मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच धान उत्पादन की एक आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धति, 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (DSR) यानी सीधी बिजाई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक न केवल कृषि के आधुनिकीकरण पर केंद्रित थी, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण आधारित टिकाऊ खेती को धरातल पर उतारना था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उपसंचालक कृषि श्री फूल सिंह मालवीय ने की, जिसमें जिले भर के कृषि विशेषज्ञों, विभागीय अधिकारियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
डीएसआर तकनीक: आधुनिक कृषि का भविष्य
बैठक में डब्ल्यूआरआई (WRI India) की शोधकर्ता सुश्री नूपुर कुलकर्णी और शिवांगी अरविंद ने डीएसआर तकनीक के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों के अनुसार, धान की पारंपरिक रोपाई पद्धति की तुलना में डीएसआर तकनीक कहीं अधिक लाभकारी है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
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जल संरक्षण: इस तकनीक में धान की सीधी बुवाई की जाती है, जिससे नर्सरी तैयार करने और रोपाई के समय होने वाली पानी की भारी खपत में बड़ी बचत होती है।
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श्रम लागत में कमी: पारंपरिक विधि में मजदूरों की आवश्यकता अधिक होती है, जबकि डीएसआर तकनीक में बुवाई मशीनीकृत होने से श्रम लागत में काफी कमी आती है।
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उत्पादन क्षमता: वैज्ञानिक विधियों के पालन से फसल की पैदावार में वृद्धि संभव है, जो किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक है।
बालाघाट में डीएसआर के प्रभावी क्रियान्वयन की कार्ययोजना
बैठक में बालाघाट जिले के सभी विकासखंडों के डीएसआर नोडल अधिकारियों और कृषि विस्तार अधिकारियों को तकनीक के प्रभावी प्रचार-प्रसार हेतु प्रशिक्षित किया गया। डब्ल्यूआरआई (WRI India) के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की गई है, ताकि प्रत्येक किसान तक इस तकनीक की जानकारी पहुंच सके। बैठक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे:
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प्रदर्शन कार्यक्रम: आत्मा योजना के अंतर्गत जिले में 240 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान स्वयं इस तकनीक के परिणाम देख सकें।
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विस्तार का लक्ष्य: कृषि सखी के माध्यम से 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में डीएसआर तकनीक के विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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संसाधन उपलब्धता: किसानों को तकनीक अपनाने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए कस्टम हायरिंग सेंटर पर आवश्यक कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
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निजी क्षेत्र का सहयोग: बैठक में 'Savanna Seeds' के प्रतिनिधि रितेश सिंह ने तकनीकी पहलुओं और बीज प्रबंधन के बारे में जानकारी दी, वहीं 'प्रदान' संस्था के रूपेश ने किसानों के व्यक्तिगत अनुभवों और व्यवहारिक चुनौतियों पर चर्चा की।
अधिकारियों को जिम्मेदारी और जवाबदेही
उपसंचालक कृषि श्री फूल सिंह मालवीय ने बैठक में उपस्थित कृषि विस्तार अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में डीएसआर के तहत आने वाला रकबा (क्षेत्रफल) निर्धारित करें। उन्होंने कहा कि तकनीक के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों का त्वरित समाधान करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। प्रत्येक विस्तार अधिकारी को 'पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेस' (Package of Practices) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
किसानों के लिए संदेश: कम लागत, अधिक उत्पादन
बैठक के समापन पर विशेषज्ञों ने बालाघाट के किसानों से अपील की कि वे बदलती जलवायु और घटते जल स्तर को देखते हुए परंपरागत खेती से हटकर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं। यह तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि कम लागत में अधिक लाभ प्रदान करती है। कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगामी खरीफ सीजन में डीएसआर को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से प्रत्येक गांव तक आधुनिक कृषि ज्ञान पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
बालाघाट जिले में कृषि विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम भविष्य में राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। जल संरक्षण और धान उत्पादन में यह नई क्रांति न केवल बालाघाट के किसानों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि टिकाऊ कृषि की दिशा में भी एक बड़ा और प्रभावशाली कदम साबित होगी।
Image Source: https://balaghat.mpinfo.org
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