भोपाल के किसी शोरूम में शनिवार की शाम। सेल्समैन एक कागज़ आगे बढ़ाता है, ऊपर एक्स-शोरूम कीमत, नीचे RTO, बीमा, एक्सेसरीज़ किट, हैंडलिंग चार्ज, एक्सटेंडेड वारंटी और आखिर में एक मोटा आँकड़ा। ज़्यादातर खरीदार सिर्फ वही आँकड़ा देखते हैं। असली खेल बीच की लाइनों में होता है।

इस बार त्योहार का माहौल थोड़ा अलग भी है। 22 सितंबर 2025 से लागू GST 2.0 के बाद छोटी कारों और 350cc तक की बाइक पर टैक्स 28 से घटकर 18 प्रतिशत हो गया था, जबकि बड़ी कारों और 350cc से ऊपर की बाइक पर 40 प्रतिशत की एक दर लगती है। यानी कई मॉडल सस्ते हुए, कुछ महँगे।

एक नज़र में: नई गाड़ी के बिल में क्या देखें

मद

नियम या तथ्य

आपको क्या करना है

छोटी कार (4 मीटर से कम)

GST 18%, पहले करीब 29%

नए रेट से कीमत मिलाएँ

बड़ी कार, SUV

GST 40%, सेस खत्म

पुराने और नए दाम की तुलना

बाइक 350cc तक / ऊपर

18% / 40% GST

cc देखकर टैक्स जाँचें

इलेक्ट्रिक गाड़ी

GST 5%, बदलाव नहीं

राज्य की छूट भी पूछें

थर्ड पार्टी बीमा

कार 3 साल, दोपहिया 5 साल

OD कवर अलग से तुलना करें

HSRP नंबर प्लेट

अप्रैल 2019 से नई गाड़ी पर ज़रूरी

डिलीवरी पर प्लेट लगवाएँ

सेफ्टी रेटिंग

Bharat NCAP, 0 से 5 स्टार

मॉडल की रेटिंग देखें

1. ऑन-रोड कीमत: हर लाइन का मतलब पूछिए

ऑन-रोड कीमत में आम तौर पर चार-पाँच चीज़ें जुड़ती हैं: एक्स-शोरूम कीमत (इसमें GST शामिल होता है), रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स, बीमा, और फिर डीलर की अपनी सूची जिसमें एक्सेसरीज़, एक्सटेंडेड वारंटी और तरह-तरह के चार्ज होते हैं। पहले दो सरकार तय करती है, बाकी पर मोलभाव की गुंजाइश है।

मध्यप्रदेश में नई गाड़ी पर रोड टैक्स रजिस्ट्रेशन के समय आम तौर पर एकमुश्त लिया जाता है और इसकी दर गाड़ी की कीमत और ईंधन के प्रकार पर निर्भर करती है। डीलर जो रकम RTO के नाम पर लिख रहा है, उसे परिवहन विभाग के पोर्टल पर दी गई दर से मिलाइए।

हैंडलिंग चार्ज और ज़बरदस्ती की एक्सेसरीज़

'हैंडलिंग', 'लॉजिस्टिक' या 'डिलीवरी' चार्ज के नाम पर कुछ हज़ार रुपये जोड़ना पुरानी शिकायत है। चेन्नई की एक उपभोक्ता अदालत ने 2017 में ऐसे अतिरिक्त चार्ज को अनुचित व्यापार व्यवहार माना था और ग्राहक को मुआवज़ा दिलाया था। डीलर यह रकम मांगे तो लिखित में पूछिए कि किस सेवा के बदले है।

यही बात एक्सेसरीज़ किट पर लागू होती है। मैट, सीट कवर, मडफ्लैप, 'प्रोटेक्शन पैक', ये सब आपकी मर्ज़ी की चीज़ें हैं। अगर गाड़ी देने को एक्सेसरीज़ से जोड़ा जा रहा है तो साफ मना कीजिए। एक्सटेंडेड वारंटी तभी लें जब गाड़ी लंबे समय तक रखनी हो और शर्तें पढ़ ली हों।

2. GST 2.0: आपकी गाड़ी किस स्लैब में है, पहले यह देखिए

22 सितंबर 2025 से वाहनों पर टैक्स का ढाँचा बदल गया। 4 मीटर से छोटी वे कारें जिनमें 1200cc तक का पेट्रोल या 1500cc तक का डीज़ल इंजन है, अब 18 प्रतिशत GST में हैं। इससे बड़ी कारों और SUV पर 40 प्रतिशत की एक दर है और अलग से लगने वाला कंपनसेशन सेस हटा दिया गया। दोपहिया में 350cc तक की बाइक और स्कूटर पर 18 प्रतिशत, जबकि 350cc से ऊपर की बाइक पर 40 प्रतिशत GST है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 5 प्रतिशत की दर पहले जैसी है।

