मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। स्कूली बच्चों की सुरक्षा, शहर में बढ़ते अतिक्रमण को हटाने और समग्र यातायात व्यवस्था में सुधार को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गुरुवार को विदिशा में जिला सड़क सुरक्षा समिति की एक अहम बैठक संपन्न हुई।

इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता विदिशा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्री रोहित काशवानी और अपर कलेक्टर श्री अनिल कुमार डामोर द्वारा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्व में लिए गए निर्णयों की समीक्षा करना और सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करना था।

संबंधित विभागों को समन्वय और समयबद्धता के निर्देश

बैठक के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों को कड़े निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा कोई एक विभाग का कार्य नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी को आपसी समन्वय (कोऑर्डिनेशन) के साथ काम करना होगा।

  • समय सीमा तय: अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जो भी कार्य निर्धारित किए गए हैं, उन्हें एक तय समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।

  • पूर्व बैठकों की समीक्षा: बैठक की औपचारिक शुरुआत 11 जून और 20 जुलाई 2026 को आयोजित हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की पिछली बैठकों के कार्यवाही विवरण (मिनट्स) की गहन समीक्षा के साथ की गई। यह देखा गया कि पिछले निर्देशों का कितना पालन हुआ है और कहां कमियां रह गई हैं।

क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और रोड मार्किंग पर जोर

विदिशा नगरीय क्षेत्र में विकास कार्यों के चलते कई जगह सड़कों की स्थिति खराब हुई थी, जिस पर बैठक में विशेष ध्यान दिया गया।

  • पाइपलाइन और मरम्मत: शहर में नवीन पाइपलाइन बिछाने के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की जल्द से जल्द मरम्मत करने के कड़े निर्देश दिए गए।

  • सुरक्षा संकेतक: जिला न्यायालय (कोर्ट) के सामने और शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर रंबल स्ट्रिप, रोड मार्किंग, साइन बोर्ड और कॉशन बोर्ड (चेतावनी बोर्ड) अनिवार्य रूप से लगाने को कहा गया ताकि तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण पाया जा सके।

  • नगर पालिका का जवाब: इन निर्देशों पर नगर पालिका की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया। पालिका अधिकारियों ने जानकारी दी कि अधिकांश स्थानों पर क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। जिन स्थानों पर काम बचा है, वहां भी शीघ्र ही इसे पूर्ण कर लिया जाएगा। यह भी बताया गया कि सभी आवश्यक स्थानों पर सीआरएम (CRM) डालने का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि: ऑटो चालकों पर एक्शन

बैठक का एक बड़ा और अहम हिस्सा स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर केंद्रित रहा। पूर्व की बैठकों में यह स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि निजी स्कूलों से संबद्ध बसों और विशेषकर ऑटो रिक्शा में सफर करने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए।

  • यातायात पुलिस की सख्ती: इन निर्देशों के पालन में यातायात पुलिस लगातार अभियान चला रही है। ऑटो चालकों को सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपने वाहनों में जाली और उचित गेट लगवाने के लिए समझाइश दी जा रही है।

  • चालानी कार्रवाई: समझाइश के बावजूद जो ऑटो चालक नियम तोड़ रहे हैं, उन पर सख्ती की जा रही है। हाल ही में चलाए गए वाहन जांच अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं पाए जाने पर 55 ऑटो चालकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के तहत कुल 27,500 रुपये का शमन शुल्क (जुर्माना) भी वसूला गया।

अतिक्रमण और अवैध ठेलों पर नगर पालिका का प्रहार

शहर की यातायात व्यवस्था को सबसे ज्यादा सुचारू रूप से चलाने में अतिक्रमण एक बड़ी बाधा है। इसे दूर करने के लिए नगर पालिका और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम लगातार मैदानी स्तर पर काम कर रही है।

