इंदौर में दूषित पेयजल से मौतें: प्रशासनिक विफलता पर विधायक जयवर्द्धन सिंह का आरोप

भोपाल: पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने इंदौर में दूषित पेयजल से भागीरथपुरा में हुई मौतों को अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए इसे प्रदेश के लिए शर्मनाक करार दिया है। सिंह ने इसे प्रशासनिक विफलता के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की हत्या भी कहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग को धूमिल किया है और सरकार का तथ्य छिपाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

सांसदों ने की स्थगन प्रस्ताव की मांग

जयवर्द्धन सिंह ने बताया कि कांग्रेस के विधायकों ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर विस्तृत चर्चा की मांग की थी, ताकि सच्चाई सामने आ सके। लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

सरकार की स्वीकारोक्ति और विरोधाभास

नगर निगम इंदौर को दूषित पेयजल की 45,970 शिकायतें प्राप्त होने की बात सरकार ने स्वीकार की है। सिंह ने अपने तारांकित प्रश्न क्रमांक 1625 के लिखित उत्तर का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार ने आधिकारिक रूप से केवल 20 मौतें स्वीकार की हैं, जबकि दस्तावेजों में 32 मृतकों के नाम दर्ज हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि 32 लोगों की मृत्यु होने पर भी केवल 20 परिवारों को ही आर्थिक सहायता क्यों दी गई? और वह भी मात्र 2 लाख रुपये, जबकि 4 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है।

जयवर्द्धन सिंह की प्रमुख मांगें

  • मृतकों की वास्तविक संख्या तत्काल सार्वजनिक की जाए।
  • सभी पीड़ित परिवारों को समान और पूर्ण मुआवजा प्रदान किया जाए।
  • राहत वितरण एवं आंकड़ों में विसंगतियों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • लापरवाही के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
  • विधानसभा में विस्तृत और पारदर्शी चर्चा सुनिश्चित की जाए।

जयवर्द्धन सिंह ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते सत्य सामने नहीं लाया गया, तो जनता का विश्वास शासन व्यवस्था से समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोषियों की जवाबदेही तय होना ही न्याय की पहली शर्त है और पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय मिलने तक इस मुद्दे पर लड़ाई जारी रहेगी।