अज्ञात कारणों से लगी आग से घाना में मची अफरा-तफरी, किसानों की मेहनत खाक
केसली (सागर): केसली तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत घाना में आज अचानक खेतों में अज्ञात कारणों से भीषण आग लग गई, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आग ने तेजी से विकराल रूप धारण किया और एक खेत से दूसरे खेत में फैलने लगी। इस हादसे में किसानों की मेहनत से तैयार फसल के भारी नुकसान की आशंका है।
दूरी बनी बर्बादी का कारण: देवरी के भरोसे केसली
केसली में आगजनी की घटनाओं के दौरान संसाधनों की कमी सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आती है। तहसील मुख्यालय पर खुद की फायर ब्रिगेड न होने के कारण हर बार देवरी से दमकल गाड़ी बुलानी पड़ती है। केसली और देवरी के बीच की दूरी इतनी अधिक है कि दमकल वाहन के पहुंचने तक सब कुछ जलकर खाक हो चुका होता है। घाना की घटना में भी यही स्थिति देखने को मिली।
नेताओं की इच्छाशक्ति पर सवाल
- स्थानीय नेता मंचों से विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं देते।
- लंबे समय से फायर ब्रिगेड की मांग की जा रही है, लेकिन नतीजा "ढाक के वही तीन पात" रहा है।
- प्रशासनिक उदासीनता के कारण हर साल किसानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
"कुछ दिन पहले ही केसली के पास में भीषण आग से कई एकड़ फसल जल कर खाक हो गई थी। अगर प्रशासन ने उस समय सबक लिया होता, तो आज घाना के किसानों को यह दिन नहीं देखना पड़ता।" — स्थानीय नागरिक
प्रशासन के लचर रवैये से नाराजगी
हालिया घटनाओं ने प्रशासन की व्यवस्थाओं को उजागर कर दिया है। तहसील स्तर पर एक अदद दमकल वाहन की व्यवस्था न होना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। बार-बार होती आगजनी की घटनाओं के बावजूद जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान न देना आम जनता के प्रति उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
अब क्या कदम उठाएगा प्रशासन?
घाना में हुई आज की घटना ने एक बार फिर केसली की इस पुरानी मांग को हवा दे दी है। क्या अब प्रशासन नींद से जागेगा? क्या क्षेत्रीय नेताओं की कथनी और करनी का अंतर मिटेगा? यह देखना बाकी है। फिलहाल, किसान अपनी बर्बाद होती फसलों को देखकर केवल अपनी किस्मत और व्यवस्था को कोसने पर मजबूर हैं।

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