बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर कृषि विभाग पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ गया है। विभाग ने इस बार पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और किफायती तकनीकों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। इसी कड़ी में, 26 मई को आत्मा परियोजना कार्यालय, बालाघाट में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले की सक्रिय 'कृषि सखियों' को धान की आधुनिक तकनीक, 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (डीएसआर), अर्थात धान की सीधी बुवाई के वैज्ञानिक तरीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था।
बालाघाट जिले में 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक खेती का लक्ष्य
खरीफ सीजन की तैयारियों को सुदृढ़ करने और किसानों को लाभान्वित करने के लिए कृषि विभाग ने कृषि सखियों के माध्यम से एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। विभाग की योजना है कि इस सीजन में जिले के एक बड़े हिस्से को आधुनिक खेती के दायरे में लाया जाए। प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उपसंचालक कृषि श्री फूल सिंह मालवीय ने इस योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि विभाग इस खरीफ सीजन में जिले के 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को डीएसआर तकनीक के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस महात्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिले में कार्यरत 100 कृषि सखियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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जिम्मेदारी का वितरण: विभाग ने प्रत्येक कृषि सखी को यह लक्ष्य दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कम से कम 50 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई करवाने के लिए प्रेरित करें और उनकी मदद करें।
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वैज्ञानिक पद्धति का प्रसार: कृषि सखियां इस खरीफ सीजन में कृषि विभाग और किसानों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेंगी। वे किसानों को डीएसआर तकनीक के फायदों से अवगत कराएंगी और बुवाई की वैज्ञानिक प्रक्रिया में उनकी सहायता करेंगी।
पारंपरिक खेती पर डीएसआर तकनीक के किफायती और उपयोगी फायदे
अपने संबोधन में, उपसंचालक कृषि श्री फूल सिंह मालवीय ने पारंपरिक रोपा पद्धति और आधुनिक डीएसआर तकनीक के बीच का अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने वैज्ञानिक तर्कों और व्यावहारिक लाभों के माध्यम से डीएसआर तकनीक को अधिक किफायती और उपयोगी साबित किया। श्री मालवीय ने कहा कि वर्तमान समय में, जब कृषि लागत बढ़ रही है और जल संसाधन सीमित हो रहे हैं, तब डीएसआर तकनीक किसानों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है।
डीएसआर तकनीक के मुख्य लाभ:
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कम पानी की आवश्यकता: पारंपरिक रोपा पद्धति में खेत को पहले पानी से भरना पड़ता है (कदो करना), जिसके लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, डीएसआर पद्धति में धान की सीधे बुवाई की जाती है, जिससे सिंचाई की आवृत्ति कम हो जाती है और पानी की महत्वपूर्ण बचत होती है।
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कम श्रम और लागत: रोपा पद्धति में नर्सरी तैयार करना, पौधों की उखाड़ना और फिर उनकी रोपाई करना, एक श्रम-साध्य प्रक्रिया है। डीएसआर तकनीक में इन सभी चरणों को छोड़ दिया जाता है, जिससे मजदूरी की लागत में भारी कमी आती है।
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जल संरक्षण और भू-जल स्तर: श्री मालवीय ने जल संरक्षण की दृष्टि से भी डीएसआर तकनीक के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कम पानी के उपयोग के कारण यह तकनीक भू-जल स्तर को बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो रही है, जो भविष्य की खेती के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कृषि सखियों को मिला वैज्ञानिक बुवाई और आधुनिक यंत्रों का प्रशिक्षण
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान कृषि सखियों को डीएसआर पद्धति के हर पहलू की विस्तृत और वैज्ञानिक जानकारी दी। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना था कि कृषि सखियां किसानों को सही और सटीक जानकारी दे सकें।
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खेत की तैयारी और बीज उपचार: कृषि सखियों को बताया गया कि डीएसआर के लिए खेत को किस प्रकार तैयार किया जाना चाहिए, ताकि अंकुरण बेहतर हो। साथ ही, बीज उपचार (Seed Treatment) के महत्व और प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
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उन्नत बीज किस्मों का चयन: प्रशिक्षण में डीएसआर के लिए उपयुक्त उन्नत बीज किस्मों के चयन पर विशेष जोर दिया गया। सही बीज का चयन अच्छी फसल के लिए आधारभूत है।
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संतुलित उर्वरक और खरपतवार नियंत्रण: फसल के बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग (Balanced Fertilizer Use) और प्रभावी खरपतवार नियंत्रण (Weed Control) की वैज्ञानिक जानकारी दी गई। खरपतवार नियंत्रण डीएसआर पद्धति में एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक और एकीकृत तरीकों के बारे में बताया।
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आधुनिक कृषि यंत्रों का व्यावहारिक प्रशिक्षण: कार्यक्रम में न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी गई, बल्कि कृषि सखियों को 'सुपर सीडर' जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों (Modern Farm Equipment) के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। सुपर सीडर के माध्यम से बिना कदो किए, सीधे बुवाई और उर्वरक एक साथ दिया जा सकता है।
कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की अपील
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, कृषि सखियों ने डीएसआर तकनीक से जुड़े अपने विभिन्न प्रश्नों और संशयों को विशेषज्ञों के सामने रखा, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में, कृषि विभाग ने बालाघाट जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे इस खरीफ सीजन में आधुनिक और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। विभाग ने विश्वास जताया कि डीएसआर तकनीक जैसी आधुनिक पद्धतियों को अपनाकर ही कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, किसानों को शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। कृषि विभाग की यह पहल बालाघाट जिले में आधुनिक खेती की दिशा में एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।
Image source: https://balaghat.mpinfo.org

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