– कमीशन की भेंट चढ़ रहा सौसर का पर्यावरण! पेड़ों की कटाई पर जांच या लीपापोती?

 

1. सौसर में सरेआम कट रहे हरे-भरे पेड़! जिम्मेदार विभागों की जांच पर उठे गंभीर सवाल!

2. पहले गीली लकड़ी मिली, पांच दिन बाद सूखी कैसे हो गई? जांच की कहानी में बड़ा सवाल!

3. पेड़ों की कटाई पर प्रशासन मौन? पंचनामा बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप!

4. मशीनों से उजड़ रही हरियाली, अधिकारी कर रहे जांच का इंतजार!

5. पर्यावरण की कीमत पर लकड़ी का कारोबार? सौसर में वन विभाग से लेकर प्रशासन तक जवाबदेही के घेरे में!

 

पांढुर्णा जिले के सौसर क्षेत्र में क्या पर्यावरण की हरियाली कमीशनखोरी और लापरवाही की भेंट चढ़ रही है? क्या सड़कों के किनारे खड़े वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को आधुनिक मशीनों से काटकर लकड़ी के कारोबार में खपाया जा रहा है?

 

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मामले की सूचना वन विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक पहुंचाई गई। एसडीएम मौके पर पहुंचे, जांच का आश्वासन दिया गया, गीली लकड़ी मिलने की बात भी सामने आई। लेकिन पांच दिन बाद जब दोबारा जांच हुई तो लकड़ी सूखी बताई गई और पुराने बिलों का हवाला दिया गया।

 

अब सवाल यह है कि आखिर इन पांच दिनों में ऐसा क्या हुआ कि जांच की तस्वीर ही बदल गई? क्या यह महज विभागीय लापरवाही है या फिर जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश?

दरअसल, सौसर क्षेत्र में राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले इलाकों में बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सड़कों के किनारे लगे विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों को आधुनिक मशीनों के जरिए काटे जाने की जानकारी सामने आई है।

 

बताया जा रहा है कि इन पेड़ों से निकली लकड़ियों के टुकड़े एक प्लॉud कंपनी तक पहुंचाए गए थे। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को भी दी गई, लेकिन जांच में देरी को लेकर सवाल खड़े होने लगे।

 

मामले की शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंची। इसके बाद देर शाम सौसर एसडीएम सिद्धार्थ पटेल मौके पर पहुंचे और जांच के लिए तस्वीरें भी ली गईं।

 

### वीओ – 2 | पांच दिन बाद भी कार्रवाई कहां?

 

मामले में पांच दिन पहले मौके पर पहुंचे एसडीएम सिद्धार्थ पटेल ने पत्रकार से चर्चा के दौरान गीली लकड़ी मिलने की बात कही थी। साथ ही लकड़ी की जांच और क्षेत्र की तीन आरा मशीनों की जांच कराने की बात भी कही गई थी।

 

लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी न तो किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने आई और न ही मौके पर तत्काल पंचनामा बनाए जाने की बात स्पष्ट हुई।

 

इसके बाद शुक्रवार को एसडीएम दोबारा संबंधित कंपनी पहुंचे। पत्रकार द्वारा जब लकड़ी के स्रोत और उसकी स्थिति को लेकर सवाल किए गए, तब जांच की प्रक्रिया और वन विभाग के पंचनामे को लेकर नई जानकारी सामने आई।

 

### वीओ – 3 | गीली लकड़ी पांच दिन में सूखी कैसे?

 

अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की जांच पर खड़ा हो रहा है।

 

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को वन विभाग द्वारा पंचनामा तैयार किया गया और लकड़ी के समर्थन में पुराने बिलों का हवाला दिया गया। साथ ही लकड़ी को सूखा बताया गया।

 

लेकिन सवाल यह है कि पांच दिन पहले जिस लकड़ी को मौके पर गीला बताया गया था, वह पांच दिन बाद सूखी कैसे हो गई?

 

क्या लकड़ी की स्थिति की वैज्ञानिक जांच कराई गई? क्या पुराने बिलों का मौके पर मौजूद लकड़ी से मिलान किया गया? क्या यह प्रमाणित किया गया कि लकड़ी वास्तव में उसी क्षेत्र से आई थी, जहां पेड़ों की कटाई की शिकायत की गई थी?

 

या फिर जांच के दौरान केवल दस्तावेजों के आधार पर मामले को समाप्त करने की कोशिश की गई?

 

### वीओ – 4 | जिम्मेदारी किसकी?

 

हैरानी की बात यह भी है कि करीब 15 दिन पहले हरे-भरे पेड़ों की कटाई की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। तहसीलदार को भी जानकारी दिए जाने की बात सामने आई, लेकिन समय रहते मौके पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

 

अब वन विभाग का कहना है कि उसके विभाग के पेड़ नहीं काटे गए। दूसरी तरफ राजस्व क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल बने हुए हैं।

 

ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इन पेड़ों की कटाई की जिम्मेदारी किस विभाग की है? किसकी अनुमति से पेड़ काटे गए? लकड़ी किस क्षेत्र से आई? और यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो प्रशासन पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं करता?

 

### रिपोर्टर क्लोजिंग

 

सौसर में पेड़ों की कटाई का यह मामला अब सिर्फ लकड़ी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। यह पर्यावरण संरक्षण, सरकारी जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता की भी परीक्षा बन चुका है।

 

जांच के नाम पर तारीखें गुजर रही हैं, लेकिन सवाल आज भी वहीं खड़े हैं।

 

**आखिर पेड़ों की कटाई पर कार्रवाई कब होगी? गीली लकड़ी सूखी कैसे हुई? और क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?**

 

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