मध्य प्रदेश के सतना जिले में इतिहास और संस्कृति को संजोने वाला एक बेहद खास और प्रेरणादायी आयोजन संपन्न हुआ। सतना जिले के बाल्मीकि परिसर मझगवां में भारत की महान वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस गरिमामयी समारोह में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं गरिमा बढ़ाने के लिए क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती सुष्मिता सिंह, उत्तम बनजम, लक्ष्मीकांत, समाजसेवी चूड़ामणि सिंह, रामऔतार आरख, बिरसा मुंडा समिति की अध्यक्ष श्रीमती सोनाबाई, सचिव राजेश त्रिपाठी, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल, सचिव अपराजित शुक्ला, तथा महाप्रबंधक डॉ. अनिल जायसवाल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी के विचार और समाज सुधार का संदेश

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने कहा कि यदि हमें समाज में वास्तविक जागृति लानी है, तो हम सबको अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं के माध्यम से प्रोत्साहित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज को अलग-अलग जातियों और वर्गों में बांटने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है, ऐसे में हम सबको मिलकर भेदभाव के इस कुचक्र को तोड़ना होगा। समाज में समरस भाव लाते हुए छुआछूत और अस्पृश्यता की खाई को हमेशा के लिए खत्म करने का संकल्प लेना चाहिए। राज्यमंत्री ने वर्तमान पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखने और अपनी मूल भारतीय संस्कृति तथा सनातन परंपरा के उच्च संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया। रानी दुर्गावती के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जैसा हमारा नाम होता है, वैसे ही हमारे कृतित्व होने चाहिए; वीरांगना रानी दुर्गावती का जैसा नाम था, वैसा ही अदम्य साहस और रण कौशल उन्होंने युद्ध के मैदान में साबित करके दिखाया।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष और अन्य वक्ताओं के उद्बोधन

समारोह में अपने विचार रखते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती सुष्मिता सिंह ने कहा कि भारत भूमि सदैव से श्रेष्ठ रही है और हमारी मातृशक्ति ने इतिहास के हर कालखंड में एक पथ-प्रदर्शक की भूमिका निभाई है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि विश्व की प्रथम महिला वीरांगना रानी दुर्गावती हैं, जिनकी आज हम 502वीं जयंती मना रहे हैं। रानी दुर्गावती देश की पहली ऐसी नारीशक्ति हैं जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं के दांत खट्टे किए और उन्हें परास्त किया। उनका संपूर्ण जीवन दर्शन हम सबके लिए अत्यंत प्रेरणास्पद है। हमें उनके बताए गए मार्ग पर स्वयं आगे बढ़ना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी और हमारे बच्चों को भी उससे प्रेरणा मिल सके। कार्यक्रम की रूपरेखा और अतिथियों का स्वागत भाषण कृष्णा देवी विद्यालय के प्राचार्य गंगाराम यादव द्वारा दिया गया, जिसमें विद्यालय की गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं विविध कार्यक्रम

इस जयंती समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण कृष्णा देवी विद्यालय की वनवासी बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। छात्राओं ने वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित सांस्कृतिक नाटकों और नृत्यों का मंचन किया। इन छात्राओं ने अपने पारंपरिक वेशभूषा में सजी धजी होकर एक से बढ़कर एक मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें देखकर उपस्थित सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। रानी दुर्गावती जयंती के इस विस्तृत आयोजन के अंतर्गत कई अन्य धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी संपन्न हुईं। इसमें प्रमुख रूप से सुंदरकांड पाठ का आयोजन, कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से विशेष कृषक गोष्ठी, और विद्यालय की बालिकाओं के कार्यक्रम शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे और प्रसाद वितरण के साथ इस भव्य आयोजन का सफलतापूर्वक समापन किया गया।

सहयोग, संचालन और सहभागिता

इस विशाल और सफल आयोजन को मूर्त रूप देने में महर्षि वाल्मीकि परिसर के सभी कार्यकर्ताओं, स्थानीय किसान बंधुओं, क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों तथा विद्यालय के पुरातन छात्रों का अभूतपूर्व योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. पंकज शर्मा द्वारा बहुत ही आत्मीय और सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। इस आयोजन ने न केवल सतना जिले के मझगवां क्षेत्र में बल्कि पूरे संभाग में वीरांगना रानी दुर्गावती के इतिहास को एक बार फिर से जीवंत कर दिया और युवाओं को राष्ट्रभक्ति तथा संस्कृति का संदेश दिया।

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