केसली में BSNL सेवाओं की बदहाली: उपभोक्ता परेशान, सुधार की मांग केसली (सागर): एक तरफ जहां सरकार देशभर में 5G नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी का प्रचार-प्रसार कर रही है, वहीं दूसरी ओर सागर जिले की केसली तहसील में BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) की सेवाएं वेंटिलेटर पर नजर आ रही हैं। यहां BSNL का नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सिग्नल के लिए भटक रहे उपभोक्ता केसली स्थित BSNL कार्यालय और टावर अब महज एक शोपीस बनकर रह गए हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि मोबाइल में सिग्नल आना किसी चमत्कार से कम नहीं है। नेटवर्क के बार-बार ठप हो जाने से न तो कॉल लग पाती हैं और न ही इंटरनेट चल पाता है। इस डिजिटल युग में कनेक्टिविटी की कमी से बैंकिंग, ऑनलाइन पढ़ाई और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले ग्रामीण बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
कार्यालय में अव्यवस्थाओं का अंबार उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि BSNL केसली के कार्यालय में सुविधाओं का घोर अभाव है। शिकायत दर्ज कराने गए उपभोक्ताओं को कोई जवाब देने वाला नहीं मिलता। कार्यालय में बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है और कर्मचारी नदारद रहते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं।
अधिकारियों की अनदेखी पड़ रही भारी स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस बदहाली की सूचना कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों की इस उदासीनता के कारण लोग अब BSNL का साथ छोड़कर निजी टेलीकॉम कंपनियों की ओर रुख करने को मजबूर हैं।
मुख्य समस्याएं एक नजर में: लगातार नेटवर्क डाउन: हफ्तों तक सिग्नल गायब रहना आम बात हो गई है। कॉल ड्रॉप: सिग्नल आने पर भी कॉल अपने आप कट जाते हैं। इंटरनेट की धीमी रफ्तार: 4G के जमाने में उपभोक्ताओं को 2G जैसी स्पीड भी नहीं मिल रही। अनदेखी: शिकायत दर्ज कराने के बावजूद तकनीकी सुधार नहीं किया जा रहा। लापरवाही से आम जनता परेशान BSNL की इस लापरवाही से न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि सरकारी कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो केसली क्षेत्र में सरकारी दूरसंचार सेवा पूरी तरह ठप हो सकती है।
उपभोक्ता का पक्ष:
"हम सालों से BSNL का सिम इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अब नेटवर्क न होने से फोन सिर्फ एक डिब्बा बनकर रह गया है। न अधिकारी सुनते हैं और न ही टावर ठीक किया जाता है। अगर व्यवस्था ठीक नहीं की गई तो हड़ताल की जाएगी" — अरविंद भायजी (स्थानीय ग्रामीण)
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