शाजापुर जिले के नागरिकों को शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर, सुलभ, उच्च स्तरीय और समय पर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है। जिले की संवेदनशील और प्रशासनिक कार्यों में सख्त रुख के लिए जानी जाने वाली कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत और कमियों को जानने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर सुश्री बाफना ने बिना किसी पूर्व सूचना के स्थानीय डॉ. भीमराव अम्बेडकर जिला चिकित्सालय का औचक (आकस्मिक) निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न संवेदनशील वार्डों में भर्ती मरीजों की वास्तविक स्थिति देखी, उन्हें डॉक्टरों द्वारा दिए जा रहे उपचार का बारीकी से जायजा लिया और अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों व बाह्य ठेकेदारों पर तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की।
1. अस्पताल के हर छोटे-बड़े वार्ड और विंग का कलेक्टर ने स्वयं किया सघन मुआयना
कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने जिला अस्पताल परिसर के मुख्य भागों के साथ-साथ नवनिर्मित मातृ-शिशु चिकित्सालय (MCH) भवन की संपूर्ण व्यवस्थाओं का गहनता से निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल के लगभग सभी प्रमुख विभागों, संवेदनशील चिकित्सा इकाइयों और नवजात शिशुओं से जुड़े सुरक्षा क्षेत्रों को खुद परखा, जो इस प्रकार हैं:
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महिला एवं शिशु विंग: महिला वार्ड, बच्चा वार्ड, शिशु वार्ड, मदर वार्ड, पोस्ट नेटल वार्ड, पीएनजी वार्ड, चाईल्ड वार्ड तथा प्री एवं पोस्ट लेबर रूम।
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विशेष एवं गंभीर चिकित्सा इकाइयां: हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU), मुख्य ऑपरेशन थियेटर्स, स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU)।
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पोषण एवं आपातकालीन विभाग: कुपोषण निवारण के लिए संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC वार्ड) और चौबीसों घंटे चलने वाला इमरजेंसी (आपातकालीन) वार्ड।
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जांच एवं ओपीडी सेवाएं: आधुनिक पैथोलॉजी लैब, नेत्र विभाग और चिकित्सालय परिसर के भीतर बने डॉक्टरों के आधिकारिक कार्य कक्ष।
2. मरीजों की सुविधाओं को लेकर संवेदनशीलता: भोजन, नाश्ता और नए कूलरों के निर्देश
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सुश्री बाफना ने केवल कागजी फाइलों या प्रशासनिक दावों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि वे सीधे विभिन्न वार्डों के बेड पर भर्ती मरीजों और उनके साथ मौजूद परिजनों के पास पहुंचीं। उन्होंने मरीजों से स्नेहपूर्वक चर्चा कर उनके स्वास्थ्य लाभ की प्रगति पूछी और अस्पताल प्रबंधन की सुविधाओं पर सीधा फीडबैक लिया:
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गुणवत्तापूर्ण भोजन की उपलब्धता: कलेक्टर ने भर्ती मरीजों से उन्हें प्रतिदिन मिलने वाली भोजन सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा के संबंध में विस्तृत पूछताछ की। भोजन की स्थिति जानने के बाद उन्होंने मौके पर मौजूद आरएमओ (RMO) को कड़े निर्देश जारी किए कि वार्डों में भर्ती सभी मरीजों को पर्याप्त मात्रा में और पूरी तरह से पौष्टिक व शुद्ध भोजन उपलब्ध कराया जाए।
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नाश्ते में ताजे फलों का वितरण: मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उन्हें त्वरित रिकवरी देने के लिए उन्होंने नियमित भोजन के साथ-साथ नाश्ते के रूप में ताजे फल अनिवार्य रूप से वितरित करने के निर्देश दिए।
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भीषण गर्मी से बचाव के लिए नए कूलर: वर्तमान ग्रीष्म ऋतु (गर्मी के मौसम) के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर ने आदेश दिया कि अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों की सुविधा के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले नवीन (नए) कूलर तुरंत क्रय (खरीद) कर लगवाए जाएं, ताकि किसी भी मरीज को उमस या गर्मी के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।
3. लापरवाही पर चला प्रशासन का हंटर: बिना अनुमति गायब सिविल सर्जन और ठेकेदारों को कड़ा सबक
औचक निरीक्षण के दौरान चिकित्सालय प्रबंधन और निर्माण कार्यों में कई गंभीर खामियां, अव्यवस्थाएं और लापरवाही उजागर हुईं, जिस पर कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने गहरा क्षोभ और नाराजगी व्यक्त करते हुए मौके पर ही निम्नलिखित दंडात्मक व सुधारात्मक आदेश जारी किए:
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सिविल सर्जन का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश: निरीक्षण के समय जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन बिना किसी पूर्व सूचना, अनाधिकृत रूप से और बिना सक्षम अनुमति के अपने कर्तव्य से अनुपस्थित पाए गए। कलेक्टर ने इसे शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना। उन्होंने सिविल सर्जन को तत्काल 'कारण बताओ सूचना पत्र' (शो-कॉज नोटिस) जारी करने के साथ ही उनका एक दिवस का वेतन रोकने के सख्त निर्देश दिए।
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सफाई ठेकेदार पर भारी जुर्माना (फाइन): कलेक्टर जब मेटरनिटी विंग और विभिन्न वार्डों के महिला प्रसाधनों (शौचालयों) का निरीक्षण करने पहुंचीं, तो वहां अत्यधिक गंदगी और अव्यवस्था पाई गई। अस्पताल परिसर और शौचालयों में इस प्रकार की गंदगी पाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्होंने सफाई ठेकेदार पर तत्काल फाईन (जुर्माना) लगाने की दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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आरओ (RO) मशीन बंद होने पर नोटिस: चिकित्सालय में मरीजों के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने वाली आरओ मशीन बंद पाई गई। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने का आदेश दिया।
