मध्य प्रदेश शासन के महत्वपूर्ण निर्देशों के परिपालन में, बुरहानपुर जिले में स्वास्थ्य और पोषण को लेकर एक बेहद अहम और व्यापक अभियान का संचालन किया जा रहा है। बच्चों के स्वास्थ्य, उनके सुरक्षित भविष्य और माताओं के सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए बुरहानपुर जिले में 1 अगस्त से 7 अगस्त तक 'विश्व स्तनपान सप्ताह' (World Breastfeeding Week) का भव्य और प्रभावकारी आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष सप्ताह का मुख्य उद्देश्य समाज में स्तनपान के महत्व को रेखांकित करना, नवजात शिशुओं और बच्चों के सर्वांगीण पोषण को सुनिश्चित करना तथा इसके विषय में जमीनी स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता लाना है। बुरहानपुर जिले का प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में देखने को मिल रहे हैं।

बुरहानपुर जिले में अभियान का विशाल स्वरूप और पहुंच इस जन-जागरूकता अभियान को बुरहानपुर जिले के हर घर और हर माता तक पहुंचाने के लिए एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है। जानकारी के अनुसार, जिला बुरहानपुर के अंतर्गत कुल 6 बाल विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन 6 बाल विकास परियोजनाओं के सघन नेटवर्क के माध्यम से जिले के सभी 815 आंगनवाड़ी केंद्रों को इस महा-अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। बुरहानपुर जिले के इन 815 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से शहरी वार्डों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक की महिलाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी केंद्रों की भागीदारी यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी गर्भवती या धात्री महिला इस महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित न रहे।

विश्व स्तनपान सप्ताह की वैश्विक थीम और उसका महत्व बुरहानपुर जिले में मनाए जा रहे इस विश्व स्तनपान सप्ताह को एक विशेष वैश्विक थीम के साथ आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष के लिए जो थीम निर्धारित की गई है वह है- "Breastfeeding For A Sustainable Start In Life Strenghth What Works" (जीवन में एक स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान: जो काम करता है उसे मजबूती दें)। इस प्रभावशाली थीम के माध्यम से बुरहानपुर जिले की महिलाओं और आम जनमानस को यह संदेश दिया जा रहा है कि एक स्वस्थ समाज और मजबूत भविष्य की नींव बचपन से ही रखी जाती है, और वह नींव केवल और केवल सही स्तनपान से ही संभव है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि शिशु के जीवन की सबसे बेहतरीन और टिकाऊ शुरुआत माँ के दूध से ही होती है, जो प्राकृतिक, सुरक्षित और शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है।

गर्भवती और धात्री महिलाओं को दिया जा रहा विशेष परामर्श विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत बुरहानपुर जिले के समस्त 815 आंगनवाड़ी केंद्रों में विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं (Pregnancy) और धात्री माताओं (Lactating Mothers) को लक्षित कर उन्हें सघन परामर्श प्रदान किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं को बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े तीन सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी नियमों के बारे में विस्तार से समझाया जा रहा है:

  • जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान: माताओं को जागरूक किया जा रहा है कि शिशु के जन्म के तुरंत बाद, विशेषकर पहले एक घंटे के भीतर, स्तनपान शुरू करा देना चाहिए। जन्म के तुरंत बाद माँ का जो गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) आता है, वह शिशु के लिए अमृत और जीवन रक्षक टीके के समान कार्य करता है। यह शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाता है।

  • 6 माह तक केवल स्तनपान: आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से यह संदेश घर-घर पहुंचाया जा रहा है कि जन्म से लेकर 6 माह की आयु तक शिशु को केवल और केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। इस अवधि के दौरान शिशु को ऊपर से पानी, शहद, घुट्टी या अन्य किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती है। माँ का दूध 6 माह तक शिशु की भूख और प्यास दोनों को पूरी तरह से शांत करता है और उसे बीमारियों से बचाता है।

  • 6 माह पश्चात् पूरक आहार के साथ स्तनपान: महिलाओं को यह भी बताया जा रहा है कि जैसे ही शिशु 6 माह की आयु पूरी कर ले, उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ के दूध के साथ-साथ ऊपरी पौष्टिक आहार (पूरक आहार) देना भी अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, पूरक आहार शुरू करने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि स्तनपान बंद कर दिया जाए, बल्कि ऊपरी आहार के साथ-साथ स्तनपान को निरंतर जारी रखने की सलाह दी जा रही है।

जागरूकता के लिए अपनाई जा रही विविध और रोचक गतिविधियां बुरहानपुर जिले में 1 से 7 अगस्त तक चलने वाले इस सप्ताह को केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन का रूप देने के लिए जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा कई रचनात्मक और प्रभावी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जन-जागरूकता के तहत महिलाओं को आवश्यक परामर्श देने के साथ-साथ निम्नलिखित माध्यमों से प्रेरित किया जा रहा है:

  • जागरूकता रैलियों का आयोजन: जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और स्थानीय महिलाओं द्वारा विशाल रैलियां निकाली जा रही हैं। इन रैलियों के माध्यम से पूरे गांव और शहर के वार्डों में स्तनपान के महत्व का संदेश गूंज रहा है।

  • सामुदायिक बैठकों के माध्यम से संवाद: 815 आंगनवाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से सामुदायिक बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में गर्भवती और धात्री महिलाएं एक साथ बैठती हैं, अपने अनुभव साझा करती हैं और स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से संवाद करती हैं।

  • दिवार लेखन और नारे लेखन (Wall and Slogan Writing): जागरूकता को दृश्य रूप देने के लिए बुरहानपुर जिले के सार्वजनिक स्थानों, पंचायत भवनों और आंगनवाड़ी केंद्रों की दीवारों पर आकर्षक नारे और स्लोगन लिखे जा रहे हैं। ये नारे लोगों के अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं और हर आते-जाते व्यक्ति को पोषण का संदेश देते हैं।

  • शपथ ग्रहण समारोह: कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित महिलाओं, परिवार के सदस्यों और समुदाय के लोगों को स्तनपान को बढ़ावा देने और माताओं को सहयोग प्रदान करने की शपथ दिलाई जा रही है। यह शपथ सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को जागृत करती है।

  • गृह भेंट (Door-to-Door Visits): आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर (गृह भेंट) उन गर्भवती और धात्री महिलाओं से व्यक्तिगत रूप से मिल रही हैं जो केंद्रों तक पहुंचने में असमर्थ हैं। इस व्यक्तिगत संपर्क से महिलाओं की झिझक दूर होती है और वे अपनी समस्याओं पर खुलकर परामर्श ले पाती हैं।

निष्कर्ष बुरहानपुर जिले में 1 से 7 अगस्त तक आयोजित हो रहा यह 'विश्व स्तनपान सप्ताह' कुपोषण के खिलाफ एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम है। जिले की 6 बाल विकास परियोजनाओं और 815 आंगनवाड़ी केंद्रों की सक्रियता से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन बच्चों के स्वस्थ जीवन और माताओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है। रैलियों, दीवार लेखन, बैठकों और गृह भेंट जैसी बहुआयामी गतिविधियों ने बुरहानपुर में एक ऐसा सकारात्मक माहौल तैयार किया है, जो आने वाले समय में शिशु मृत्यु दर और कुपोषण को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा। "Breastfeeding For A Sustainable Start In Life Strenghth What Works" की थीम पर आधारित यह अभियान बुरहानपुर जिले के हर नौनिहाल को एक स्वस्थ, सुरक्षित और पोषित शुरुआत देने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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