सिस्टम फेल या इंसानियत की मौत? स्कूटी पर शव… और डॉक्टर डिनर पर! 

सीधी मध्य प्रदेश 

STATE NEWS AI JOURNALIST SURAJ KUMAR 

सीधी। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरिया से जो तस्वीर सामने आई है, वह सिर्फ एक खबर नहीं—पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है। बुधवार रात करीब 12 बजे एक बुजुर्ग की मौत के बाद जो हुआ, उसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत खोलकर रख दी।

मृतक के बेटों का आरोप है कि उनके पिता को समय पर इलाज नहीं मिला, और लापरवाही के चलते उनकी जान चली गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती… मौत के बाद भी सिस्टम ने उनका साथ नहीं दिया।

👉 एंबुलेंस नहीं मिली।

👉 अस्पताल ने हाथ खड़े कर दिए।

👉 डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे।

मजबूरी ऐसी कि बेटों ने अपने पिता का शव स्कूटी पर रखा… और अंधेरी रात में घर की ओर निकल पड़े।

जब यह मंजर गांव पहुंचा—तो चीखों से सन्नाटा टूट गया। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल, पूरे इलाके में मातम… और सवाल सिर्फ एक—

क्या गरीब की जिंदगी और मौत की कोई कीमत नहीं?

ड्यूटी डॉक्टर संजय पटेल का बयान और भी चौंकाने वाला है—

“मैं डिनर पर गया था…”

❗ सवालों की आग:

क्या सरकारी अस्पतालों में अब ड्यूटी का मतलब “डिनर टाइम” हो गया है?

क्या एंबुलेंस सिर्फ कागजों में दौड़ती हैं?

क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा?

⚠️ यह घटना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता की जीती-जागती मिसाल है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सवाल हर गांव, हर अस्पताल में गूंजेगा।

👉 सीधी से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश को झकझोर सकती है।