प्रस्तावना एवं आयोजन की रूपरेखा
आम नागरिकों की समस्याओं का समय पर और प्रभावी निराकरण करने के उद्देश्य से शासन-प्रशासन लगातार प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में कटनी जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मंगलवार, 25 अगस्त को एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के स्पष्ट निर्देशों के तहत आयोजित इस जनसुनवाई में जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पीड़ित एवं अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे आवेदक शामिल हुए। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी गंभीरता के साथ नागरिकों की बातों को सुना और संबंधित विभागों को उनके न्यायसंगत समाधान हेतु कड़े निर्देश दिए।
जनसुनवाई में प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति
कटनी में आयोजित इस जनसुनवाई को सुचारू रूप से संचालित करने और प्रत्येक नागरिक की समस्या को उच्च प्राथमिकता देने के लिए जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मौजूद रहे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान निम्नलिखित प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहकर आवेदकों की समस्याएं सुनते रहे:
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श्री आशीष तिवारी: कलेक्टर, कटनी (जिनके समग्र निर्देशन में यह जनसुनवाई संपन्न हुई)।
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सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर: जिला पंचायत सीईओ, कटनी।
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श्री जितेन्द्र पटेल: एसडीएम, कटनी।
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श्री श्लोक वायकर: सहायक कलेक्टर, कटनी।
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श्री प्रमोद चतुर्वेदी: डिप्टी कलेक्टर, कटनी।
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विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी: जिले के अन्य प्रमुख विभागों के मैदानी एवं जिला स्तरीय अधिकारी भी इस दौरान मौजूद रहे ताकि तत्काल प्रभाव से प्रकरणों पर संज्ञान लिया जा सके।
विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 172 आवेदकों की समस्याएं
मंगलवार को आयोजित इस जनसुनवाई में कुल 172 आवेदकों ने अपने-अपने आवेदन प्रस्तुत किए। जिले के विभिन्न कोनों से आए इन नागरिकों की समस्याएं स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, राजस्व, बिजली, और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी हुई थीं। जनसुनवाई में प्रस्तुत किए गए प्रमुख मामलों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
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आयुष्मान कार्ड में नाम जोड़ने का आवेदन: ग्राम चनेहटा निवासी श्यामलाल यादव ने जनसुनवाई में पहुंचकर अपना आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने अपने परिवार या स्वयं का नाम आयुष्मान कार्ड सूची में जोड़े जाने की गुहार लगाई ताकि आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
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ट्रांसफार्मर बदलवाने की मांग: ग्राम केलवारा की निवासी उर्मिला दाहिया ने बिजली व्यवस्था से जुड़ी समस्या रखी। उन्होंने खराब पड़े ट्रांसफार्मर को जल्द से जल्द बदलवाने का अनुरोध किया ताकि ग्रामीणों को बिजली कटौती या आपूर्ति की समस्या का सामना न करना पड़े।
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अतिथि शिक्षक की नियुक्ति संबंधी प्रकरण: ग्राम धूरी के रहने वाले राजेन्द्र चौधरी ने जनसुनवाई में आवेदन देते हुए अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्ति दिलाए जाने की मांग प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखी।
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गेहूं विक्रय राशि का भुगतान: ग्राम लखनपुरा निवासी राजेश सिंह ने अपनी उपज से जुड़ा गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने शासन या उपार्जन केंद्र पर बेचे गए गेहूं की विक्रय राशि का बकाया भुगतान जल्द से जल्द दिलाए जाने का अनुरोध किया।
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भू-नक्शा सुधार में विलंब: ग्राम बिचुआ निवासी हरीशंकर दुबे ने राजस्व विभाग से जुड़ा आवेदन दिया। उन्होंने शिकायत की कि उनके भू-नक्शा सुधार के आवेदन पर अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है, जिस कारण उन्हें परेशानी हो रही है।
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कीचड़युक्त रास्ते पर मुरम डलवाने की मांग: ग्राम हीरापुर कौडिया के समस्त ग्रामवासियों ने एकजुट होकर सामूहिक आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने गांव के मुख्य मार्ग पर फैले कीचड़युक्त रास्ते से निजात दिलाने के लिए वहां मुरम डलवाने और रास्ता सुधारने की मांग की।
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संबल योजनांतर्गत अनुग्रह सहायता राशि: ग्राम बड़ागांव निवासी सनी सोनी ने अत्यंत संवेदनशील मामला रखते हुए बताया कि उनके पिता दिवंगत पूरन लाल सोनी की मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने शासन की लोकप्रिय संबल योजना के तहत मिलने वाली अनुग्रह सहायता राशि तत्काल दिलाए जाने का निवेदन किया।
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बिजली बिल कम या माफ कराने का आवेदन: ग्राम बनगवां निवासी रमेश चौधरी ने भारी-भरकम बिजली बिल से राहत पाने के लिए आवेदन दिया, जिसमें बिल को कम करने अथवा माफ कराने का अनुरोध किया गया।
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आवास योजना का लाभ: ग्राम अमीरगंज निवासी जावेद मंसूरी ने प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य ग्रामीण/शहरी आवास योजना का लाभ दिलाए जाने के संबंध में अपना आवेदन अधिकारियों को सौंपा।
इन चुनिंदा मामलों के अलावा भी दर्जनों अन्य नागरिकों ने अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिन पर तुरंत उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के कड़े निर्देश और प्रशासनिक दृष्टिकोण
जनसुनवाई के दौरान प्राप्त हुए सभी 172 आवेदनों को देखने के बाद कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने सभी उपस्थित अधिकारियों को बहुत स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में आने वाले आवेदन केवल एक औपचारिकता या कागजी खानापूर्ति बनकर नहीं रह जाने चाहिए, बल्कि प्रत्येक प्रकरण के न्यायसंगत और स्थायी समाधान की दिशा में जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
कलेक्टर ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि किसी भी आम नागरिक को अपनी छोटी या बड़ी समस्या के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन की यह नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों की समस्याओं को पूरी गंभीरता से ले और निर्धारित समय-सीमा के भीतर उन्हें राहत उपलब्ध कराए।
इसके साथ ही, उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों से जुड़े लंबित प्रकरणों की नियमित रूप से समीक्षा करें। जनसुनवाई में आने वाले आवेदनों के निराकरण की सतत मॉनिटरिंग की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के पात्र वास्तविक हितग्राहियों को किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े।
image source: https://katni.mpinfo.org
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