आमला। आमला रेलवे स्टेशन पर RPF की कार्रवाई को लेकर एक व्यापारी ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। व्यापारी का आरोप है कि उसे टिकट दलाली से जोड़ते हुए बिना पर्याप्त जांच के धारा 143 रेलवे एक्ट के तहत आरोपी बना दिया गया। कार्रवाई के आधार और जांच से जुड़े सवाल पूछने पर उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
व्यापारी के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान उसे टिकट दलाल के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि उसका कहना है कि वह टिकट दलाली से संबंधित किसी गतिविधि में शामिल नहीं है। व्यापारी ने मांग की है कि यदि उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक जांच प्रक्रिया में सामने लाया जाए।
*कथित गवाहों को लेकर भी उठाए सवाल*
व्यापारी ने कार्रवाई के दौरान बनाए गए कथित गवाहों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि कुछ लोगों को गवाह बनाकर उनके हस्ताक्षर लिए गए, जबकि बाद में कथित रूप से उन्हीं लोगों ने कहा कि “हम इनको नहीं जानते, पहली बार ही देख रहे हैं।” व्यापारी का सवाल है कि यदि संबंधित व्यक्ति उसे जानते ही नहीं थे और पहली बार देख रहे थे, तो उन्हें किस आधार पर गवाह बनाया गया और उनके हस्ताक्षर किस परिस्थिति में लिए गए।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में गवाहों के बयान, पंचनामा और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
*फ्लाइंग ऑफिसर और RPF थाने में सौंपे जाने का भी दावा*
व्यापारी के अनुसार, डीएल ककोड़िया के फ्लाइंग ऑफिसर द्वारा उसे मीणा एवं विकास के माध्यम से लाया गया और बाद में RPF थाने में सौंप दिया गया। व्यापारी ने इस पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग की है।
*धमकी देने का भी लगाया आरोप*
व्यापारी ने बंदल सिंह मीणा पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कथित तौर पर उससे कहा गया—“जो करना है कर लो, मैं तो साबित करके बताऊंगा कि तुम टिकट की दलाली करते हो। साबित कर दूंगा, जिसको लाना है ला लो।”
व्यापारी का कहना है कि यदि उसके खिलाफ टिकट दलाली के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं तो उन्हें जांच में सामने लाया जाए। साथ ही उसने पूरी कार्रवाई के दौरान मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और कथित गवाहों के बयान दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अब मामला RPF के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष जांच का विषय बन गया है। RPF का आधिकारिक पक्ष और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई किन साक्ष्यों और किस प्रक्रिया के आधार पर की गई।
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