मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने तथा रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को शून्य तक पहुँचाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में विदिशा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय के सभागार में सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN) और समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) के अंतर्गत एक व्यापक जिला एक्शन रोडमैप लॉन्च किया गया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य विदिशा जिले में स्वास्थ्य सूचकांकों में अभूतपूर्व सुधार करना और हर गर्भवती महिला व नवजात शिशु को सुरक्षित जीवन प्रदान करना है।

 

कार्यशाला का आयोजन और तकनीकी प्रशिक्षण

जिला एक्शन रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विदिशा में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर पदस्थ चिकित्सा अधिकारियों (एमओ) तथा ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उपस्थित चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ तथा परिणाममूलक बनाने के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।

 

कार्यशाला के दौरान बताया गया कि विदिशा जिले में वर्तमान मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 150 है, जिसे आक्रामक रूप से घटाकर 70 से कम लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, वर्तमान नवजात मृत्यु दर (NMR) 29 को भी घटाकर 12 से नीचे लाने का कठिन लेकिन अत्यंत आवश्यक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गर्भावस्था के शुरुआती चरणों से लेकर प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि तक जच्चा-बच्चा की सतत निगरानी पर जोर दिया गया है। साथ ही, हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उनके उचित उपचार और त्वरित रेफरल व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने की रणनीति बनाई गई है।

 

क्लिनिकल प्रोटोकॉल और विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विदिशा मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुधा चौरसिया तथा डॉ. प्रमोद मिश्रा ने चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (HRPW) की समय रहते पहचान करने के तौर-तरीकों पर प्रकाश डाला।

 

इसके अलावा, प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) और एक्लम्पसिया जैसी गंभीर एवं आपातकालीन प्रसूति जटिलताओं को शुरुआती दौर में ही भांपने और उसका त्वरित उपचार करने के संबंध में कड़े दिशा-निर्देश दिए गए। विशेषज्ञों ने बल देते हुए कहा कि गंभीर मामलों में निर्धारित क्लिनिकल और रेफरल प्रोटोकॉल का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए। मरीज को बिना किसी अनावश्यक विलंब के समय पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान तक पहुँचाया जाए। साथ ही, अस्पतालों के लेबर रूम में संक्रमण नियंत्रण के तय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

 

गर्भावस्था पूर्व स्वास्थ्य जांच और हाई-रिस्क महिलाओं की ट्रैकिंग

नए जिला एक्शन रोडमैप में गर्भावस्था पूर्व (Pre-conception) स्वास्थ्य जांच को एक मुख्य घटक बनाया गया है। इसके तहत विदिशा जिले की 15 वर्ष से अधिक उम्र की किशोरियों में पोषण स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ गर्भाधान पूर्व एनीमिया (खून की कमी) और ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की नियमित जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाले संभावित जोखिमों की पहले ही पहचान कर लेना है, ताकि समय रहते आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। विदिशा जिले में हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग तैयार कर उनकी निरंतर निगरानी की जाएगी। ऐसी महिलाओं के सुरक्षित एवं समय पूर्व संस्थागत प्रसव के लिए पुख्ता योजना बनाई जाएगी। दूरस्थ तथा दुर्गम क्षेत्रों में निवास करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यकतानुसार 'बर्थ वेटिंग होम' की सुविधा का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे प्रसव के वक्त उन्हें स्वास्थ्य संस्थान तक पहुँचने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

 

प्रसव के उपरांत 48 घंटे तक जच्चा-बच्चा की अनिवार्य निगरानी

रोडमैप के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रसव के उपरांत जच्चा और बच्चा दोनों को कम से कम 48 घंटे तक स्वास्थ्य केंद्र पर अनिवार्य रूप से चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान संक्रमण, प्रसवोत्तर रक्तस्राव तथा नवजात शिशु से जुड़ी अन्य संभावित स्वास्थ्य जटिलताओं की समय रहते पहचान करके उनका प्रभावी उपचार किया जा सकेगा, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को सीधे तौर पर नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

 

24×7 सुमन हेल्पडेस्क और 'सुमन पंचायत' की अनूठी पहल

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता के लिए पूरी तरह सुलभ बनाने के लिए विदिशा जिले में 24×7 सुमन हेल्पडेस्क का संचालन शुरू किया गया है। इसके लिए विशेष हेल्पडेस्क नंबर 7400650171 एवं 8103539549 जारी किए गए हैं, जिन पर किसी भी समय सहायता प्राप्त की जा सकती है।

 

इसके अतिरिक्त, विदिशा जिले में एक प्रेरक पहल के तहत शून्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर दर्ज करने वाली ग्राम पंचायतों को 'सुमन पंचायत' के रूप में प्रमाणित किया जाएगा। इस पहल से ग्राम स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता में वृद्धि होगी, निगरानी तंत्र मजबूत होगा और जनभागीदारी को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।

 

कैशलेस डिलीवरी और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कड़े निर्देश

कार्यशाला के अंत में सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि विदिशा जिले के प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव सेवाओं को उच्च गुणवत्तापूर्ण और पूरी तरह निर्बाध बनाया जाए। हर पात्र हितग्राही को कैशलेस डिलीवरी की सुविधा के साथ-साथ सभी आवश्यक दवाएं, निःशुल्क जांच तथा सुगम परिवहन सुविधा समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए।

 

स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग करते हुए गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को त्वरित उपचार देने की हिदायत दी गई। अधिकारियों ने जिला एक्शन रोडमैप के सभी लक्ष्यों को शत-प्रतिशत प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं के स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें करने, हाई-रिस्क महिलाओं की सटीक ट्रैकिंग करने और संपूर्ण रेफरल व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की।

 

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