अंतर्राष्ट्रीय साइन लैंग्वेज दिवस के अवसर पर विदिशा जिले में दिव्यांग छात्र-छात्राओं की छिपी हुई प्रतिभा को एक नया मंच प्रदान करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के मार्गदर्शन और निर्देशों के पालन में 23 सितंबर को पुराना जिला अस्पताल परिसर स्थित दीक्षा निकेतन विशेष स्कूल में यह गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर जिलेभर के विभिन्न विशेष विद्यालयों और छात्रावासों के दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने अत्यंत उत्साह, ऊर्जा और उमंग के साथ सहभागिता दर्ज कराई, जिसने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।
दीक्षा निकेतन परिसर में दिखा उत्साह का माहौल
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र पुराना जिला अस्पताल परिसर स्थित दीक्षा निकेतन विशेष स्कूल रहा। यहाँ सुबह से ही एक अनूठा और प्रेरणादायक वातावरण देखने को मिला। जिले के विभिन्न कोनों से आए विशेष विद्यालयों के बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही चमक और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था। इस आयोजन में दीक्षा निकेतन विशेष स्कूल एवं छात्रावास के साथ-साथ उम्मीद शिक्षण समिति विशेष स्कूल, आकांक्षा स्पेशल स्कूल और सी.डब्ल्यू.एस.एन. छात्रावास के दिव्यांग छात्र-छात्राएं तथा उनके मार्गदर्शन में समर्पित विषय विशेषज्ञ स्टॉफ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
गरिमामयी उपस्थिति और दीप प्रज्जवलन के साथ शुभारंभ
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुश्री आयुषि गुप्ता, डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी उपसंचालक, सामाजिक न्याय विभाग विदिशा द्वारा गरिमामयी तरीके से माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पूजन के साथ किया गया। उनके साथ कार्यक्रम में स्वास्थ्य, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय विदिशा से डॉ. शोलू कांत, एडवोकेट मनु श्रीवास्तव, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी श्रीमती मालती लोधी, श्रीमती नेहा सिंह और श्री महेश कुशवाह विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा सामाजिक न्याय विभाग एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र विदिशा के तमाम अधिकारी और कर्मचारी भी पूरी तन्मयता के साथ इस आयोजन का हिस्सा बने। दीक्षा निकेतन विशेष स्कूल के संस्था प्रमुख श्री संजीव कुमार जैन तथा उम्मीद शिक्षण समिति के श्री निरंजन लोधी सहित विभिन्न संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों एवं स्टॉफ ने भी अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।
रंगोली एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई अद्भुत रचनात्मकता
अंतर्राष्ट्रीय साइन लैंग्वेज दिवस के इस पावन अवसर पर दिव्यांग छात्र-छात्राओं की बौद्धिक क्षमता, कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक कौशल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न रोचक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने रंगोली एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी असीम कल्पनाशीलता व कला का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागी विद्यार्थियों ने बेहद आकर्षक, रंग-बिरंगी और संदेशपरक रंगोली तथा पेंटिंग्स तैयार कीं। बच्चों की कलाकृतियों को देखकर कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षकों ने उनके हुनर की खुले दिल से सराहना की। इन प्रतियोगिताओं ने यह साबित कर दिया कि शारीरिक और श्रवण संबंधी बाधाएं यदि मजबूत हौसला हो, तो किसी की रचनात्मकता की राह में कभी रोड़ा नहीं बन सकतीं।
प्रोत्साहन, उपहार वितरण और स्वल्पाहार की व्यवस्था
विद्यार्थियों के मनोबल को और अधिक ऊँचा उठाने के लिए प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम के दौरान आकर्षक उपहार और प्रशस्ति प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रमाण-पत्र और उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और उनका आत्मविश्वास दोगुना हो गया। इसके साथ ही, कार्यक्रम में उपस्थित सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और मेहमानों के लिए बेहतरीन स्वल्पाहार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी, जिससे सभी ने इस सामाजिक उत्सव का आनंद लिया।
सांकेतिक भाषा के महत्व और मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश
इस संपूर्ण आयोजन के माध्यम से समाज को एक बहुत ही मजबूत और सकारात्मक संदेश दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय साइन लैंग्वेज दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों, विशेषकर श्रवण बाधितों के लिए संचार (कम्युनिकेशन), गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक सहभागिता और समान अवसरों के महत्व को रेखांकित करना था।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजनों का मूल लक्ष्य न केवल दिव्यांग विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक खुला मंच देना है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा के साथ मजबूती से जोड़ना और उनके भीतर छिपे हुए आत्मविश्वास को अनंत ऊंचाइयों तक पहुँचाना है। विदिशा जिले में आयोजित यह कार्यक्रम दिव्यांग सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।
image source : https://vidisha.mpinfo.org
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