मध्य प्रदेश के गुना जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और सीधे आम जनता से जोड़ने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार महत्वपूर्ण और कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी दिशा में सुशासन और त्वरित समस्या समाधान सुनिश्चित करने के लिए गुना कलेक्ट्रेट सभागार में एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय-सीमा (Time-Limit - TL) बैठक का आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता गुना जिले के कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल द्वारा की गई। समय-सीमा बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में चल रहे विभिन्न विभागीय कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन करना और सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहितकारी योजनाओं की धरातल पर वास्तविक स्थिति की गहन समीक्षा करना था। इस बैठक में जिले के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से गुना के अपर कलेक्टर श्री अखिलेश जैन, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री अभिषेक दुबे सहित सभी प्रमुख विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर श्री कन्याल ने पूरी बैठक के दौरान एक-एक विभाग के कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की और जहां भी कमी पाई गई, वहां सुधार के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।

सांस्कृतिक पहल: 'ज्ञान भारतम् पोर्टल' के लिए ऐतिहासिक धरोहरों का संकलन : बैठक की शुरुआत प्रशासनिक आंकड़ों के बजाय जिले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सहेजने की एक बेहद अनूठी और महत्वपूर्ण पहल के साथ हुई। अधिकारियों को केंद्र सरकार और राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना “ज्ञान भारतम् पोर्टल” के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। प्रशासन की ओर से बताया गया कि इस आधुनिक पोर्टल का मुख्य उद्देश्य हमारे देश और जिले की अमूल्य प्राचीन धरोहरों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना है। इसके तहत जिले में मौजूद 75 वर्ष से अधिक पुराने प्राचीन ग्रंथ, पवित्र वेद, दुर्लभ पांडुलिपियां (Manuscripts) एवं अन्य सभी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों का सघन संकलन कर उन्हें ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्य को गति प्रदान करने के लिए गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने जिले के सभी एसडीएम (उपखंड दंडाधिकारी) सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया। उन्होंने आदेशित किया कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि जिले के प्रतिष्ठित, प्रबुद्ध और वरिष्ठ नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करें। वरिष्ठ नागरिकों के पास अक्सर ऐसी पुरानी धरोहरें और ऐतिहासिक जानकारियां सुरक्षित होती हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि इन नागरिकों के सहयोग से ऐसी सभी पुरानी और मूल्यवान धरोहरों का विधिवत संरक्षण (Conservation) और दस्तावेजीकरण (Documentation) सुनिश्चित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने समृद्ध इतिहास से परिचित हो सकें।

सुशासन और जवाबदेही: सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर कलेक्टर का सख्त रुख : मध्य प्रदेश शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली 'सीएम हेल्पलाइन' (CM Helpline) योजना की समीक्षा के दौरान गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल का रवैया बेहद सख्त और कड़ा नजर आया। सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों के लिए अपनी शिकायतें सीधे शासन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है, और इसमें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कोताही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कलेक्टर ने बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहा कि जिले में किसी भी विभाग के स्तर पर कोई भी शिकायत “नॉट अटेंडेड” (Not Attended) की श्रेणी में लंबित नहीं रहनी चाहिए। 'नॉट अटेंडेड' का अर्थ है कि अधिकारी ने नागरिक की शिकायत को खोलकर देखा तक नहीं है, जिसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही माना जाता है। कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही बरतता हुआ पाया गया, तो संबंधित विभाग के प्रमुखों के खिलाफ सीधे और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूरे प्रशासनिक अमले को यह याद दिलाया कि एक लोक सेवक के रूप में आमजनों की रोजमर्रा की समस्याओं का त्वरित और संतुष्टिपूर्ण निराकरण करना हम सब की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

ग्रीष्मकालीन चुनौतियां: बिजली कटौती और पेयजल आपूर्ति पर विशेष सतर्कता : आगामी ग्रीष्म ऋतु (गर्मी के मौसम) की दस्तक के साथ ही जिले में पेयजल और बिजली की निर्बाध आपूर्ति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने विद्युत विभाग (बिजली कंपनी) के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग केवल रूटीन के हिसाब से काम न करे, बल्कि गर्मी के मौसम की संवेदनशीलता को देखते हुए एक ठोस और प्रभावी कार्ययोजना (रणनीति) बनाकर कार्य करे। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह दिया गया कि जिले के किसी भी शहरी या ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे समय में बिल्कुल भी बिजली कटौती (Power Cut) न की जाए, जिस समय लोगों के घरों में पेयजल की आपूर्ति (Water Supply) की जाती है। यदि पेयजल आपूर्ति के समय बिजली काट दी जाती है, तो पानी की मोटरें और पंप काम नहीं कर पाते, जिससे नागरिकों को भीषण गर्मी में पानी के संकट का सामना करना पड़ता है। प्रशासन का स्पष्ट आदेश है कि पानी और बिजली का समन्वय इस प्रकार रखा जाए कि जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना न पड़े।

