मैहर | लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसुनवाई का कार्यक्रम आम जनता और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है। इसी कड़ी में मंगलवार को मैहर जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में एक व्यापक जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के सुदूर अंचलों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याओं और शिकायतों को शासन के समक्ष रखने के लिए लंबी कतारें लगाईं। कलेक्टर मैहर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी ने स्वयं उपस्थित होकर 103 आवेदकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके त्वरित निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए।

जनसुनवाई: एक पारदर्शी और सुलभ मंच

जनसुनवाई कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की उन समस्याओं का समाधान करना है जो विभागीय स्तर पर लम्बित रह जाती हैं। मैहर जिले में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में नागरिकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि लोग प्रशासन के प्रति आशावान हैं। कलेक्टर द्वारा जनसुनवाई में व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक आवेदक की बात सुनना प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचायक है। इस दौरान एसडीएम मैहर श्रीमती दिव्या पटेल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, ताकि मौके पर ही समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

आवेदनों का विश्लेषण और प्रशासनिक प्राथमिकताएँ

जनसुनवाई में प्राप्त 103 आवेदनों में विभिन्न प्रकार की समस्याएँ शामिल थीं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मुद्दे उभर कर सामने आए:

  • राजस्व एवं भूमि विवाद: अधिकांश आवेदन भूमि के सीमांकन, नामांतरण और राजस्व रिकॉर्ड में सुधार से संबंधित थे। कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि भू-अभिलेखों के सुधार में पारदर्शिता बरती जाए और किसानों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

  • आधारभूत सुविधाएँ: बिजली, पानी, सड़क और सिंचाई संबंधी समस्याओं को लेकर ग्रामीण अंचलों से आए लोगों ने अपनी व्यथा सुनाई। कलेक्टर ने कार्यपालन यंत्रियों और संबंधित विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया कि इन समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करें।

  • सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन: पेंशन, छात्रवृत्ति और उज्ज्वला योजना जैसे लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों से वंचित पात्र हितग्राहियों ने भी अपनी शिकायतें रखीं। जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को जांच के उपरांत पात्र आवेदकों को तत्काल लाभ देने के आदेश दिए।

  • आवास योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अपात्रों के नाम हटने और पात्र हितग्राहियों को लाभ न मिलने के संबंध में भी कई शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन्हें प्रशासन ने गहन जांच के दायरे में लिया है।

अधिकारियों के लिए स्पष्ट निर्देश

कलेक्टर मैहर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी ने बैठक के दौरान सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि 'जनसुनवाई' में प्राप्त आवेदनों को मात्र फाइलों में न दबाया जाए। प्रत्येक आवेदन का भौतिक सत्यापन होना चाहिए और समय-सीमा के भीतर आवेदक को निराकरण की सूचना प्राप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि:

  1. निराकरण की गुणवत्ता: समस्या का समाधान ऐसा हो जो स्थायी हो, ताकि आवेदक को बार-बार कलेक्ट्रेट के चक्कर न लगाने पड़ें।

  2. जवाबदेही: यदि कोई अधिकारी जनसुनवाई के आवेदनों में उदासीनता बरतता है, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  3. फील्ड विजिट: महत्वपूर्ण मामलों में संबंधित एसडीएम और तहसीलदारों को स्वयं जाकर स्थल का निरीक्षण करने के लिए कहा गया है।

जनता का प्रशासन पर बढ़ता भरोसा

मैहर जिले में प्रशासन द्वारा की जा रही जनसुनवाई की यह पहल स्थानीय नागरिकों के लिए एक राहत भरा कदम है। प्रशासनिक अधिकारियों का आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें त्वरित समाधान का भरोसा देना न केवल सरकारी तंत्र की जवाबदेही बढ़ाता है, बल्कि लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को भी साकार करता है।

मैहर प्रशासन का यह संकल्प है कि जिले का हर नागरिक शासन की योजनाओं से लाभान्वित हो और उनकी शिकायतों का समय पर निपटारा हो। जनसुनवाई के पश्चात कलेक्टर ने सभी विभागीय प्रमुखों से फीडबैक भी लिया और आगामी कार्यक्रमों के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करने को कहा। मैहर की जनता अब इन 103 आवेदनों पर होने वाली ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है, जो प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यकुशलता की वास्तविक परीक्षा होगी। यह जनसुनवाई कार्यक्रम न केवल समस्याओं के समाधान का जरिया है, बल्कि यह जिला प्रशासन और मैहर के नागरिकों के बीच विश्वास की डोर को और अधिक मजबूत करता है।

Image source: https://maihar.mpinfo.org