मध्य प्रदेश के कटनी जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने और अनियमित्ताओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में विकासखंड ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाली शासकीय उचित मूल्य दुकान घुघरी में बड़ा वित्तीय और प्रशासनिक गोलमाल सामने आया है। करीब सवा दो लाख रुपये मूल्य के खाद्यान्न को खुर्द-बुर्द करने के गंभीर मामले में कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के कड़े निर्देशों के बाद, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी द्वारा दुकान के विक्रेता के विरुद्ध स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इस कार्रवाई से जिलेभर के भ्रष्ट राशन विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।
जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत पर त्वरित संज्ञान
प्रशासनिक कसावट और जनता की शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता का परिचय देते हुए इस मामले का खुलासा हुआ। कलेक्ट्रेट में आयोजित नियमित जनसुनवाई के दौरान एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें घुघरी उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और हेराफेरी का आरोप लगाया गया था।
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल प्रभाव से इसकी मैदानी जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश थे कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गरीबों के हक का राशन डकारने का मामला पाया जाता है, तो संबंधितों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी द्वारा की गई स्थलीय जांच
कलेक्टर के आदेशों के पालन में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन ने शासकीय उचित मूल्य दुकान घुघरी का औचक निरीक्षण और विस्तृत भौतिक सत्यापन किया। आपको बता दें कि इस उचित मूल्य दुकान का संचालन नरसिंह स्व-सहायता समूह घुघरी द्वारा किया जा रहा था।
जांच प्रक्रिया के दौरान दुकान के विक्रेता के प्रतिनिधि मोहित मिश्रा मौके पर मौजूद रहे। अधिकारी ने दुकान के ई-पीडीएस पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन डेटा और गोदाम में रखे वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान किया। इस सूक्ष्म जांच के दौरान स्टॉक में भारी अंतर और गंभीर वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई, जिससे विक्रेता की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए।
ई-पीडीएस और भौतिक स्टॉक में मिला बड़ा अंतर
जांच दल द्वारा जब पोर्टल के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन किया गया, तो अनाज की भारी मात्रा गायब मिली। रिपोर्ट के अनुसार:
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गेहूं: 3847 किलोग्राम गेहूं कम पाया गया।
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चावल: 2615 किलोग्राम चावल कम पाया गया।
जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि कम पाए गए इस खाद्यान्न का अवैध रूप से अपयोजन किया गया है और इसके जरिए बाजार में बेचकर अनैतिक लाभ अर्जित किया गया है। इस पूरी हेराफेरी किए गए खाद्यान्न की कुल कीमत 2 लाख 17 हजार 568 रुपये निर्धारित की गई। इसके अतिरिक्त, जांच के समय दुकान पर शासन के नियमों के विपरीत निर्धारित स्टॉक सूची और भाव सूची भी प्रदर्शित नहीं पाई गई थी, जो पारदर्शिता के नियमों का खुला उल्लंघन था।
बायोमेट्रिक सत्यापन के बावजूद हितग्राहियों को नहीं मिला राशन
इस जांच का सबसे संवेदनशील और गंभीर पहलू यह रहा कि विक्रेता द्वारा गरीबों के हक के साथ किस हद तक खिलवाड़ किया जा रहा था। जांच के दौरान मौके पर मौजूद स्थानीय हितग्राहियों—द्वारका प्रसाद लोधी, छोटी ढीमर, अर्जुन लोधी और कांशीराम लोधी के औपचारिक कथन दर्ज किए गए।
हितग्राहियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए खुलासा किया कि विक्रेता ने मई और जून 2026 के राशन वितरण के लिए पीओएस (POS) मशीन पर अंगूठा लगवाकर उनका बायोमेट्रिक सत्यापन तो करवा लिया, लेकिन इसके बावजूद उनकी पात्रतानुसार वास्तविक खाद्यान्न (अनाज) उन्हें नहीं दिया गया। साफ है कि कागजों में वितरण दिखाकर गरीबों के हिस्से का राशन कालाबाजारी के लिए बचा लिया गया।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आवश्यक वस्तु अधिनियम के नियमों का उल्लंघन
विक्रेता का यह कृत्य न केवल अनैतिक था, बल्कि कानूनी रूप से भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। जांच में यह पाया गया कि विक्रेता का यह आचरण निम्नलिखित नियमों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है:
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मध्य प्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश, 2015 की कंडिका 11(1), 11(3), 13(2), 16 एवं 18।
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आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7।
हितग्राहियों को उनके कानूनी हक के खाद्यान्न से वंचित कर अवैधानिक लाभ अर्जित किए जाने के अकाट्य तथ्यों और पुख्ता सबूतों के आधार पर कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के निर्देश दिए।
थाने में मामला दर्ज और आगामी विवेचना
कलेक्टर के निर्देशों के त्वरित अनुपालन में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की औपचारिक शिकायत पर आरोपी विक्रेता विनीता मिश्रा (पति ब्रजमोहन मिश्रा, निवासी घुघरी, ढीमरखेड़ा) के विरुद्ध थाना ढीमरखेड़ा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(5) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 एवं 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है। पुलिस द्वारा मामले की विधिवत विवेचना की जा रही है, और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस अवैध नेटवर्क में संलिप्त अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाए।
image source: https://katni.mpinfo.org
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