खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया कटनी जिले में जोरों पर चल रही है। किसानों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष तैयारियां की गई हैं। यह पंजीयन प्रक्रिया आगामी 10 अक्टूबर तक निरंतर जारी रहेगी। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार जिलेभर में कुल 51 पंजीयन केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जहाँ किसान पहुंचकर अपना पंजीयन करा सकते हैं।

 

पंजीयन से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियां और समय

धान उपार्जन के लिए निर्धारित यह पंजीयन प्रक्रिया सभी निर्धारित कार्य दिवसों में सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि रविवार एवं अन्य शासकीय अवकाश के दिनों में पंजीयन कार्य नहीं किया जाएगा। अतः किसान कार्य दिवसों में ही अपने संबंधित केंद्रों पर संपर्क कर सकते हैं।

 

एग्रीस्टेक डाटाबेस से जोड़ा गया किसान पंजीयन

इस वर्ष की किसान पंजीयन प्रक्रिया में एक बड़ा और तकनीकी बदलाव करते हुए इसे एग्रीस्टेक डाटाबेस से जोड़ा गया है। पंजीयन प्रक्रिया के दौरान किसान के स्वामित्व वाले खसरे, कुल रकबे तथा खेत में बोई गई फसल की सटीक जानकारी सीधे एग्रीस्टेक डाटाबेस के माध्यम से प्राप्त होगी। इस तकनीक के उपयोग से पंजीयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश खत्म होगी और किसान की वास्तविक भूमि एवं फसल संबंधी जानकारी का पुख्ता सत्यापन किया जा सकेगा।

 

विगत वर्ष के पंजीकृत और नवीन किसानों के लिए विशेष विकल्प

पंजीयन केंद्रों पर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए दो अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं:

 

  • विगत वर्ष पंजीकृत किसानों के लिए: जो किसान पहले से पंजीकृत हैं, वे अपना आधार नंबर, समग्र परिवार आईडी, मोबाइल नंबर, एग्रीस्टेक किसान आईडी या पिछले वर्ष की किसान पंजीयन आईडी दर्ज कर अपना पुराना विवरण आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इस विवरण में नियमानुसार संशोधन भी किया जा सकता है।

  • नवीन किसानों के लिए: नए किसानों को आवेदन पत्र में अपना संपूर्ण विवरण विधिवत दर्ज कराना होगा।

पंजीयन के दौरान किसान का सही आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। यूआईडीएआई (UIDAI) के आधार डाटाबेस से बायोमैट्रिक या ओटीपी सत्यापन होने के बाद ही ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान की जानकारी प्राप्त होगी। किसान के नाम और अन्य विवरण का आधार डाटाबेस से पूर्ण मिलान होने के बाद ही पंजीयन सुरक्षित किया जा सकेगा।

 

भूमि एवं फसल का विवरण तथा आधार की अनिवार्यता

किसान पंजीयन के वक्त भूमि के खसरा नंबर, कुल रकबा और बोई गई फसल की जानकारी एग्रीस्टेक डाटाबेस से ही ली जाएगी। पंजीयन में केवल संबंधित किसान के नाम के खसरे की ही जानकारी दर्ज की जा सकेगी। यदि एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान के सभी खसरे उपलब्ध नहीं हैं, तो शेष खसरों को संबंधित पटवारी, सीएससी, ग्राम सहायक या फार्मर रजिस्ट्री एमपी मोबाइल ऐप के माध्यम से एग्रीस्टेक डाटाबेस में आसानी से जोड़ा जा सकेगा।

 

खसरे में दर्ज फसल और उसके सिंचित या असिंचित रकबे के आधार पर ही पंजीयन किया जाएगा। ई-उपार्जन पोर्टल और एग्रीस्टेक के एकीकरण से भू-स्वामी के स्वामित्व वाले खसरे, फसल, रकबे के साथ-साथ किसान का यूनिक कोड और एग्रीस्टेक फार्मर आईडी भी पंजीयन डेटा में स्वतः दर्ज हो जाएगी। जिन किसानों के पास आधार नंबर नहीं है, वे आधार केंद्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। समग्र आईडी या आधार आवेदन की पंजीयन पावती के जरिए भी नियमानुसार पंजीयन कराया जा सकता है। सफल पंजीयन की सूचना एसएमएस के माध्यम से दी जाएगी और पोर्टल से इसकी प्रिंट कॉपी भी प्राप्त की जा सकेगी।

 

सिकमी, बटाईदार और वन पट्टाधारी किसानों के लिए प्रावधान

सिकमी, बटाईदार एवं वन पट्टाधारी किसानों के लिए सहकारी समितियों तथा सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की गई है। यदि बटाईदार ने एक से अधिक किसानों की भूमि ली है, तो प्रत्येक मूल किसान के साथ पृथक अनुबंध कर अलग पंजीयन कराना होगा। ऐसे किसानों को मूल व स्वयं के आधार नंबर, एग्रीस्टेक आईडी और अनुबंध की स्कैन प्रति पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। 15 सितंबर 2026 से पूर्व पंजीकृत अनुबंध या वन पट्टा ही मान्य होगा, जिसकी अवधि अधिकतम पांच वर्ष निर्धारित है। गलत खसरा जोड़ने पर समिति प्रबंधक और ऑपरेटर पर वैधानिक कार्रवाई होगी।

 

कटनी जिले में बनाए गए प्रमुख पंजीयन केंद्र

कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा जारी आदेश के तहत कटनी जिले की विभिन्न तहसीलों में निम्नलिखित पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं:

 

  • कटनी एवं कटनी नगर तहसील: प्राथमिक कृषि साख समिति पहाड़ी, कन्‍‍हवारा, चाका कैलवारा और वृहत्ताकार कृषि साख समिति कटनी।

  • ढीमरखेड़ा तहसील: उमरियापान, खमतरा, ढीमरखेड़ा, दशरमन, सिलौड़ी, झिन्‍ना पिपरिया, देवरी मंगेला।

  • बड़वारा तहसील: बड़वारा, विलायतकला (केंद्र क्र. 01 व 02), अमाड़ी, बसाड़ी, नन्‍‍हवारा सेझा।

  • बरही तहसील: बरही, पिपरियाकलां, खितौली (केंद्र क्र. 01 व 02)।

  • बहोरीबंद तहसील: बहोरीबंद, हथियागढ़ (केंद्र क्र. 01), कुआं, कूड़न, बाकल, सिहुड़ी, इमलिया, चांदनखेड़ा, देवरी खरगवां, सलैया पटोरी, बरही (बाकल)।

  • रीठी तहसील: कृषि विपणन सहकारी समिति रीठी, बिलहरी, बड़गांव, बकलेहटा, रैपुरा, देवगांव।

  • विजयराघवगढ़ तहसील: सिनगौंडी, विजयराघवगढ़, देवराकला, जिवारा, अमेहटा नन्‍‍हवारा, सलैया कोहारी, प्रियदर्शनी विपणन सहकारी समिति विजयराघवगढ़।

  • स्लीमनाबाद तहसील: तेवरी, स्लीमनाबाद, पडरभटा, कौडिया, धरवारा।

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