  • जुर्माना वसूली: सड़क पर अवैध रूप से खड़े रहने वाले हाथ ठेलों और स्थायी-अस्थायी अतिक्रमण को हटाने की मुहिम जारी है। नगर पालिका ने बैठक में बताया कि पुलिस प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाते हुए अब तक 1 लाख 97 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है।

  • सड़क किनारे की गुमठियां: इसके अलावा, मुख्य सड़कों के किनारे और बीच सड़क पर ठेले तथा गुमठियां लगाकर व्यापार करने वालों, जिससे ट्रैफिक जाम होता है, उनके विरुद्ध भी सख्ती की गई है। पिछली बैठक से लेकर अब तक ऐसे करीब 350 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनसे लगभग 2 लाख रुपये का शमन शुल्क वसूला गया है।

राजमार्गों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के लिए निर्देश

शहर के भीतर ही नहीं, बल्कि जिले से गुजरने वाले राजमार्गों पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • ओवरलोड वाहनों पर रोक: कुरवाई से महलुआ चौराहा मार्ग पर चलने वाले ओवरलोड वाहनों की रोकथाम के लिए एनएचएआई (NHAI - भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को आवश्यक और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • चेतावनी संकेतक: संकीर्ण पुलियों और खतरनाक मोड़ों से 500 मीटर एवं 100 मीटर पहले अनिवार्य रूप से चेतावनी संकेतक लगाने को कहा गया है।

  • दुर्घटना का चित्रण: जिन स्थानों पर बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं (ब्लैक स्पॉट्स), वहां लोगों को जागरूक और सतर्क करने के लिए पूर्व दुर्घटनाओं का चित्रण करने वाले बड़े-बड़े फ्लेक्स लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • निर्माण एजेंसियों को हिदायत: सभी निर्माण एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके कार्यस्थलों पर उचित संकेतक, स्पीड ब्रेकर (मानकों के अनुरूप) और डायवर्सन की सही व्यवस्था हो।

हाईमास्ट लाइट, ऑटो स्टैंड और पार्किंग व्यवस्था

शहर को रोशन करने और व्यवस्थित करने के लिए भी कई निर्णय लिए गए।

  • हाईमास्ट लाइट: पूर्व में चिन्हित किए गए स्थानों पर हाईमास्ट लाइट लगाने के मुद्दे पर बताया गया कि इसके लिए निविदा (टेंडर) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। परिषद से अंतिम स्वीकृति मिलते ही कुआंखेड़ी चौराहे सहित अन्य प्राथमिकता वाले स्थानों पर हाईमास्ट लाइट लगा दी जाएंगी।

  • ऑटो स्टैंड का चिन्हांकन: नगरीय क्षेत्र में बेतरतीब खड़े रहने वाले ऑटो रिक्शा के लिए स्टैंड निर्धारित किए जा रहे हैं। नगर पालिका और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम मुख्य बाजार सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों का सर्वे कर इसके लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित कर रही है।

  • भारी वाहन और मैरिज गार्डन: नगर सीमा के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश को एक तय समय और व्यवस्था के तहत नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, शहर के जिन मैरिज गार्डनों में पार्किंग की अपनी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और जिनके कारण मुख्य मार्ग का यातायात बाधित होता है, उनके विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 133 के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए गए हैं।

यातायात नियमों का उल्लंघन: 6 माह में वसूले 33 लाख

बैठक के अंत में यातायात पुलिस द्वारा पिछले छह महीनों में की गई कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया गया।

  • आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से लेकर जून 2026 तक के 6 महीनों की अवधि में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, बिना सीट बेल्ट कार चलाने और यातायात के अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कुल 8,591 चालान बनाए गए।

  • इन व्यापक चालानी कार्रवाइयों के माध्यम से यातायात पुलिस ने कुल 33 लाख 58 हजार 650 रुपये की शमन शुल्क राशि राजस्व के रूप में वसूल की है। यह आंकड़ा बताता है कि पुलिस नियमों का पालन कराने के लिए कितनी सख्ती बरत रही है।

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