पन्ना जिले से प्रशासनिक क्षमता विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। ई-दक्ष केंद्र पन्ना में जिले के विभिन्न विभागों के शासकीय कर्मचारियों के लिए संचालित 'कर्मयोगी कर्तव्य' कार्यक्रम के अंतर्गत दो चरणों में आयोजित अतिरिक्त प्रशिक्षण बैचों के साथ अब तक 200 से अधिक शासकीय कर्मचारियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता से इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रशासनिक कसावट और कार्यकुशलता में सुधार देखने को मिल रहा है।

राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के संस्थानों का मार्गदर्शन

यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह से उच्च स्तरीय दिशा-निर्देशों और समन्वय के तहत संचालित किया जा रहा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सहयोग एवं समन्वय: यह कार्यक्रम भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग (नई दिल्ली) तथा आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय अकादमी (भोपाल) के समन्वय एवं मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।

  • मुख्य उद्देश्य: इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शासकीय सेवकों के भीतर कर्तव्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व की भावना, कार्य के प्रति अटूट समर्पण, आंतरिक एवं बाह्य उत्कृष्टता तथा नागरिक केंद्रित सेवा भावना को गहराई से विकसित करना है।

प्रशासनिक नेतृत्व एवं कुशल प्रशिक्षण संचालन

पन्ना जिला कलेक्टर श्रीमती ऊषा परमार तथा मिशन के नोडल अधिकारी एवं जिला पंचायत सीईओ श्री उमराव सिंह मरावी के कुशल मार्गदर्शन और सतत समन्वय में जिले में इन प्रशिक्षण गतिविधियों को सुचारू रूप से अंजाम दिया जा रहा है। ई-दक्ष केंद्र के वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री वैभव सोनी के नेतृत्व में सभी प्रशिक्षण सत्रों का प्रभावी संचालन किया जा रहा है।

प्रशिक्षण को अधिक रोचक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए ई-दक्ष केंद्र के प्रशिक्षक श्री धीरज पांडेय के साथ-साथ पॉलिटेक्निक कॉलेज की व्याख्याता श्रीमती वर्षा प्रजापति और पटवारी श्री मोहम्मद साजिद ने भी प्रशिक्षक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता दर्ज कराई है।

विभिन्न विभागों की व्यापक भागीदारी और पाठ्यक्रम

अब तक आयोजित किए गए विभिन्न प्रशिक्षण बैचों में जिले के लगभग सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल विभाग निम्नलिखित हैं:

  • वन विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग

  • जल संसाधन विभाग तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा

  • सहकारिता विभाग एवं राजस्व विभाग

  • कलेक्ट्रेट, जिला पंचायत और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग

प्रशिक्षण सत्रों के दौरान कर्मयोगी कर्तव्य, आंतरिक एवं बाह्य उत्कृष्टता, कर्मयोगी क्षणों तथा नागरिक केंद्रित सेवाओं जैसे बेहद महत्वपूर्ण विषयों को केवल किताबी तरीके से नहीं, बल्कि गतिविधि आधारित एवं सहभागी पद्धति (Participatory Methodology) के माध्यम से बहुत ही सरल तरीके से समझाया गया।

सकारात्मक प्रतिक्रिया और आगामी लक्ष्य

प्रशिक्षण में शामिल होने वाले सभी शासकीय कर्मचारियों की ओर से बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रतिभागियों ने अपने फीडबैक में साझा किया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से व्यावहारिक, सहभागी और उनके दैनिक शासकीय कार्यों से सीधा जुड़ा हुआ है। नागरिकों के साथ शालीन व्यवहार, कार्य के प्रति गहरी जिम्मेदारी, सकारात्मक कार्यशैली और सेवा की गुणवत्ता से जुड़े विषयों को सभी ने बेहद उपयोगी माना। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई बातों को अपने कार्यस्थल पर पूरी ईमानदारी से लागू करने की इच्छा भी व्यक्त की है।

कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन ने आगामी 31 दिसंबर तक प्रत्येक विभाग के प्रत्येक शासकीय कर्मी को प्रशिक्षित करने का एक स्पष्ट और बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए विभिन्न विभागों से मास्टर ट्रेनर्स के नामांकन भी आमंत्रित किए जा चुके हैं। आगामी चरण में इन नामांकित मास्टर ट्रेनर्स को विशेष प्रशिक्षण देकर पूरी तरह तैयार किया जाएगा, ताकि वे अपने-अपने विभागों में जाकर अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर सकें। 'कैस्केड मॉडल' के इस बेहतरीन माध्यम से प्रशिक्षण की प्रक्रिया को जिले के हर कोने और हर शासकीय कर्मी तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

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