सब्जी बाजार में खरीदारी, सही तौल हर ग्राहक का हक है (फाइल फोटो) फोटो साभार Wikimedia Commons / Dennis G. Jarvis, CC BY-SA 2.0

भारत पहली बार अंतरराष्ट्रीय विधिक मापविज्ञान समिति (CIML) की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। 61वीं बैठक 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में होगी।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग इसे अंतरराष्ट्रीय विधिक मापविज्ञान संगठन (OIML) के साथ मिलकर आयोजित कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक दुनिया भर से 100 से ज्यादा प्रतिनिधि और विशेषज्ञ इसमें शामिल होंगे।

बैठक भले अंतरराष्ट्रीय हो, लेकिन इसका विषय आपकी रोज की खरीदारी से जुड़ा है। सब्जी का तराजू, पेट्रोल पंप का मीटर और आटे के पैकेट पर छपा वजन, सब इसी कानून के दायरे में आते हैं।

आज जानेंगे कि-

  • लीगल मेट्रोलॉजी क्या है और यह बैठक क्यों अहम है?
  • पैकेट खरीदते समय किन बातों को जांचना जरूरी है?
  • कम तौल या ज्यादा MRP की शिकायत कहां और कैसे करें?

सवाल- लीगल मेट्रोलॉजी यानी विधिक मापविज्ञान क्या है?

जवाब- व्यापार में इस्तेमाल होने वाले बाट, तराजू, मीटर और पैकेट पर लिखी मात्रा सही हो, यह तय करने वाला कानूनी तंत्र लीगल मेट्रोलॉजी कहलाता है। देश में इसके लिए लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 और लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम 2011 लागू हैं। राज्यों में इसे नापतौल विभाग लागू करता है।

सवाल- OIML और CIML क्या हैं?

जवाब- OIML 1955 में बना अंतर-सरकारी संगठन है, जो नापतौल के अंतरराष्ट्रीय मानक तय करता है। भारत 1956 से इसका सदस्य है। CIML इसकी मुख्य निर्णय लेने वाली समिति है। पिछली यानी 60वीं बैठक 13 से 15 अक्टूबर 2025 को पेरिस में हुई थी।

सवाल- नई दिल्ली की बैठक में क्या होगा?

जवाब- 26 अक्टूबर की सुबह सेमिनार और 27 अक्टूबर की सुबह OIML की रणनीति पर वर्कशॉप होगी। उपभोक्ता मामले विभाग के मुताबिक एजेंडे में ये बातें हैं…

बैठक का एजेंडा

  • नापतौल के अंतरराष्ट्रीय मानकों में तालमेल
  • डिजिटल बदलाव और नियामक सेवाओं का आधुनिकीकरण
  • OIML सर्टिफिकेशन सिस्टम और अंतरराष्ट्रीय सिफारिशें

सवाल- इससे आम खरीदार को क्या फायदा?

जवाब- भारत सितंबर 2023 में OIML सर्टिफिकेट जारी करने वाला दुनिया का 13वां देश बना था। मानक एक जैसे होने से बाजार के तराजू और मीटर की सटीकता पर भरोसा बढ़ता है।

सवाल- पैकेट वाले सामान पर क्या लिखा होना जरूरी है?

जवाब- लोकसभा में 7 अगस्त 2024 को दिए सरकारी जवाब के मुताबिक हर रिटेल पैकेट पर निर्माता, पैकर या आयातक का नाम और पता, मूल देश, सामान का सामान्य नाम, नेट मात्रा, निर्माण का महीना और साल, MRP, यूनिट सेल प्राइस, जरूरत हो तो बेस्ट बिफोर या यूज बाय तारीख और कंज्यूमर केयर डिटेल लिखना जरूरी है। नीचे ग्राफिक में देखिए…

ग्राफिक से समझिए, किसी भी पैकेट को खरीदने से पहले क्या जांचें
ग्राफिक से समझिए, किसी भी पैकेट को खरीदने से पहले क्या जांचें

सवाल- यूनिट सेल प्राइस से क्या फायदा है?

जवाब- यानी प्रति किलो, प्रति लीटर या प्रति नग का दाम। इससे 400 ग्राम और 1 किलो के पैकेट की सीधी तुलना हो जाती है। यह नियम 1 अप्रैल 2022 से लागू है।

सवाल- पैकेज्ड कमोडिटीज नियमों में हाल में क्या बदला?

