आसपास रहा है। सरकार द्वारा टीबी के मरीजों को निःशुल्क दवाइयों के साथ-साथ आर्थिक सहायता और उनके नियमित उपचार की निगरानी की पुख्ता व्यवस्था भी की जा रही है। इस आयोजन का मूल उद्देश्य युवाओं को इस राष्ट्रीय अभियान से जोड़कर व्यापक जनभागीदारी बढ़ाना और भारत को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना रहा।

Image Source: https://balaghat.mpinfo.org