बालाघाट जिले में कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की समस्याओं को जड़ से समाप्त करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) में अब ई-टोकन के माध्यम से खाद वितरण की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है। इस नई डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है, बल्कि उन किसानों को लंबी लाइनों और घंटों की प्रतीक्षा से राहत दिलाना है, जो हर सीजन में खाद के लिए सहकारी समितियों के चक्कर काटते थे।

डिजिटल तकनीक से बदलेगी किसानों की तस्वीर

बालाघाट जिले के कलेक्टर मृणाल मीना के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह व्यवस्था जिले के किसानों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। जिले में सहकारी समितियों, विपणन संघ के गोदामों, एमपी एग्रो और निजी खाद विक्रेताओं के माध्यम से खाद वितरण को अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। ई-टोकन प्रणाली लागू होने के बाद, खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल हो गई है, जिससे बिचौलियों और कालाबाजारी की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

कार्यशाला के माध्यम से किसानों को दी गई जानकारी

हाल ही में बालाघाट स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स) कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों को इस ई-टोकन प्रणाली की बारीकियों से अवगत कराया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर कृषि विभाग से श्री विकास चौधरी, जिला सहकारी बैंक मुख्यालय से श्री अमरेश परिहार सहित समिति के समर्पित कर्मचारी जिया लाल लिल्हारे, योगेश डहरवाल और खाद विक्रेता श्री खजरे जी उपस्थित रहे।

अधिकारियों द्वारा किसानों को कंप्यूटर के माध्यम से 'लाइव ई-टोकन बुकिंग' की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने मौके पर ही डिजिटल टोकन जनरेट करके दिखाया, ताकि किसानों को किसी प्रकार का भ्रम न रहे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया बेहद सरल है और इसे अपनाकर किसान अपना कीमती समय बचा सकते हैं।

ई-टोकन व्यवस्था के प्रमुख लाभ:

समिति के कर्मचारियों और अधिकारियों ने इस नई व्यवस्था के कई लाभों पर प्रकाश डाला है:

  • समय की बचत: किसानों को अब खाद लेने के लिए तड़के सुबह से कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। वे टोकन में दिए गए निर्धारित समय पर पहुंचकर खाद प्राप्त कर सकते हैं।

  • पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया कंप्यूटराइज्ड होने के कारण, किस किसान को कितनी खाद मिली, इसका पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा।

  • कालाबाजारी पर रोक: खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर अंकुश लगाने में यह डिजिटल टोकन प्रणाली अत्यंत कारगर साबित होगी।

  • सटीक उपलब्धता: वास्तविक जरूरतमंद किसानों की पहचान आसान हो जाएगी, जिससे प्रत्येक किसान को उसकी आवश्यकता के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध हो सकेगी।

किसानों का सकारात्मक रुख

इस नई व्यवस्था को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला। किसानों का कहना है कि वर्षों से खाद वितरण के समय उन्हें भीषण गर्मी और बारिश में लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था, जिससे उनका न केवल शारीरिक शोषण होता था, बल्कि खेती के अन्य कार्यों का भी नुकसान होता था। ई-टोकन व्यवस्था को उन्होंने एक दूरदर्शी और किसान-हितैषी पहल बताया है। बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और प्रशासन की इस तकनीक-आधारित सोच की सराहना की।

प्रशासन का संकल्प और भविष्य की योजनाएं

जिला प्रशासन बालाघाट का मानना है कि कृषि और तकनीक का मेल ही किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें सशक्त बनाने का एकमात्र मार्ग है। ई-टोकन की यह सुविधा न केवल पैक्स समितियों तक सीमित रहेगी, बल्कि आने वाले समय में जिले के अन्य वितरण केंद्रों पर भी इसे और अधिक विस्तार दिया जाएगा। खाद की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों ने समिति प्रबंधकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे डिजिटल रिकॉर्ड का सही रखरखाव करें और किसी भी किसान को टोकन प्राप्ति में समस्या न होने दें।

निष्कर्ष

बालाघाट की पैक्स समितियों में ई-टोकन का प्रारंभ होना जिले के कृषक समुदाय के लिए एक मील का पत्थर है। यह न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, बल्कि 'डिजिटल इंडिया' के सपने को जमीनी स्तर पर साकार भी कर रहा है। प्रशासन, बैंक के अधिकारियों और समिति के कर्मचारियों का यह समन्वित प्रयास जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें हर संभव सुविधा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उम्मीद की जा रही है कि इस सत्र में खाद वितरण में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था देखने को नहीं मिलेगी और किसान बिना किसी बाधा के अपनी फसलों के लिए समय पर खाद प्राप्त कर सकेंगे।

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