प्रस्तावना एवं रक्षाबंधन पर्व की पृष्ठभूमि

रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस पावन पर्व को केवल परिवार तक सीमित न रखते हुए, इसे सामाजिक सरोकारों, पर्यावरण संरक्षण और देशप्रेम की भावनाओं के साथ जोड़ना एक अनूठी मिसाल पेश करता है। इसी प्रेरणादायक सोच के तहत सतना जिले में एक बेहद सुंदर और दिल को छू लेने वाली पहल देखने को मिली है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय श्यामनगर छात्रावास की प्रतिभावान और सृजनशील बालिकाओं ने रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर अपनी कला और रचनात्मकता का परिचय देते हुए न केवल जिला प्रशासन के मुखिया को राखी बांधी, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों के लिए भी अपने हाथों से बनी राखियां भेजीं। यह आयोजन सतना जिला मुख्यालय पर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में संपन्न हुआ, जहां बालिकाओं के उत्साह और उमंग ने सभी का मन मोह लिया।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस को बांधी राखी

मंगलवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय श्यामनगर छात्रावास की छात्राएं भारी उत्साह के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचीं। इन बालिकाओं ने सतना जिले के कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से मुलाकात की और उनके कलाई पर अपने स्वयं के हाथों से तैयार की गई आकर्षक एवं सुंदर राखियां बांधीं।

कलेक्टर साहब ने भी बालिकाओं के इस स्नेह और उनकी रचनात्मकता की भरपूर सराहना की। उन्होंने बालिकाओं से बातचीत करते हुए उनकी पढ़ाई-लिखाई, छात्रावास में मिलने वाली सुविधाओं और उनकी कला के बारे में जानकारी ली। प्रशासनिक मुखिया की कलाई पर बालिकाओं द्वारा बनाई गई इको-फ्रेंडली राखी बांधने का यह दृश्य बेहद आत्मीय और प्रेरणादायक था। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बालिकाओं के उज्जवल भविष्य की कामना की और उन्हें रक्षाबंधन पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

देश के वीर सैनिकों के लिए भेजी गईं स्वनिर्मित राखियां

रक्षाबंधन का यह पर्व उन बहादुर सैनिकों के बिना अधूरा माना जाता है जो अपने घर-परिवार से दूर रहकर कड़ाके की ठंड, चिलचिलाती धूप या कठिन परिस्थितियों में भी सरहद पर देश की रक्षा के लिए तैनात रहते हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय श्यामनगर की बालिकाओं ने इस भावना को गहराई से महसूस किया।

बालिकाओं ने केवल स्थानीय स्तर पर ही राखियां नहीं बांटीं, बल्कि देश की सरहद पर तैनात सेना के वीर जवानों के लिए भी बड़े प्रेम और आदर के साथ स्वनिर्मित राखियां तैयार कर भेजीं। इन राखियों के माध्यम से बालिकाओं ने सरहद के प्रहरियों को यह संदेश दिया कि पूरा देश उनके साथ है और उनकी लंबी उम्र तथा सुरक्षा की कामना करता है। बालिकाओं का यह देशभक्ति से परिपूर्ण कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश देने वाला रहा।

कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति

इस विशेष और प्रेरणादायक कार्यक्रम के दौरान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय श्यामनगर की बालिकाओं का मार्गदर्शन करने वाले और उनकी इस कला को बढ़ावा देने वाले कई प्रमुख अधिकारी एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख हस्तियों का विवरण इस प्रकार है:

  • डॉ. सतीश कुमार एस: कलेक्टर, सतना (जिनकी उपस्थिति में बालिकाओं ने कलेक्ट्रेट में यह कार्यक्रम संपन्न किया)।

  • श्रीमती नीलम कुशवाहा: सहायक परियोजना समन्वयक (जिनका मार्गदर्शन बालिकाओं को निरंतर प्राप्त होता है)।

  • श्रीमती चारुलेखा बढ़ोलिया: वार्डन, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय श्यामनगर (जिन्होंने बालिकाओं की रचनात्मक गतिविधियों का संचालन और नेतृत्व किया)।

  • छात्रावास की समस्त बालिकाएं: छात्रावास में रहने वाली अन्य सभी उत्साही छात्राएं जो इस ऐतिहासिक और आनंददायक पल का हिस्सा बनीं।

पर्यावरण हितैषी और बीज आधारित राखियों का विशेष महत्व

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय श्यामनगर छात्रावास की विशेषता यह है कि यहां की बालिकाएं केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यावहारिक रूप से पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी पूरी तरह जागरूक हैं। बताया गया है कि इस छात्रावास में पिछले दो वर्षों से लगातार बालिकाओं द्वारा पर्यावरण हितैषी (इको-फ्रेंडली) राखियां तैयार की जा रही हैं।

इन राखियों को बनाने के लिए किसी भी ऐसे हानिकारक पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाता जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए। बालिकाओं द्वारा वेस्ट मटेरियल (कबाड़ या बेकार पड़ी सामग्री) और विभिन्न प्रकार के पौधों के बीजों का उपयोग कर बहुत ही सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार की जाती हैं। इन बीज-युक्त राखियों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि त्यौहार के बाद इन्हें मिट्टी में दबाने से इनसे नए पौधे उग सकते हैं। इस प्रकार यह राखियां न केवल भाई-बहन के प्रेम को दर्शाती हैं, बल्कि प्रकृति के संवर्धन में भी अपना योगदान देती हैं।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में छात्रावास के अन्य उल्लेखनीय कार्य

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय श्यामनगर की बालिकाएं रक्षाबंधन के पर्व पर राखियां बनाने के अलावा भी पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्र में कई सराहनीय और अनुकरणीय कार्य कर रही हैं। उनके द्वारा किए जा रहे अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • पॉलीथिन मुक्त परिसर: बालिकाओं ने अपने पूरे छात्रावास परिसर को पूरी तरह से पॉलीथिन मुक्त (प्लास्टिक-फ्री) बना दिया है। वे स्वयं भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं करतीं और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करती हैं।

  • वेस्ट मटेरियल से इको ब्रिक्स का निर्माण: छात्रावास की छात्राओं द्वारा बेकार पड़ी प्लास्टिक की बोतलों और अन्य कचरे का सही उपयोग करते हुए 'इको ब्रिक्स' तैयार किए जा रहे हैं।

  • परिसर की क्यारियों की सजावट: वेस्ट मटेरियल और इको ब्रिक्स की मदद से तैयार की गई सामग्रियों का उपयोग छात्रावास परिसर की सुंदर क्यारियों को सजाने और संवारने में किया जा रहा है, जिससे पूरा परिसर हरा-भरा और आकर्षक दिखाई देता है।

प्रशासनिक सराहना और समाज के लिए प्रेरणा

सतना जिले के कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और अन्य अधिकारियों ने बालिकाओं की इस बहुमुखी प्रतिभा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और विशेषकर ग्रामीण अंचल से आने वाली ये बालिकाएं जिस प्रकार पर्यावरण संरक्षण, सृजनात्मकता और देशप्रेम का परिचय दे रही हैं, वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। प्रशासन की ओर से बालिकाओं को हरसंभव प्रोत्साहन देने का विश्वास दिलाया गया, ताकि वे भविष्य में और भी बेहतर कार्य कर सकें।

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