इसका सीधा मतलब: जिस मॉडल पर टैक्स घटा है, उसकी कीमत पहले ही नीचे आ चुकी है। कोई डीलर इसी कटौती को 'स्पेशल दिवाली डिस्काउंट' बताकर पेश करे तो भ्रम में न आएँ। कंपनी की वेबसाइट पर वेरिएंट की मौजूदा कीमत देखकर छूट का हिसाब लगाइए।

 


फोटो: GST 2.0 के बाद कार और बाइक पर टैक्स की दरें (img2_gst.png)

3. डिलीवरी से पहले PDI: गाड़ी को अपनी आँखों से जाँचें

PDI यानी प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन। यह डीलर का काम है, पर आप खुद भी दिन की रोशनी में, रजिस्ट्रेशन से पहले एक बार जाँच करें। त्योहार की शाम सजावट के बीच गाड़ी लेना सबसे जोखिम भरा है।

  • बॉडी पर खरोंच, डेंट, रंग का फर्क और दरवाज़ों के बीच की दूरी एक जैसी है या नहीं।
  • ओडोमीटर देखें। नई गाड़ी पर बहुत ज़्यादा किलोमीटर पढ़ रहा हो तो कारण पूछें।
  • टायरों पर बनने की तारीख, स्टेपनी, जैक और टूल किट।
  • सारी लाइटें, AC, म्यूज़िक सिस्टम, पावर विंडो, हॉर्न और वाइपर चलाकर देखें।

कोई कमी दिखे तो डिलीवरी रसीद पर लिखवाइए, मौखिक वादे पर भरोसा न करें।

4. बनने की तारीख और VIN: पुराना स्टॉक तो नहीं?

हर गाड़ी का 17 अंकों का एक VIN (व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर) होता है, जो चेसिस पर, विंडस्क्रीन के कोने में या दरवाज़े के पास की प्लेट पर लिखा रहता है। इस प्लेट पर आम तौर पर बनने का महीना और साल भी होता है। बिल, फॉर्म 21 (सेल सर्टिफिकेट) और बीमा पॉलिसी में लिखा VIN, चेसिस नंबर और इंजन नंबर गाड़ी पर लिखे नंबर से अक्षरशः मिलाइए।

साल के आखिरी महीनों में डीलर पिछले महीनों का बचा स्टॉक बड़ी छूट के साथ निकालते हैं। पुरानी तारीख की गाड़ी लेना गलत नहीं, पर तब छूट उसी हिसाब से हो, क्योंकि बेचते समय मॉडल ईयर देखा जाता है।

“मैंने बेटे के कहने पर डिलीवरी से एक दिन पहले जाकर गाड़ी देखी। पिछले दरवाज़े पर हल्की खरोंच थी जो रात की रोशनी में दिखती ही नहीं। डीलर ने दूसरी गाड़ी दिखाई। अगर अगले दिन पूजा के बीच लेता तो शायद ध्यान ही नहीं जाता।”

मनोज तिवारी, सरकारी कर्मचारी, इंदौर

 


फोटो: कार बनाम बाइक: खरीदने से पहले क्या जाँचें (img3_price.png)

5. बीमा: डीलर का ही लें, यह ज़रूरी नहीं

सितंबर 2018 से नई कार के लिए 3 साल और नए दोपहिया के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है। इसके साथ अपनी गाड़ी के नुकसान का कवर, यानी ओन डैमेज (OD), आप एक साल का भी ले सकते हैं। डीलर अक्सर अपनी पसंद की कंपनी की पॉलिसी पहले से जोड़ देता है। आप दूसरी कंपनियों के ऑनलाइन कोटेशन से तुलना कर सकते हैं।

ऐड-ऑन सोच-समझकर चुनें। ज़ीरो डेप्रिसिएशन कवर नई गाड़ी के लिए आम तौर पर काम का माना जाता है, इंजन प्रोटेक्शन पानी भराव वाले इलाकों के लिए। पॉलिसी में IDV (बीमित कीमत) भी देखें।

6. लोन और फाइनेंस: EMI नहीं, कुल रकम देखिए

शोरूम में लोन मिनटों में पास हो जाता है। अवधि बढ़ाकर EMI छोटी दिखाना सबसे आम तरीका है। असल सवाल यह है कि पूरी अवधि में आप कुल कितना चुकाएँगे।

  • ब्याज 'फ्लैट रेट' पर है या 'रिड्यूसिंग बैलेंस' पर, लिखित में पूछें। फ्लैट रेट कागज़ पर कम दिखता है पर असल में महँगा पड़ता है।
  • प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और लोन के साथ जोड़े गए बीमा का पूरा ब्योरा लें।
  • समय से पहले लोन चुकाने (फोरक्लोज़र) पर कितना चार्ज है, यह लोन लेने से पहले तय करें।

 


फोटो: शोरूम के 4 आम जाल जिनसे बचना है (img4_traps.png)

