शिवपुरी। नगर पालिका परिषद शिवपुरी में बहाली के नाम पर कथित रिश्वत मांगने के चर्चित मामले में लोकायुक्त जांच अब बड़े मोड़ पर पहुंच गई है। स्थापना शाखा से जुड़े बाबू भगवानलाल करोसिया को कथित रूप से रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद अब मुख्य नगर पालिका अधिकारी ईशांक धाकड़ को भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12 के तहत सह आरोपी बनाया गया है।

लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले की विवेचना इंस्पेक्टर उपेंद्र दुबे द्वारा की जा रही है। जांच में निलंबित कर्मचारी की बहाली से जुड़ी पत्रावली, प्रशासनिक प्रक्रिया, संबंधित आदेशों और नगर पालिका की स्थापना शाखा की भूमिका को गंभीरता से परखा जा रहा है। इसी क्रम में सीएमओ ईशांक धाकड़ की भूमिका भी जांच के दायरे में आई और उन्हें धारा 12 पीसी एक्ट के तहत सह आरोपी बनाया गया है।

मामला एक निलंबित कर्मचारी की बहाली से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि बहाली कराने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए स्थापना शाखा के बाबू भगवानलाल करोसिया को कथित रूप से रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा था। इसके बाद जांच का दायरा केवल पकड़े गए बाबू तक सीमित न रहकर इस बात तक बढ़ा कि बहाली जैसे प्रशासनिक निर्णय में किसी वरिष्ठ अधिकारी का नाम, प्रभाव, संकेत, संरक्षण या भूमिका तो नहीं थी।

जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय द्वारा पूर्व में सीएमओ ईशांक धाकड़ को दस्तावेजों सहित उपस्थित होने के लिए पत्र जारी किया गया था। दिनांक 13 मई 2026 को जारी पत्र में उनसे मुख्य नगर पालिका अधिकारी पद पर पदस्थापना आदेश, निलंबन आदेश तथा उनके कार्यकाल में अधीनस्थ कर्मचारियों को निलंबित किए जाने संबंधी आदेशों एवं कार्यवाहियों की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं। साथ ही उन्हें 18 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कथन देने के लिए भी निर्देशित किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त के बुलावे के बावजूद सीएमओ ने अन्य कार्यों में व्यस्तता का हवाला देते हुए उपस्थित होने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने दस्तावेजी सामग्री, पत्रावली की स्थिति और बहाली प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को जांच में शामिल करते हुए प्रकरण को आगे बढ़ाया।

कानूनी जानकारों के अनुसार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12 दुष्प्रेरण से संबंधित है। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका भ्रष्टाचार संबंधी अपराध में सहायता, उकसावे, संरक्षण, मौन सहमति, प्रभाव या सहभागिता के रूप में सामने आती है, तो वह धारा 12 पीसी एक्ट के दायरे में आ सकता है। इस धारा के अंतर्गत दुष्प्रेरण दंडनीय है, चाहे मूल अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप पूरा हुआ हो या नहीं।

हालांकि कानूनी दृष्टि से केवल किसी अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा वरिष्ठ अधिकारी का नाम ले लेना अपने-आप किसी वरिष्ठ अधिकारी को आरोपी बनाने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता। इसके लिए जांच एजेंसी को स्वतंत्र सामग्री, दस्तावेजी साक्ष्य, दूरभाष विवरण, बातचीत, पत्रावली की आवाजाही, बहाली प्रक्रिया में भूमिका, धनराशि की कड़ी अथवा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर भूमिका स्थापित करनी होती है।

नगर पालिका शिवपुरी में निलंबन, बहाली और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर पहले से ही विवाद उठते रहे हैं। ऐसे में लोकायुक्त द्वारा दस्तावेज तलब किया जाना, सीएमओ को कथन हेतु बुलाया जाना और अब धारा 12 पीसी एक्ट के तहत सह आरोपी बनाया जाना पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।

फिलहाल प्रकरण विवेचना में है और अंतिम निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, कथनों और साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। लेकिन लोकायुक्त कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि बहाली जैसे प्रशासनिक निर्णय से जुड़े कथित रिश्वत प्रकरण में जांच अब उच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंच चुकी है।

इनका कहना है -

 जांच के दौरान सीएमओ ईशांक धाकड़ के विरुद्ध प्रथम दृष्टया कई अहम साक्ष्य सामने आए हैं। इसी आधार पर उन्हें लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था, किंतु उन्होंने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना उचित नहीं समझा। ऐसे में उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच सामग्री के आधार पर उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12 के तहत आरोपी बनाया गया है। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर उपेंद्र दुबे द्वारा की जा रही है और रिश्वत कांड में उनकी भूमिका की गहराई से जांच जारी है।

निरंजन शर्मा 

पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त ग्वालियर