प्रस्तावना एवं अभियान का उद्देश्य

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की चिकित्सीय जटिलताओं से बचाने, समय रहते उनका सही उपचार सुनिश्चित करने और सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए केंद्र सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल के रूप में 'प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान' का संचालन किया जाता है। नियमानुसार प्रतिमाह की 9 और 25 तारीख को देश भर के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर इस विशेष अभियान के तहत शिविरों का आयोजन किया जाता है।

इसी क्रम में मंगलवार को बैतूल जिलेभर में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य शिविरों का भव्य और व्यापक आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े ने इस अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में आयोजित इन शिविरों के माध्यम से कुल 837 गर्भवती महिलाओं की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें से 404 महिलाओं को 'हाई रिस्क' (उच्च जोखिम श्रेणी) के रूप में चिन्हित किया गया। इसके साथ ही, इस दौरान कुल 63 महिलाओं की सोनोग्राफी भी सफलतापूर्वक संपन्न की गई।

स्वास्थ्य शिविरों में की जाने वाली प्रमुख जांचें

गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का संपूर्ण आकलन करने के उद्देश्य से आयोजित इन शिविरों में कई प्रकार की महत्वपूर्ण चिकित्सा जांचेंनिशुल्क और प्राथमिकता के आधार पर की गईं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े के मार्गदर्शन में आयोजित इन शिविरों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण: शिविर में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला का स्त्री रोग विशेषज्ञों और योग्य चिकित्सा अधिकारियों द्वारा गहन शारीरिक व चिकित्सीय परीक्षण किया गया।

  • रक्त जांच (ब्लड टेस्ट): महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी (एनीमिया) और अन्य रक्त संबंधी समस्याओं का पता लगाने के लिए खून की सघन जांच की गई।

  • जीडीएम (गर्भाकालीन मधुमेह) की जांच: गर्भावस्था के दौरान होने वाली मधुमेह की समस्या (Gestational Diabetes Mellitus) की पहचान करने के लिए विशेष रूप से जीडीएम की जांच की गई, ताकि समय रहते उचित आहार और दवाइयों के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सके।

  • सोनोग्राफी सुविधाएं: जरूरत के अनुसार गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी की गई, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और स्वास्थ्य की सटीक स्थिति का पता चल सके।

बैतूल जिला चिकित्सालय में आयोजित शिविर का विवरण

जिला मुख्यालय पर स्थित जिला चिकित्सालय बैतूल में आयोजित मुख्य शिविर में महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस शिविर की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • चिकित्सक की भूमिका: जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ स्त्री रोग चिकित्सक डॉ. संचिता उइके द्वारा अपनी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान की गईं।

  • जांच के आंकड़े: डॉ. संचिता उइके द्वारा कुल 78 गर्भवती महिलाओं का चिकित्सीय परीक्षण किया गया।

  • हाई रिस्क मामले: परीक्षण के दौरान 8 गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी के अंतर्गत चिन्हित किया गया, जिन्हें विशेष देखभाल और निरंतर निगरानी में रखा गया है।

  • सोनोग्राफी सेवाएं: जिला चिकित्सालय के इस विशेष शिविर में कुल 63 महिलाओं की सोनोग्राफी की गई, जिससे उन्हें केंद्र पर ही आधुनिक जांच की सुविधा मिल सकी।

सामुदायिक एवं सिविल अस्पतालों में आयोजित शिविरों की रिपोर्ट

बैतूल जिले के विभिन्न ब्लॉकों, तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर भी इस अभियान के तहत बड़े पैमाने पर शिविर लगाए गए। विभिन्न केंद्रों पर महिला चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों द्वारा की गई जांचों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आठनेर: यहां महिला चिकित्सक डॉ. अंकिता बास्कले द्वारा कुल 72 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से 35 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी की पाई गईं।

  • सिविल अस्पताल आमला: इस अस्पताल में बीएमओ डॉ. प्रदीप जयंत एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश बचले की संयुक्त टीम ने कुल 35 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें 7 हाई रिस्क महिलाएं चिन्हित की गईं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर: स्त्री रोग चिकित्सक डॉ. महिमा सिंह द्वारा शाहपुर केंद्र पर 71 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई और इनमें से 38 महिलाओं को हाई रिस्क के रूप में दर्ज किया गया।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुलताई: मुलताई में महिला चिकित्सक डॉ. सरिता कालभोर द्वारा कुल 71 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच संपन्न हुई, जिनमें 38 महिलाएं हाई रिस्क पाई गईं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेहरा: इस केंद्र पर स्त्री रोग चिकित्सक डॉ. कविता सिमैया ने सबसे अधिक 117 गर्भवती महिलाओं की जांच की, जिसमें से 37 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी के अंतर्गत आईं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभात पट्टन: महिला चिकित्सक डॉ. सोनाली मरकाम द्वारा यहाँ 54 गर्भवती महिलाओं का परीक्षण किया गया और 42 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई।

  • चिचोली स्वास्थ्य केंद्र: चिचोली में महिला चिकित्सक डॉ. माधुरी अखंडे द्वारा 60 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से 46 महिलाएं हाई रिस्क पाई गईं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमपुर: भीमपुर केंद्र पर महिला चिकित्सक डॉ. तरूणा काकोडिया एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. रीकेश काकोडिया की टीम ने 144 गर्भवती महिलाओं का परीक्षण किया, जिसमें 59 हाई रिस्क महिलाएं चिन्हित की गईं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोगरी: यहाँ चिकित्सा अधिकारी डॉ. भोला खोडे द्वारा 86 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें 60 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई गईं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैंसदेही: भैंसदेही में महिला चिकित्सक डॉ. रेश्मा खान एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. बसीम खान द्वारा संयुक्त रूप से 49 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई और 34 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का उचित प्रबंधन किया गया।

अभियान का मूल उद्देश्य और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को प्रसव पूर्व स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यक जांचों, उच्च स्तरीय चिकित्सकीय परीक्षण और सही परामर्श का लाभ मिल सके।

विशेष तौर पर उन महिलाओं की पहचान करना जो किसी चिकित्सीय जटिलता के कारण 'हाई रिस्क' श्रेणी में आती हैं, इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाई रिस्क महिलाओं का समय पर उचित प्रबंधन करने से प्रसव के दौरान आने वाली आपातकालीन स्थितियों को टाला जा सकता है। स्वास्थ्य प्रशासन का मुख्य लक्ष्य इन सभी उपायों के माध्यम से मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) और शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) को न्यूनतम स्तर तक लाना है, ताकि हर जननी और शिशु का स्वास्थ्य पूरी तरह सुरक्षित रह सके।

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