जवाब- हाल के 3 बड़े बदलाव ये हैं…

हाल के संशोधन

  • लेबल नियम, जनवरी 2025 से लेबलिंग संशोधन 1 जनवरी या 1 जुलाई से ही लागू होंगे, कम से कम 180 दिन की मोहलत के साथ
  • GST कटौती, सितंबर 2025 में पुराने पैकेट पर नया MRP स्टिकर लगाने की छूट, शर्त यह कि पुराना MRP न ढके
  • मेडिकल डिवाइस, अक्टूबर 2025 से इनके लेबल पर मेडिकल डिवाइस नियम 2017 लागू

सवाल- कम तौल या ज्यादा वसूली की शिकायत कहां करें?

जवाब- सबसे आसान रास्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन है। टोल फ्री नंबर 1915 या 1800-11-4000 पर रोज सुबह 8 से रात 8 बजे तक कॉल कर सकते हैं, राष्ट्रीय अवकाश को छोड़कर। हेल्पलाइन 17 भाषाओं में काम करती है। WhatsApp और SMS के लिए 8800001915, इसके अलावा NCH ऐप, UMANG ऐप, consumerhelpline.gov.in और ईमेल [email protected] भी विकल्प हैं।

मध्यप्रदेश में सीधे नापतौल विभाग से भी शिकायत कर सकते हैं। नीचे ग्राफिक में सभी नंबर देखिए…

शिकायत के सभी रास्ते, हेल्पलाइन से लेकर MP नापतौल विभाग तक
शिकायत के सभी रास्ते, हेल्पलाइन से लेकर MP नापतौल विभाग तक

सवाल- हेल्पलाइन से बात न बने तो?

जवाब- मुआवजे के लिए उपभोक्ता आयोग जा सकते हैं। केस अब ऑनलाइन e-Jagriti पोर्टल पर दर्ज होते हैं, जिसमें पुराना e-Daakhil सिस्टम जोड़ दिया गया है।

सवाल- नियम तोड़ने पर दुकानदार या कंपनी पर कितना जुर्माना?

जवाब- जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम 2026 के बाद कई छोटे उल्लंघनों पर पहली बार में सुधार नोटिस का प्रावधान है। इंडिया कोड पर उपलब्ध एक्ट के मौजूदा पाठ के मुताबिक…

  • कम तौलकर देना (धारा 30), पहली बार ₹10,000 तक, दूसरी बार ₹20,000 तक, तीसरी बार 1 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों
  • बिना सत्यापन वाला बाट या तराजू (धारा 33), पहली बार ₹2,000 से ₹10,000
  • पैकेट पर नियम के मुताबिक घोषणा नहीं (धारा 36), पहली बार सुधार नोटिस, दूसरी बार ₹5 लाख तक
  • पैकेट में मात्रा कम (धारा 36), निर्माता या आयातक पर पहली बार ₹10,000 से ₹1 लाख तक

कुछ कॉमन सवाल जवाब

सवाल- क्या दुकानदार MRP से ज्यादा ले सकता है? जवाब- नहीं, MRP में सभी टैक्स शामिल होते हैं।

सवाल- तराजू पर किस बात का ध्यान रखें? जवाब- बाट या तराजू पर नापतौल विभाग की सत्यापन मुहर देखें।

ग्राफिक- StateNews

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

CIML की 61वीं बैठक कब और कहां है?

26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में, भारत पहली बार इसकी मेजबानी कर रहा है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का नंबर क्या है?

टोल फ्री 1915 या 1800-11-4000, WhatsApp और SMS 8800001915।

पैकेट पर यूनिट सेल प्राइस क्यों जरूरी है?

इससे अलग अलग वजन के पैकेट के दाम की तुलना प्रति किलो या प्रति लीटर के हिसाब से आसानी से हो जाती है।

MP में नापतौल विभाग का संपर्क क्या है?

नियंत्रक, विधिक मापविज्ञान, डाक भवन के पास, होशंगाबाद रोड, भोपाल, फोन 0755-2551017, ईमेल [email protected]।

स्रोत OIML, आकाशवाणी समाचार (उपभोक्ता मामले मंत्रालय के हवाले से), PIB, लोकसभा अतारांकित प्रश्न 2673, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन, इंडिया कोड, उपभोक्ता मामले विभाग