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नेत्र विभाग के निर्माण ठेकेदार पर कार्रवाई: निर्माणाधीन नेत्र विभाग का भौतिक निरीक्षण करने पर कलेक्टर ने पाया कि काम को निर्धारित समयावधि के भीतर पूरा नहीं किया गया है। कार्य में देरी को लेकर उन्होंने संबंधित ठेकेदार को तत्काल 'कारण बताओ सूचना पत्र' जारी करने के निर्देश दिए।
4. लैब जांचों की शुद्धता सुनिश्चित करने और 24×7 डॉक्टरों की तैनाती के कड़े दिशा-निर्देश
अस्पताल की मुख्य चिकित्सीय व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए कलेक्टर ने डॉक्टरों और चिकित्सा स्टाफ को कुछ नई और कड़ी गाइडलाइंस का पालन करने को कहा है:
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पैथोलॉजी लैब की रैंडम चेकिंग: प्रयोगशाला (लैब) के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने वहां की जाने वाली विभिन्न जटिल जांचों के बारे में पैथोलॉजिस्ट से विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि मरीजों से प्राप्त सैंपल्स की पूरी तरह सही और वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाए। जांच रिपोर्टों में किसी भी प्रकार की मानवीय भूल या तकनीकी गलती नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने पैथोलॉजिस्ट को निर्देशित किया कि वे समय-समय पर जांच रिपोर्ट्स को 'रैंडम चेक' (अचानक दोबारा जांच) भी करवाएं।
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24 घंटे डॉक्टरों की मुस्तैदी: मेटरनिटी (प्रसूति) वार्ड की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि डॉक्टर्स 24×7 (चौबीसों घंटे और सातों दिन) इस वार्ड में अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहने चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मेटरनिटी वार्ड में आने वाली महिलाओं और माताओं के लिए एक विशेषज्ञ काउंसलर की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए।
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SNCU स्टाफ को रिजर्व रखने के निर्देश: नवजात शिशुओं की गहन चिकित्सा इकाई यानी एसएनसीयू (SNCU) वार्ड के स्टाफ को हमेशा रिजर्व रखने तथा इस वार्ड में भी 24×7 दिवस डॉक्टरों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर लगाने के निर्देश दिए गए।
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जच्चा-बच्चा कार्ड और सुमन हेल्प डेस्क: कलेक्टर ने निर्देशित किया कि एएनएम (ANM) के माध्यम से गर्भवती माताओं और शिशुओं के 'जच्चा-बच्चा कार्ड' में सभी आवश्यक स्वास्थ्य जांचों को अनिवार्य रूप से दर्ज कराया जाए। साथ ही, उन्होंने 'सुमन हेल्प डेस्क' वार्ड का निरीक्षण कर वहां कंप्यूटर प्रणाली में की जाने वाली प्रविष्टियों को शत-प्रतिशत सही दर्ज करने तथा दर्ज की जा रही प्रविष्टियों की कुल संख्या को और अधिक बढ़ाने के निर्देश दिए।
5. वार्डों का आधुनिकीकरण: स्मार्ट टीवी, बेडशीट प्रबंधन और पानी के लिए नया बोरवेल
शाजापुर जिला अस्पताल के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल के लिए कलेक्टर ने भविष्यन्मुखी योजनाओं पर बल दिया:
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नवीन भवन में एनआरसी का स्थानांतरण और स्मार्ट टीवी: पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC वार्ड) के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने वहां भर्ती सेम-मेम (SAM-MAM) श्रेणी के अत्यधिक कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य लाभ की स्थिति जानी। उन्होंने बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार के बारे में संबंधित डॉक्टरों से विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि एनआरसी में भर्ती बच्चों को निर्धारित पोषण आहार सारणी (डाइट चार्ट) के अनुसार ही पूर्ण पोषण प्रदान किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान एनआरसी वार्ड को एमसीएच (MCH) परिसर में बन रहे नवीन एनआरसी वार्ड में तत्काल स्थानांतरित करने और बच्चों के मनोरंजन व मानसिक जुड़ाव के लिए वहां 'स्मार्ट टीवी' लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी को एमसीएच भवन में बनाए जा रहे एनआरसी वार्डों का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण करने की जिम्मेदारी सौंपी।
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प्रतिदिन बेडशीट बदलना अनिवार्य: अस्पताल में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि मरीजों की बेडशीट प्रतिदिन अनिवार्य रूप से बदली जाए। जो बेडशीट पुरानी, फटी या खराब हो चुकी हैं, उन्हें नियमों के तहत अपलेखन (राईट-ऑफ) कर तुरंत नई बेडशीट खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
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परिसर में नवीन बोरवेल खनन: नवनिर्मित एमसीएच भवन परिसर में पानी की निर्बाध और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल एक नवीन बोरवेल कराने के निर्देश भी दिए।
इस संपूर्ण और सघन औचक निरीक्षण कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. कमला आर्य, जिला चिकित्सालय के आरएमओ (RMO), सिविल सर्जन सहित अस्पताल के अन्य वरिष्ठ डॉक्टर्स, विशेषज्ञ और प्रशासनिक अमला प्रमुख रूप से मौजूद रहा।
image source: https://shajapur.mpinfo.org

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