पर्यावरण संरक्षण: नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक और प्रभावी मॉनिटरिंग : किसानों द्वारा खेतों में फसल कटाई के बाद बचे हुए अवशेष (नरवाई/Stubble) को जलाने की घटनाओं पर भी बैठक में गहरी चिंता व्यक्त की गई। गर्मी के मौसम में नरवाई जलाने से न केवल भयानक वायु प्रदूषण फैलता है, बल्कि तेज गर्म हवाओं के कारण आग भड़कने और आस-पास के खेतों, खलिहानों या गांवों तक फैलने का भी भारी जोखिम बना रहता है। इससे जन-धन और पर्यावरण की भारी हानि होती है। कलेक्टर श्री कन्याल ने जिले के सभी एसडीएम को इस मामले में अत्यंत सख्त रवैया अपनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी राजस्व अधिकारी और एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार और सघन मॉनिटरिंग (निगरानी) करें। यदि कहीं भी नरवाई जलाने की घटना सामने आती है, तो बिना किसी देरी के तत्काल और अत्यंत प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि अन्य लोगों को ऐसा करने से रोका जा सके।

मानवीय और सामाजिक अपील: जन्मदिन और वर्षगांठ पर प्याऊ स्थापित करने का आग्रह : प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ कलेक्टर श्री कन्याल ने एक बेहद संवेदनशील और सामाजिक सरोकार वाली अपील भी की। आगामी भीषण गर्मी के मौसम और राहगीरों की प्यास बुझाने की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए, उन्होंने बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और गुना जिले के आम नागरिकों से एक विशेष आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने जीवन के खुशी के पलों, जैसे- स्वयं का या बच्चों का जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ (Marriage Anniversary) या अन्य किसी शुभ अवसर पर अनावश्यक खर्च करने के बजाय अधिक से अधिक सार्वजनिक 'प्याऊ' (निशुल्क जल सेवा) स्थापित करें। कलेक्टर की यह अपील इस बात पर जोर देती है कि इस पुनीत कार्य के माध्यम से लोग समाजहित में अपना सीधा योगदान दे सकते हैं, जिससे भीषण गर्मी में आम राहगीरों और जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिल सकेगी।

भविष्य की नींव: ड्रॉप आउट बच्चों पर विशेष फोकस और शिक्षा अभियान : जिले की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के भविष्य को लेकर भी समय-सीमा बैठक में गंभीर मंथन किया गया। कलेक्टर ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि वे जिले में ऐसे बच्चों की सघन पहचान करें जो किसी भी कारण से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं (ड्रॉप आउट बच्चे)। ऐसे सभी ड्रॉप आउट बच्चों को चिह्नित करने के बाद, उनके अभिभावकों को समझाने और बच्चों को पुनः स्कूल की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरे जिले में एक व्यापक और प्रभावी जागरूकता अभियान चलाया जाए। प्रशासन का यह स्पष्ट लक्ष्य है कि जिले का हर एक बच्चा शिक्षा के मौलिक अधिकार से जुड़ सके और कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे।

नौनिहालों का स्वास्थ्य: आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग पर जोर : शिक्षा के साथ-साथ छोटे बच्चों (नौनिहालों) और गर्भवती महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के कार्यों की भी सघन समीक्षा की गई। कलेक्टर ने विभाग के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र शासन द्वारा निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से खुलने चाहिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे केंद्रों की नियमित और औचक मॉनिटरिंग करें ताकि वहां पंजीकृत बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके और उन्हें सही समय पर पोषण आहार मिल सके। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही की कोई भी शिकायत प्रशासन तक नहीं पहुंचनी चाहिए।

जमीनी स्तर पर समाधान: 'चौपाल' के माध्यम से जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण : बैठक के अंतिम चरण में प्रशासन को सीधे गांव की चौपाल तक ले जाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने जिले के सभी एसडीएम को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि वे अपने-अपने उपखंड क्षेत्रों के गांवों में नियमित रूप से 'चौपाल' का आयोजन करें। चौपाल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कलेक्टर ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर सीधे आमजन के बीच पहुंचना, उनकी समस्याओं को वहीं सुनना और उनका मौके पर ही त्वरित निराकरण करना है। इसके अलावा, चौपाल के माध्यम से ग्रामीण जनता को शासन की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सशक्त बनाना भी प्रशासन का मुख्य लक्ष्य है। कलेक्टर ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को यह भी विशेष निर्देश दिया कि चौपाल के दौरान या कार्यालयों में भूमि आवंटन (Land Allotment) से संबंधित जितने भी पुराने और लंबित प्रकरण हैं, उनका बिना किसी अनावश्यक देरी के सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर त्वरित और पारदर्शी निराकरण किया जाए।

निष्कर्षतः  गुना कलेक्ट्रेट में आयोजित यह समय-सीमा बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जिला प्रशासन जनहित के मुद्दों पर पूरी तरह से मुस्तैद और जवाबदेह है। अधिकारियों को दी गई सख्त चेतावनियां और विकास कार्यों के लिए तय किए गए लक्ष्य, जिले में एक पारदर्शी और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था कायम करने की दिशा में मजबूत कदम हैं।

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