मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में ग्रामीण विकास की रूपरेखा को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा शासन की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। गुरुवार को नरसिंहपुर कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता जिले की कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह द्वारा की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिले में संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और विकास कार्यों में अपेक्षित गति लाना था।
कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने बैठक के दौरान उपस्थित सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए कि ग्रामीण विकास के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या लेटलतीफी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ हर एक पात्र हितग्राही तक निर्धारित समय-सीमा के भीतर पहुंचना चाहिए। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और भविष्य की कार्ययोजनाओं के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
प्रधानमंत्री आवास योजना: लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर विशेष जोर बैठक के दौरान सबसे प्रमुख रूप से 'प्रधानमंत्री आवास योजना' की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में आवासहीन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की शासन की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है। कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने योजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो भी प्रकरण किसी भी कारणवश लंबित पड़े हैं, उनका बिना किसी विलंब के शीघ्र अति शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तकनीकी या कागजी प्रक्रिया के कारण हितग्राहियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लंबित फाइलों की निगरानी करें और पात्र हितग्राहियों को समय पर उनके आवास का लाभ उपलब्ध कराएं। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह है कि हर पात्र परिवार को समय पर पक्की छत मिल सके, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आ सके।
जी राम जी योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में बेहतर समन्वय कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने बैठक में आजीविका और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से 'जी राम जी योजना' का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस योजना के अंतर्गत 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (National Rural Livelihood Mission - NRLM) के साथ एक बहुत ही बेहतर और सुदृढ़ समन्वय (कोऑर्डिनेशन) स्थापित किया जाए।
उन्होंने कहा कि इन दोनों महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के बीच जितना अच्छा तालमेल होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के उतने ही अधिक अवसर पैदा होंगे। अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिक से अधिक हितग्राहीमूलक योजनाओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास करें, ताकि ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं और कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके। योजनाओं के एकीकरण से न केवल संसाधनों का सही उपयोग होगा, बल्कि अधिक से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो सकेंगे।
जल संरक्षण जिले की सर्वोच्च प्राथमिकता: संरचनाओं के निर्माण में लाएं गति नरसिंहपुर जिले के लिए जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बताते हुए कलेक्टर ने इस विषय पर अपनी गहरी चिंता और प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर को बनाए रखने और भविष्य की जल संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिकाधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए।
कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण केवल एक विभागीय कार्य नहीं है, बल्कि यह समय की सबसे बड़ी मांग है। इसलिए, नई जल संरचनाओं के निर्माण कार्यों में तत्काल गति लाई जाए और जो पुरानी जल संरचनाएं मौजूद हैं, उनके संरक्षण और जीर्णोद्धार के कार्यों को भी पूरी गंभीरता के साथ पूरा किया जाए। वर्षा जल के संचयन और भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए हर ग्राम पंचायत स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वच्छता प्रबंधन: सूखे एवं गीले कचरे का वैज्ञानिक आकलन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने और ठोस एवं तरल अपशिष्ट (Solid and Liquid Waste) प्रबंधन की स्थिति को सुधारने के लिए भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कलेक्टर ने स्वच्छता प्रबंधन कार्यों की कड़ी समीक्षा करते हुए सभी ग्राम पंचायतों के लिए नवीन दिशा-निर्देश जारी किए।
उन्होंने कहा कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों में उत्पन्न होने वाले कचरे का उचित प्रबंधन बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रत्येक ग्राम पंचायत में उत्पन्न होने वाले सूखे (Dry) और गीले (Wet) कचरे की मात्रा का एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक आकलन (Scientific Assessment) करें। इस वैज्ञानिक आकलन के आधार पर ही यह तय किया जाए कि किस ग्राम पंचायत को कचरा प्रबंधन के लिए कितने संसाधनों, वाहनों या अन्य व्यवस्थाओं की आवश्यकता है। संसाधनों का यह आवंटन कचरे की मात्रा के अनुरूप ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता का एक आदर्श मॉडल स्थापित किया जा सके।
पंचायत दर्पण पोर्टल पर करों की शत-प्रतिशत प्रविष्टि के निर्देश बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व संग्रहण और डिजिटल प्रविष्टियों की भी बारीकी से समीक्षा की गई। कलेक्टर श्रीमती सिंह ने नरसिंहपुर जिले की सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) को सीधे तौर पर कड़े निर्देश जारी किए।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की आय सुनिश्चित करने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के करों का रिकॉर्ड सही ढंग से मेंटेन होना चाहिए। कलेक्टर ने जल कर (Water Tax), स्वच्छता कर (Cleanliness Tax) और परिसंपत्ति कर (Property Tax) से जुड़ी सभी प्रविष्टियों को 'पंचायत दर्पण पोर्टल' पर अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पोर्टल पर करों की यह प्रविष्टि किसी भी हाल में शत-प्रतिशत (100%) होनी चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या डेटा दर्ज करने में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
विभिन्न निधियों से स्वीकृत कार्यों की समय-सीमा निर्धारण कलेक्टर ने जिले में विभिन्न वित्तीय निधियों (Funds) के माध्यम से चल रहे विकास कार्यों की भी बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि 15वें वित्त आयोग, 5वें वित्त आयोग, अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, तथा सांसद एवं विधायक निधि (MP and MLA Funds) से जो भी विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं, उनकी प्रगति की निरंतर निगरानी की जानी चाहिए।
अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इन सभी निधियों से स्वीकृत कार्यों को एक निर्धारित समय-सीमा (Time-limit) के भीतर पूर्ण किया जाना अनिवार्य है। निर्माण कार्यों को अधूरा छोड़ना या उनमें अनावश्यक देरी करना शासन के धन का दुरुपयोग है। इसलिए, जिन एजेंसियों को कार्य सौंपा गया है, उनसे तय समय के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण कराया जाए।
योजनाओं का प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन ही अंतिम लक्ष्य बैठक के समापन की ओर बढ़ते हुए, कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने एक बार फिर सभी अधिकारियों को शासन की मंशा से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा जितनी भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उनका मुख्य उद्देश्य आमजन को राहत पहुंचाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।
इसलिए, यह सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे इन सभी योजनाओं का अत्यंत प्रभावी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। योजनाओं का लाभ फाइलों से निकलकर धरातल पर दिखना चाहिए और यह तभी संभव है जब हर पात्र व्यक्ति तक योजना का लाभ समय पर पहुंचे।
इस अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह के साथ-साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री गजेन्द्र सिंह नागेश प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अन्य तमाम संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी इस बैठक में मौजूद थे, जिन्होंने कलेक्टर द्वारा दिए गए सभी दिशा-निर्देशों को नोट किया और उनके त्वरित पालन का आश्वासन दिया।
image source : https://narsinghpur.mpinfo.org
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