7. सेफ्टी रेटिंग, ऑफर की शर्तें और HSRP-रजिस्ट्रेशन

Bharat NCAP रेटिंग देखिए

1 अक्टूबर 2023 से लागू Bharat NCAP के तहत 3.5 टन तक की गाड़ियों को क्रैश टेस्ट के बाद 0 से 5 स्टार तक की रेटिंग मिलती है। इसमें बड़ों की सुरक्षा, बच्चों की सुरक्षा और सेफ्टी तकनीक को परखा जाता है। कंपनियाँ अपनी मर्ज़ी से मॉडल टेस्ट कराती हैं, इसलिए हर गाड़ी की रेटिंग मौजूद नहीं होती। जिस मॉडल की रेटिंग है, उसे देखकर ही वेरिएंट चुनिए।

त्योहारी छूट की बारीक शर्तें

'₹50,000 तक का फायदा' वाले पोस्टर में 'तक' शब्द सबसे अहम है। इसमें एक्सचेंज बोनस, कॉर्पोरेट छूट जैसी चीज़ें जुड़ी होती हैं जो हर ग्राहक पर लागू नहीं होतीं। कैश डिस्काउंट कितना है, यह अलग से लिखवाइए। बुकिंग रकम की वापसी की शर्त भी रसीद पर लिखवाएँ।

HSRP और Vahan रजिस्ट्रेशन

1 अप्रैल 2019 से बनी नई गाड़ियों के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) कंपनी की ओर से डीलर को दी जाती है और डीलर ही इसे लगाता है। इस पर क्रोमियम होलोग्राम और लेज़र से लिखा पहचान नंबर होता है। रजिस्ट्रेशन अब Vahan पोर्टल पर होता है। गाड़ी मिलने के बाद parivahan.gov.in पर अपना रजिस्ट्रेशन विवरण देखें और mParivahan या DigiLocker में RC की डिजिटल कॉपी रखें।

“ग्राहक सबसे ज़्यादा गलती जल्दबाज़ी में करता है। कोटेशन दो-तीन दिन पहले लीजिए, हर लाइन समझिए, तब बुकिंग कीजिए।”

अनिल सक्सेना, ऑटोमोबाइल सलाहकार, भोपाल

गाड़ी बुक करने से पहले कर लें ये 5 काम

  1. दो डीलरों से लिखित, मद-वार ऑन-रोड कोटेशन लें और मिलाएँ।
  2. कंपनी की वेबसाइट पर GST 2.0 के बाद की एक्स-शोरूम कीमत देखें।
  3. बीमा के कम से कम दो बाहरी कोटेशन लेकर तुलना करें।
  4. लोन में कुल भुगतान, ब्याज का प्रकार और फोरक्लोज़र चार्ज लिखवाएँ।
  5. डिलीवरी से पहले दिन की रोशनी में PDI करें और VIN, बनने की तारीख मिलाएँ।

 


फोटो: नई गाड़ी लेने से पहले ये 5 काम: शेयर करने लायक चेकलिस्ट (img5_checklist.png)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: क्या एक्सेसरीज़ किट लेना ज़रूरी है?

उत्तर: नहीं। एक्सेसरीज़ आपकी पसंद की चीज़ है। डिलीवरी को इससे जोड़ा जाए तो कंपनी के ग्राहक सेवा में शिकायत करें।

प्रश्न: क्या मैं डीलर के बजाय अपनी पसंद की कंपनी से बीमा ले सकता हूँ?

उत्तर: हाँ, आप ऑनलाइन तुलना करके किसी भी बीमा कंपनी की पॉलिसी चुन सकते हैं।

प्रश्न: 350cc से बड़ी बाइक पर GST कितना है?

उत्तर: 22 सितंबर 2025 से 350cc से ऊपर की मोटरसाइकिल पर 40 प्रतिशत GST है। 350cc तक की बाइक पर 18 प्रतिशत।

प्रश्न: इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर पर GST कितना है?

उत्तर: इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5 प्रतिशत GST है, जो GST 2.0 में नहीं बदला।

प्रश्न: गाड़ी की Bharat NCAP रेटिंग कहाँ देखें?

उत्तर: Bharat NCAP की आधिकारिक वेबसाइट पर टेस्ट हुए मॉडलों की रेटिंग मिलती है। हर मॉडल टेस्ट नहीं हुआ है।

प्रश्न: डीलर ज़्यादा चार्ज ले तो शिकायत कहाँ करें?

उत्तर: पहले कंपनी के ग्राहक सेवा विभाग में लिखित शिकायत करें। हल न हो तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 या ज़िला उपभोक्ता आयोग का रास्ता है।

यह जानकारी 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध सरकारी अधिसूचनाओं और प्रमुख मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। टैक्स, बीमा और रोड टैक्स की दरें बदल सकती हैं। खरीदारी से पहले कंपनी, डीलर, बीमा कंपनी और मध्यप्रदेश परिवहन विभाग से ताज़ा जानकारी की पुष्टि कर लें।