दमोह : प्रदेश के कृषि परिदृश्य में रबी फसलों की सरकारी खरीद एक महा-अभियान की तरह होती है, जहां किसानों की मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी क्रम में, दमोह जिले के संवेदनशील और सक्रिय कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए बटियागढ़ और बकायन स्थित समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और किसानों के प्रति संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण था। मध्य प्रदेश के कृषि बेल्ट में वर्तमान में चना और गेहूं की तुलाई का कार्य जोरों पर है, और ऐसे समय में कलेक्टर का स्वयं मैदान में उतरना व्यवस्था की पारदर्शिता को बल प्रदान करता है।

 1.ज़मीनी हकीकत और औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य 

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बिना किसी पूर्व सूचना के बटियागढ़ और बकायन केंद्रों पर दस्तक दी। उनका प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकार द्वारा निर्धारित मानक प्रक्रिया का पालन जमीनी स्तर पर अक्षरश: हो रहा है या नहीं। उन्होंने केंद्रों पर पहुंचकर सबसे पहले बोरी तुलाई की प्रक्रिया का सूक्ष्मता से अवलोकन किया।

• कलेक्टर ने स्वयं इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर बोरियों का वजन कराया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों से एक ग्राम भी अतिरिक्त अनाज नहीं लिया जा रहा है।

• उन्होंने तुलाई के बाद बोरियों की सिलाई और उनके भंडारण की स्थिति का भी जायजा लिया।

• अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि तुलाई में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

2.किसानों से सीधा संवाद: संतोष और व्यवस्था परिवर्तन की लहर 

निरीक्षण की सबसे खास बात यह रही कि कलेक्टर ने अधिकारियों के घेरे से बाहर निकलकर किसानों से एकांत में चर्चा की। उन्होंने किसानों से पूछा कि क्या उन्हें किसी बिचौलिए या केंद्र के कर्मचारियों द्वारा परेशान किया जा रहा है।

• किसानों ने कलेक्टर के सामने अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि इस बार की व्यवस्थाओं में पहले की तुलना में गुणात्मक सुधार देखा जा रहा है।

• किसानों का कहना था कि स्वयं जिला प्रमुख की उपस्थिति से केंद्रों पर कर्मचारियों की कार्यशैली में अनुशासन आया है।

• कलेक्टर ने किसानों से अलग ले जाकर फीडबैक लिया ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी समस्याएं बता सकें।

• बातचीत के दौरान किसानों ने छाया और बैठने की व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय प्रशासन किसान कल्याण के प्रति सजग है।

3.डिजिटल गवर्नेंस: फेसबुक और सोशल मीडिया शिकायतों का त्वरित निवारण 

आज के दौर में सोशल मीडिया प्रशासन और जनता के बीच एक सेतु का कार्य कर रहा है। कलेक्टर यादव ने बताया कि उन्हें उनके आधिकारिक फेसबुक पेज और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से कुछ गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

• शिकायतों में मुख्य रूप से समय पर तुलाई न होना, तकनीकी खराबी के कारण ओटीपी (OTP) प्राप्त न होना और उपार्जन पावती मिलने में देरी जैसी समस्याएं शामिल थीं।

• इन डिजिटल शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही पोर्टल की कार्यप्रणाली की समीक्षा की।

• उन्होंने पाया कि कुछ स्थानों पर नेटवर्क की समस्या और पोर्टल के धीमे होने के कारण किसानों को पावती मिलने में विलंब हो रहा था।

• कलेक्टर ने मौके पर ही तकनीकी विशेषज्ञों को इन कमियों को सुधारने के आदेश दिए ताकि डिजिटल इंडिया का लाभ अन्नदाताओं को सुगमता से मिल सके।

 4.उच्च स्तरीय समन्वय: कमिश्नर फूड के साथ रणनीतिक विमर्श 

निरीक्षण के दौरान ही कलेक्टर ने राज्य स्तर पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए कमिश्नर फूड कर्मवीर शर्मा से टेलीफोनिक चर्चा की। यह संवाद इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन केवल स्थानीय समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि नीतिगत सुधारों के लिए भी प्रयासरत है।

• कलेक्टर ने कमिश्नर को अवगत कराया कि ओटीपी और पंजीकरण से जुड़ी कुछ तकनीकी बाधाएं किसानों की राह में रोड़ा बन रही हैं।

• कमिश्नर कर्मवीर शर्मा ने आश्वासन दिया कि जैसे ही निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होगी, तकनीकी टीम के माध्यम से सर्वर और पोर्टल की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाएगा।

• प्रशासन का लक्ष्य है कि पंजीकरण से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को 'जीरो एरर' के साथ संपन्न किया जाए।

 5.मूलभूत सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण और अधिकारियों को सख्त हिदायत 

निरीक्षण के दौरान जहां तुलाई की व्यवस्था दुरुस्त पाई गई, वहीं कलेक्टर ने कुछ मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिया। भीषण गर्मी को देखते हुए उन्होंने केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा की।

• कलेक्टर ने पाया कि कुछ केंद्रों पर पेयजल की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, जिस पर उन्होंने तत्काल नाराजगी व्यक्त की।

• उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि केंद्रों पर शीतल जल, प्राथमिक चिकित्सा किट और बैठने के लिए पर्याप्त छायादार स्थान अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

• किसानों को समय पर पर्ची (Slip) उपलब्ध कराने के लिए मैनपावर बढ़ाने के निर्देश दिए गए ताकि उन्हें अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।

• उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्नदाता का सम्मान सर्वोपरि है और किसी भी खरीदी केंद्र पर उन्हें 'भटकना' नहीं पड़ना चाहिए।

6. भविष्य की रणनीति: पारदर्शी खरीदी का नया मॉडल 

मध्य प्रदेश में इस बार की फसल खरीदी को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है। कलेक्टर के इस निरीक्षण के बाद पूरे जिले के अन्य खरीदी केंद्रों में भी हड़कंप की स्थिति है और कर्मचारी अब अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बना रहे हैं।

• भविष्य में ऐसे औचक निरीक्षणों की श्रृंखला जारी रहेगी ताकि व्यवस्था में निरंतरता बनी रहे।

• जिला प्रशासन अब एक रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे प्रत्येक किसान की तुलाई की स्थिति का पता लगाया जा सके।

• कलेक्टर ने अंत में कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि प्रत्येक किसान को संतुष्ट करना और उसकी मेहनत का फल समय पर दिलाना है।

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